इंडोनेशिया ने चीन की गर्दन दबा ली है। चीन को हाईटेक इंडस्ट्री के लिए निकल चाहिए। निकल माइन्स पर इंडोनेशिया की मोनोपॉली है और उसने निकल पर कंट्रोल कड़ा कर दिया है। नतीजा चीन के आमजन में इंडोनेशिया के खिलाफ नाराजगी भडक़ाई जा रही है। चीन पहले भी साउथ कोरिया और जापान के खिलाफ ऐसे ही जनभावना भडक़ाता रहा है। चीन ने कहा है कि इंडोनेशिया के नए नियमों से 50 बिलियन डॉलर का फ्यूचर इंवेस्टमेंट खटाई में पड़ सकता है। चीन ने कुछ महीने पहले हाईटेक के लिए जरूरी क्रिटिकल मीनरल का एक्सपोर्ट एंड यूजर की शर्त लगाकर ब्लॉक कर दिया था। भारत की टनल बोरिंग मशीन का मामला तो सब जानते हैं। इंडोनेशिया दरअसल चीन की ही तरह रिसोर्स नेशनलिज्म की पॉलिसी को लागू कर रहा है। लेकिन इंडोनेशिया की निकल इंडस्ट्री में चीन का दबदबा और भारी-भरकम इंवेस्टमेंट है। निकल ग्लोबल इलेक्ट्रिक वेहीकल बैटरी के लिए क्रिटिकल कड़ी है। रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ने कहा है कि इंडोनेशिया की नई पॉलिसी से करीब 30 बिलियन डॉलर के मौजूदा और 20 बिलियन डॉलर के फ्यूचर प्रोजेक्ट्स खतरे में पड़ सकते हैं। चीन ने चेतावनी दी कि इंडोनेशिया का सालाना निकल एक्सपोर्ट 23 बिलियन डॉलर तक घट सकता है और 4 लाख तक नौकरियों पर असर पड़ सकता है। इंडोनेशिया ने नई पॉलिसी के तहत माइनिंग प्रोडक्शन कोटा में कटौती करने के के साथ निकल प्राइसिंग का नया सिस्टम लागू कर दिया है। चीन ने कहा है कि प्राइसिंग सिस्टम बदलने से बैटरी-ग्रेड निकल की प्रोडक्शन कॉस्ट करीब 200 परसेंट बढ़ गई है। भारत के इन दो पडौसी देशों के बीच बढ़े विवाद से पता चलता है कि क्लीन टेक्नोलॉजी के लिए निकल कितना अहम है। ग्लोबल रिफाइन्ड निकल प्रोडक्शन में इंडोनेशिया का शेयर दो-तिहाई से ज्यादा है। निकल अयस्क (ओर) का एक्सपोर्ट बैन कर और घरेलू प्रोसेसिंग बढ़ाकर इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है। हालांकि इंडोनेशिया की निकल माइन्स, स्मेल्टर, इंडस्ट्रियल पार्क, बैटरी इनपुट प्लांट्स और ईवी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में चीन की कंपनियों ने अरबों (बिलियन्स) डॉलर का इंवेस्टमेंट किया है। चीन और हांगकांग से आने वाला एफडीआई पिछले साल 18.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, इस तरह इंडोनेशिया के लिए चीन सबसे बड़ा फॉरेन इंवेस्टर है। इंडोनेशिया के प्रेसिडेंट प्रोबोवो सुबियांतो खनिज संसाधनों से होने वाले मुनाफे में देश की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहते है। रिपोर्ट्स के अनुसार नए नियमों के चलते कुछ चीनी प्रोसेसिंग यूनिट्स को अयस्क की कमी और कॉस्ट बढऩे के कारण प्रोडक्शन घटाना पड़ा है। इंडोनेशिया की सरकार ने रिसोर्स नेशनलिज्म की पॉलिसी को कड़ाई से लागू करने के लिए कोयला, पाम ऑइल और कुछ निकल प्रोडक्ट्स जैसी स्ट्रेटेजिक वस्तुओं के एक्सपोर्ट की मॉनिटरिंग के लिए नई सरकारी एजेंसी बना दी है जिससे प्रोसेसिंग कंपनियां फोरेन बायर को बेचने के लिए खुद स्टॉक नहीं खरीद पा रही हैं। रिसोर्स नेशनलिज्म के साथ ही इंडोनेशिया की सरकार अयस्क बेचने के बजाय प्रोसेसिंग (डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रियलाइजेशन) को बढ़ावा देना चाहती है ताकि ग्लोबल सप्लाई चेन पर कंट्रोल बढ़ सके।
