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16-04-2026

मार्च में रूस से इंडिया का क्रूड ऑयल इंपोर्ट 3 गुना होकर 5.3 बिलियन यूरो पर

  •  भारत की मार्च, 2026 में रूस से कच्चे तेल की खरीद तीन गुना से अधिक होकर 5.3 बिलियन यूरो रही है। यह वृद्धि इंपोर्ट मात्रा दोगुनी होने और वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के कारण हुई। यूरोपीय शोध संस्था सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में खरीद में गिरावट के बाद मार्च में भारत ने रूस से तेल की खरीद फिर तेज कर दी। रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च, 2026 में भारत रूस से जीवाश्म फ्यूल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश रहा। इस दौरान भारत ने कुल 5.8 बिलियन यूरो के रूसी फ्यूल उत्पादों का इंपोर्ट किया, जिनमें कच्चे तेल की हिस्सेदारी 91 प्रतिशत (5.3 बिलियन यूरो) रही। शेष इंपोर्ट में कोयला (33.7 करोड़ यूरो) और पेट्रोलियम उत्पाद (17.85 करोड़ यूरो) शामिल रहे। फरवरी में भारत, रूस से ऊर्जा इंपोर्ट करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश था और कुल इंपोर्ट 1.8 बिलियन यूरो रहा था। उस समय कच्चे तेल की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत (1.4 बिलियन यूरो) थी। कोयले की हिस्सेदारी 22.3 करोड़ यूरो और पेट्रोलियम उत्पादों की 12.1 करोड़ यूरो थी। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में भारत के कुल कच्चे तेल इंपोर्ट में चार प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, लेकिन रूस से इंपोर्ट दोगुना हो गया। यह वृद्धि अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर एक महीने की प्रतिबंध छूट दिए जाने के बाद हुई। यह छूट पहले से समुद्र में मौजूद खेपों और पहले प्रतिबंधित जहाजों से हो रही आपूर्ति पर लागू थी। इसका उद्देश्य ईरान के साथ तनाव के बाद बढ़ी कीमतों को नियंत्रित करना था। इस छूट के बाद सरकारी रिफाइनरियों, जिन्होंने पहले रूस से तेल खरीद रोक दी थी, ने फिर से इंपोर्ट शुरू कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च में सबसे बड़ा बदलाव सरकारी रिफाइनरियों के इंपोर्ट में देखा गया, जिसमें मासिक आधार पर 148 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह इंपोर्ट मार्च, 2025 की तुलना में 72 प्रतिशत अधिक रहा, जिसका कारण वायदा बाजार में रूसी तेल की अधिक उपलब्धता बताया गया है। मैंगलुरु और विशाखापत्तनम स्थित सरकारी रिफाइनरियों ने नवंबर, 2025 के अंत में रूस से इंपोर्ट रोक दिया था, लेकिन मार्च, 2026 में फिर से खरीद शुरू कर दी। फरवरी में भारत, चीन और तुर्किये के बाद तीसरा सबसे बड़ा आयातक था। रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में रूस से भारत के कच्चे तेल इंपोर्ट में 19 प्रतिशत की कमी आई थी, जबकि कुल इंपोर्ट में नौ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बावजूद रूस फरवरी में भी भारत का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल आपूर्तिकर्ता बना रहा और कुल इंपोर्ट में उसकी हिस्सेदारी 20 प्रतिशत थी। सीआरईए ने कहा कि रूस अपने तेल एक्सपोर्ट के लिए एशियाई बाजारों, खासकर भारत और चीन, पर अत्यधिक निर्भर है। 2026 की पहली तिमाही में रूस के कुल कच्चे तेल एक्सपोर्ट का 90 प्रतिशत हिस्सा इन दोनों देशों को गया। यूरोपीय संघ द्वारा 21 जनवरी, 2026 से रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों के इंपोर्ट पर प्रतिबंध के बावजूद, मार्च में ऐसे 14 जहाजों ने यूरोपीय बंदरगाहों पर तेल उत्पाद उतारे, जो रूसी कच्चे तेल का उपयोग करने वाली रिफाइनरियों से जुड़े थे। यूरोपीय संघ द्वारा 21 जनवरी, 2026 से रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों के इंपोर्ट पर प्रतिबंध के बावजूद, मार्च में ऐसे 14 जहाजों ने यूरोपीय बंदरगाहों पर तेल उत्पाद उतारे, जो रूसी कच्चे तेल का उपयोग करने वाली रिफाइनरियों से जुड़े थे। इनमें से नौ खेप तुर्किये की रिफाइनरियों से, चार भारत से और एक जॉर्जिया से भेजी गई थीं। कुछ जहाजों ने कई यूरोपीय बंदरगाहों पर तेल उत्पाद उतारे। फ्रांस मार्च में इन खेप का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता रहा, जहां चार खेप उतारी गईं, इसके बाद साइप्रस (तीन खेप) का स्थान रहा। इसके अलावा बेल्जियम, बुल्गारिया, इटली और नीदरलैंड ने भी दो-दो खेप प्राप्त कीं। रिपोर्ट में कहा गया कि सदस्य देशों की प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसे इंपोर्ट की जांच करनी चाहिए, ताकि रूसी कच्चे तेल से बने उत्पाद यूरोपीय संघ में प्रवेश न कर सकें और प्रतिबंध का उल्लंघन न हो।

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मार्च में रूस से इंडिया का क्रूड ऑयल इंपोर्ट 3 गुना होकर 5.3 बिलियन यूरो पर

 भारत की मार्च, 2026 में रूस से कच्चे तेल की खरीद तीन गुना से अधिक होकर 5.3 बिलियन यूरो रही है। यह वृद्धि इंपोर्ट मात्रा दोगुनी होने और वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के कारण हुई। यूरोपीय शोध संस्था सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में खरीद में गिरावट के बाद मार्च में भारत ने रूस से तेल की खरीद फिर तेज कर दी। रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च, 2026 में भारत रूस से जीवाश्म फ्यूल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश रहा। इस दौरान भारत ने कुल 5.8 बिलियन यूरो के रूसी फ्यूल उत्पादों का इंपोर्ट किया, जिनमें कच्चे तेल की हिस्सेदारी 91 प्रतिशत (5.3 बिलियन यूरो) रही। शेष इंपोर्ट में कोयला (33.7 करोड़ यूरो) और पेट्रोलियम उत्पाद (17.85 करोड़ यूरो) शामिल रहे। फरवरी में भारत, रूस से ऊर्जा इंपोर्ट करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश था और कुल इंपोर्ट 1.8 बिलियन यूरो रहा था। उस समय कच्चे तेल की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत (1.4 बिलियन यूरो) थी। कोयले की हिस्सेदारी 22.3 करोड़ यूरो और पेट्रोलियम उत्पादों की 12.1 करोड़ यूरो थी। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में भारत के कुल कच्चे तेल इंपोर्ट में चार प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, लेकिन रूस से इंपोर्ट दोगुना हो गया। यह वृद्धि अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर एक महीने की प्रतिबंध छूट दिए जाने के बाद हुई। यह छूट पहले से समुद्र में मौजूद खेपों और पहले प्रतिबंधित जहाजों से हो रही आपूर्ति पर लागू थी। इसका उद्देश्य ईरान के साथ तनाव के बाद बढ़ी कीमतों को नियंत्रित करना था। इस छूट के बाद सरकारी रिफाइनरियों, जिन्होंने पहले रूस से तेल खरीद रोक दी थी, ने फिर से इंपोर्ट शुरू कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च में सबसे बड़ा बदलाव सरकारी रिफाइनरियों के इंपोर्ट में देखा गया, जिसमें मासिक आधार पर 148 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह इंपोर्ट मार्च, 2025 की तुलना में 72 प्रतिशत अधिक रहा, जिसका कारण वायदा बाजार में रूसी तेल की अधिक उपलब्धता बताया गया है। मैंगलुरु और विशाखापत्तनम स्थित सरकारी रिफाइनरियों ने नवंबर, 2025 के अंत में रूस से इंपोर्ट रोक दिया था, लेकिन मार्च, 2026 में फिर से खरीद शुरू कर दी। फरवरी में भारत, चीन और तुर्किये के बाद तीसरा सबसे बड़ा आयातक था। रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में रूस से भारत के कच्चे तेल इंपोर्ट में 19 प्रतिशत की कमी आई थी, जबकि कुल इंपोर्ट में नौ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बावजूद रूस फरवरी में भी भारत का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल आपूर्तिकर्ता बना रहा और कुल इंपोर्ट में उसकी हिस्सेदारी 20 प्रतिशत थी। सीआरईए ने कहा कि रूस अपने तेल एक्सपोर्ट के लिए एशियाई बाजारों, खासकर भारत और चीन, पर अत्यधिक निर्भर है। 2026 की पहली तिमाही में रूस के कुल कच्चे तेल एक्सपोर्ट का 90 प्रतिशत हिस्सा इन दोनों देशों को गया। यूरोपीय संघ द्वारा 21 जनवरी, 2026 से रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों के इंपोर्ट पर प्रतिबंध के बावजूद, मार्च में ऐसे 14 जहाजों ने यूरोपीय बंदरगाहों पर तेल उत्पाद उतारे, जो रूसी कच्चे तेल का उपयोग करने वाली रिफाइनरियों से जुड़े थे। यूरोपीय संघ द्वारा 21 जनवरी, 2026 से रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों के इंपोर्ट पर प्रतिबंध के बावजूद, मार्च में ऐसे 14 जहाजों ने यूरोपीय बंदरगाहों पर तेल उत्पाद उतारे, जो रूसी कच्चे तेल का उपयोग करने वाली रिफाइनरियों से जुड़े थे। इनमें से नौ खेप तुर्किये की रिफाइनरियों से, चार भारत से और एक जॉर्जिया से भेजी गई थीं। कुछ जहाजों ने कई यूरोपीय बंदरगाहों पर तेल उत्पाद उतारे। फ्रांस मार्च में इन खेप का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता रहा, जहां चार खेप उतारी गईं, इसके बाद साइप्रस (तीन खेप) का स्थान रहा। इसके अलावा बेल्जियम, बुल्गारिया, इटली और नीदरलैंड ने भी दो-दो खेप प्राप्त कीं। रिपोर्ट में कहा गया कि सदस्य देशों की प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसे इंपोर्ट की जांच करनी चाहिए, ताकि रूसी कच्चे तेल से बने उत्पाद यूरोपीय संघ में प्रवेश न कर सकें और प्रतिबंध का उल्लंघन न हो।


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