वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय प्रौद्योगिकी स्टार्टअप कंपनियों का कुल वित्तपोषण 18 प्रतिशत घटकर 11.7 बिलियन डॉलर रह गया जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में इन कंपनियों ने 14.3 बिलियन डॉलर जुटाए थे। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। बाजार के आंकड़ों पर नजर रखने वाली संस्था ट्रैक्सन की रिपोर्ट कहती है कि 2025-26 में प्रौद्योगिकी स्टार्टअप का वित्तपोषण कम होने के बावजूद वैश्विक स्तर पर निवेश जुटाने के मामले में भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और चीन के बाद चौथे स्थान पर बना हुआ है।रिपोर्ट के मुताबिक, नए विचारों पर काम शुरू करने के लिए मिलने वाले निवेश यानी सीड फंडिंग में 15 प्रतिशत की कमी आई है और यह घटकर 1.3 बिलियन डॉलर रह गया। वित्त वर्ष 2024-25 में इन कंपनियों ने 1.5 बिलियन डॉलर जुटाए थे। हालांकि कारोबार के विस्तार की योजना बना रहे शुरुआती चरण के स्टार्टअप के निवेश में तेजी देखी गई और यह पिछले वित्त वर्ष में 33 प्रतिशत बढक़र 4.8 बिलियन डॉलर पहुंच गया। इन कंपनियों ने वित्त वर्ष 2024-25 में 3.6 बिलियन डॉलर और वित्त वर्ष 2023-24 में 3.5 बिलियन डॉलर जुटाए थे। रिपोर्ट कहती है कि बड़े स्तर पर स्थापित हो चुके स्टार्टअप ने वित्त वर्ष 2025-26 में 5.6 बिलियन डॉलर जुटाए, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 9.2 बिलियन डॉलर के मुकाबले 38 प्रतिशत कम है।