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08-06-2026

देश-प्रदेश के पर्यटन स्थलों के लिए मॉडल बनेगा सज्जनगढ़ का नो-प्लास्टिक अभियान

  •  विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नीर अमृत के सहयोग से उदयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थल सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य, मानसून पैलेस और सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क को प्लास्टिक बोतल मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है। वन विभाग (वन्यजीव) की ओर से पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य पर्यटन स्थलों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है। सज्जनगढ़ उदयपुर के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटकों द्वारा उपयोग के बाद फेंकी जाने वाली प्लास्टिक की बोतलें वन्यजीवों, पर्यावरण और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए लगातार चुनौती बन रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सेदू राम यादव ने बताया कि जैविक उद्यान सज्जनगढ़ और सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को प्लास्टिक मुक्त रखने के लिए प्लास्टिक की पानी की बोतलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा रहा है। अभयारण्य क्षेत्र में प्लास्टिक की पानी की बोतल का उपयोग पाए जाने पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। पर्यटकों को सज्जनगढ़ टिकट विंडो के पास कांच की बोतल में 500 एमएल पानी 50 रुपये में उपलब्ध कराया जाएगा। खाली बोतल वापस जमा कराने पर 40 रुपये लौटाए जाएंगे। यह व्यवस्था प्रायोगिक तौर पर विश्व पर्यावरण दिवस से ‘नीर अमृत’ संस्था के माध्यम से शुरू की गई है। इस पहल से सिंगल यूज प्लास्टिक की खपत में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है, साथ ही पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में उप वन संरक्षक (वन्यजीव) यादवेन्द्र सिंह चूंडावत, सहायक वन संरक्षक सुरभि शर्मा, क्षेत्रीय वन अधिकारी विनोद कुमार तंवर, क्षेत्रीय वन अधिकारी सियाराम मीणा, क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रभुलाल मीणा, वनपाल अजीत सिंह राणावत, ‘नीर अमृत’ के संस्थापक भूपेन्द्र सिंह तथा ग्रीन पीपल सोसायटी के राहुल भटनागर मौजूद रहे।

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देश-प्रदेश के पर्यटन स्थलों के लिए मॉडल बनेगा सज्जनगढ़ का नो-प्लास्टिक अभियान

 विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नीर अमृत के सहयोग से उदयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थल सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य, मानसून पैलेस और सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क को प्लास्टिक बोतल मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है। वन विभाग (वन्यजीव) की ओर से पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य पर्यटन स्थलों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है। सज्जनगढ़ उदयपुर के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटकों द्वारा उपयोग के बाद फेंकी जाने वाली प्लास्टिक की बोतलें वन्यजीवों, पर्यावरण और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए लगातार चुनौती बन रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सेदू राम यादव ने बताया कि जैविक उद्यान सज्जनगढ़ और सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को प्लास्टिक मुक्त रखने के लिए प्लास्टिक की पानी की बोतलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा रहा है। अभयारण्य क्षेत्र में प्लास्टिक की पानी की बोतल का उपयोग पाए जाने पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। पर्यटकों को सज्जनगढ़ टिकट विंडो के पास कांच की बोतल में 500 एमएल पानी 50 रुपये में उपलब्ध कराया जाएगा। खाली बोतल वापस जमा कराने पर 40 रुपये लौटाए जाएंगे। यह व्यवस्था प्रायोगिक तौर पर विश्व पर्यावरण दिवस से ‘नीर अमृत’ संस्था के माध्यम से शुरू की गई है। इस पहल से सिंगल यूज प्लास्टिक की खपत में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है, साथ ही पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में उप वन संरक्षक (वन्यजीव) यादवेन्द्र सिंह चूंडावत, सहायक वन संरक्षक सुरभि शर्मा, क्षेत्रीय वन अधिकारी विनोद कुमार तंवर, क्षेत्रीय वन अधिकारी सियाराम मीणा, क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रभुलाल मीणा, वनपाल अजीत सिंह राणावत, ‘नीर अमृत’ के संस्थापक भूपेन्द्र सिंह तथा ग्रीन पीपल सोसायटी के राहुल भटनागर मौजूद रहे।


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