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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

03-04-2026

एफपीआई ने एफएआर सरकारी बॉन्ड से 17,689 करोड़ रुपये निकाले

  •  पश्चिम एशिया में संघर्ष के बाद बढ़ते बॉन्ड प्रतिफल के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने ‘फुली एक्सेसिबल रूट’ (एफएआर) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों से 17,689 करोड़ रुपये निकाले हैं। यह वैश्विक निवेशकों में जोखिम से बचने की बढ़ती प्रवृत्ति और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण मुद्रास्फीति दबावों को लेकर चिंता को दर्शाता है। क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआईएल) के आंकड़ों के अनुसार, एफएआर सरकारी प्रतिभूतियों (जीसेक) में एफपीआई का निवेश 27 फरवरी के 3,31,007.648 करोड़ रुपये से घटकर एक अप्रैल को 3,13,318.661 करोड़ रुपये रह गया है, जो हाल के सप्ताहों में विदेशी निवेशकों द्वारा निवेश घटाने का संकेत देता है बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह निकासी ऐसे समय पर हुई जब घरेलू बॉन्ड प्रतिफल में तेज बढ़ोतरी हुई। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया जिससे मुद्रास्फीति जोखिम बढऩे और उभरते बाजारों में वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने की आशंका बढ़ी है। इसी अवधि में भारतीय सरकारी बॉन्ड, विशेषकर 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल करीब 0.33 प्रतिशत बढ़ा। 27 मार्च को यह प्रतिफल सात प्रतिशत से अधिक हो गया था जो पिछले 20 महीनों का उच्चतम स्तर है और बॉन्ड बाजार में लगातार बिकवाली के दबाव को दर्शाता है। बॉन्ड बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंचे प्रतिफल से मौजूदा ‘बॉन्ड होल्डिंग’ कम आकर्षक हो जाती हैं। इसके कारण विदेशी निवेशक विशेषकर ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में जैसे एफएआर मार्ग के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में अपनी हिस्सेदारी घटाते हैं। एचडीएफसी बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, निकट अवधि में 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड प्रतिफल 6.90 से 7.20 प्रतिशत के दायरे में रह सकता है।

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एफपीआई ने एफएआर सरकारी बॉन्ड से 17,689 करोड़ रुपये निकाले

 पश्चिम एशिया में संघर्ष के बाद बढ़ते बॉन्ड प्रतिफल के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने ‘फुली एक्सेसिबल रूट’ (एफएआर) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों से 17,689 करोड़ रुपये निकाले हैं। यह वैश्विक निवेशकों में जोखिम से बचने की बढ़ती प्रवृत्ति और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण मुद्रास्फीति दबावों को लेकर चिंता को दर्शाता है। क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआईएल) के आंकड़ों के अनुसार, एफएआर सरकारी प्रतिभूतियों (जीसेक) में एफपीआई का निवेश 27 फरवरी के 3,31,007.648 करोड़ रुपये से घटकर एक अप्रैल को 3,13,318.661 करोड़ रुपये रह गया है, जो हाल के सप्ताहों में विदेशी निवेशकों द्वारा निवेश घटाने का संकेत देता है बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह निकासी ऐसे समय पर हुई जब घरेलू बॉन्ड प्रतिफल में तेज बढ़ोतरी हुई। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया जिससे मुद्रास्फीति जोखिम बढऩे और उभरते बाजारों में वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने की आशंका बढ़ी है। इसी अवधि में भारतीय सरकारी बॉन्ड, विशेषकर 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल करीब 0.33 प्रतिशत बढ़ा। 27 मार्च को यह प्रतिफल सात प्रतिशत से अधिक हो गया था जो पिछले 20 महीनों का उच्चतम स्तर है और बॉन्ड बाजार में लगातार बिकवाली के दबाव को दर्शाता है। बॉन्ड बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंचे प्रतिफल से मौजूदा ‘बॉन्ड होल्डिंग’ कम आकर्षक हो जाती हैं। इसके कारण विदेशी निवेशक विशेषकर ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में जैसे एफएआर मार्ग के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में अपनी हिस्सेदारी घटाते हैं। एचडीएफसी बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, निकट अवधि में 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड प्रतिफल 6.90 से 7.20 प्रतिशत के दायरे में रह सकता है।


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