भारत के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज क्चस्श्व ने वित्त वर्ष 2025-26 (स्नङ्घ26) में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। मार्च तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 61 प्रतिशत बढक़र 795.47 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस वृद्धि की मुख्य वजह डेरिवेटिव्स कारोबार से होने वाला रेवेन्यू और ट्रेडिंग गतिविधियों में तेज बढ़ोतरी रही। एक्सचेंज ने इसे अपने 150 साल के इतिहास का सबसे मजबूत वित्तीय प्रदर्शन बताया है। जनवरी-मार्च तिमाही में कंपनी का कुल समेकित रेवेन्यू 1,630 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 926.38 करोड़ था। पूरे वित्त वर्ष में क्चस्श्व का शुद्ध लाभ 88 प्रतिशत बढक़र 2,487 करोड़ पहुंच गया, जबकि स्नङ्घ25 में यह 1,322 करोड़ रुपये था। वहीं, कंपनी का कुल रेवेन्यू 59 प्रतिशत बढक़र रिकॉर्ड 5,148 करोड़ रुपये हो गया। क्चस्श्व के मजबूत प्रदर्शन में इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट की सबसे बड़ी भूमिका रही। इस सेगमेंट से वार्षिक रेवेन्यू दोगुनी से अधिक होकर 3,134 करोड़ रुपये पहुंच गई। औसत दैनिक प्रीमियम टर्नओवर 118 प्रतिशत बढक़र 19,522 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष में 8,977 करोड़ था। पोस्ट-रिजल्ट विश्लेषक कॉल में क्चस्श्व के प्रबंध निदेशक और सीईओ सुंदररामन राममूर्ति ने कहा कि एक्सचेंज अभी भी अपनी 7-8 प्रतिशत कैश मार्केट हिस्सेदारी से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट ऑर्डर रूटिंग (स्ह्रक्र) व्यवस्था लागू होने में देरी का असर बाजार हिस्सेदारी की वृद्धि पर पड़ा है। यह तकनीक ब्रोकर्स को विभिन्न एक्सचेंजों में सबसे बेहतर कीमत पर ऑर्डर भेजने में मदद करती है। इस बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (स्नक्कढ्ढ) की संख्या में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। क्चस्श्व पर स्नक्कढ्ढ की संख्या 100 बढक़र 520 हो गई। कंपनी ने लगभग 800 स्नक्कढ्ढ जोडऩे का लक्ष्य रखा है। राममूर्ति ने कहा कि इससे संकेत मिलता है कि अधिक दीर्घकालिक निवेशक भारतीय बाजार में सक्रिय हो रहे हैं। एक्सचेंज ने यह भी संकेत दिया कि वह कमोडिटी डेरिवेटिव्स कारोबार में प्रवेश की योजना बना रहा है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि वह केवल दूसरों की नकल करने के बजाय अपने लिए अलग और मजबूत वैल्यू प्रपोजिशन तैयार करना चाहती है।