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10-06-2026

जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी चुरा सकती है रातों की नींद

  •  आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अच्छी और गहरी नींद लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही है। कई लोग रात को समय पर बिस्तर पर तो चले जाते हैं, लेकिन घंटों तक नींद नहीं आती। कुछ लोगों की नींद बार-बार टूटती है, जबकि कुछ सुबह उठते ही खुद को थका हुआ महसूस करते हैं। आमतौर पर इसकी वजह तनाव, काम का दबाव, मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल या अनियमित दिनचर्या को माना जाता है। हालांकि वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि कई मामलों में शरीर में कुछ जरूरी विटामिन और पोषत तत्वों की कमी भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब हम सोते हैं, तब शरीर खुद की मरम्मत करता है, मस्तिष्क दिनभर की जानकारियों को व्यवस्थित करता है और हार्मोन संतुलित होते हैं। अगर यह प्रक्रिया बार-बार बाधित होती है, तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है। लंबे समय तक खराब नींद रहने से थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। शोधों में विटामिन डी को नींद से जुड़े महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में से एक माना गया है। विटामिन डी केवल हड्डियों के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क और शरीर की कई जैविक प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाता है। जिन लोगों में विटामिन डी का स्तर कम होता है, उनमें नींद की अवधि कम हो सकती है या रात में नींद बार-बार टूट सकती है। हालांकि यह संबंध हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता और इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसी तरह विटामिन बी12 को भी शरीर की तंत्रिका प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह विटामिन बॉडी क्लॉक को संतुलित रखने में मदद करता है। जब इसका स्तर बहुत कम हो जाता है, तो कुछ लोगों में नींद और जागने के प्राकृतिक चक्र पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही थकान, कमजोरी और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं। मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देने और तंत्रिका तंत्र को शांत रखने में मदद करता है। जिन लोगों के शरीर में मैग्नीशियम की कमी होती है, उन्हें बेचैनी, तनाव और नींद आने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। आयरन की कमी भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। डॉक्टर बताते हैं कि शरीर में आयरन कम होने पर ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे लगातार थकान महसूस हो सकती है। कुछ लोगों में यह स्थिति रेस्टलेस लेग सिंड्रोम जैसी समस्या से भी जुड़ी हो सकती है, जिसमें पैरों में असहजता महसूस होती है और नींद बाधित होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से नींद नहीं आ रही है और इसके साथ लगातार कमजोरी, ध्यान की कमी, बार-बार मूड बदलना, सिरदर्द या सामान्य काम करने में भी ज्यादा थकान महसूस हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर आवश्यक जांच करानी चाहिए।

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जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी चुरा सकती है रातों की नींद

 आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अच्छी और गहरी नींद लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही है। कई लोग रात को समय पर बिस्तर पर तो चले जाते हैं, लेकिन घंटों तक नींद नहीं आती। कुछ लोगों की नींद बार-बार टूटती है, जबकि कुछ सुबह उठते ही खुद को थका हुआ महसूस करते हैं। आमतौर पर इसकी वजह तनाव, काम का दबाव, मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल या अनियमित दिनचर्या को माना जाता है। हालांकि वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि कई मामलों में शरीर में कुछ जरूरी विटामिन और पोषत तत्वों की कमी भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब हम सोते हैं, तब शरीर खुद की मरम्मत करता है, मस्तिष्क दिनभर की जानकारियों को व्यवस्थित करता है और हार्मोन संतुलित होते हैं। अगर यह प्रक्रिया बार-बार बाधित होती है, तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है। लंबे समय तक खराब नींद रहने से थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। शोधों में विटामिन डी को नींद से जुड़े महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में से एक माना गया है। विटामिन डी केवल हड्डियों के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क और शरीर की कई जैविक प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाता है। जिन लोगों में विटामिन डी का स्तर कम होता है, उनमें नींद की अवधि कम हो सकती है या रात में नींद बार-बार टूट सकती है। हालांकि यह संबंध हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता और इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसी तरह विटामिन बी12 को भी शरीर की तंत्रिका प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह विटामिन बॉडी क्लॉक को संतुलित रखने में मदद करता है। जब इसका स्तर बहुत कम हो जाता है, तो कुछ लोगों में नींद और जागने के प्राकृतिक चक्र पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही थकान, कमजोरी और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं। मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देने और तंत्रिका तंत्र को शांत रखने में मदद करता है। जिन लोगों के शरीर में मैग्नीशियम की कमी होती है, उन्हें बेचैनी, तनाव और नींद आने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। आयरन की कमी भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। डॉक्टर बताते हैं कि शरीर में आयरन कम होने पर ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे लगातार थकान महसूस हो सकती है। कुछ लोगों में यह स्थिति रेस्टलेस लेग सिंड्रोम जैसी समस्या से भी जुड़ी हो सकती है, जिसमें पैरों में असहजता महसूस होती है और नींद बाधित होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से नींद नहीं आ रही है और इसके साथ लगातार कमजोरी, ध्यान की कमी, बार-बार मूड बदलना, सिरदर्द या सामान्य काम करने में भी ज्यादा थकान महसूस हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर आवश्यक जांच करानी चाहिए।


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