इस बार दक्षिण भारत जायफल का उत्पादन कम हुआ है। दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में ऊंचे भाव होने से नीचे के भाव से तेजी का रुख बना हुआ है। उत्पादक मंडियों से निर्यातकों की लिवाली लगातार चल रही है तथा कुछ निर्यातक माल बेच चुके हैं, उसकी डिलीवरी के लिए पीछे से माल महंगा मिल रहा है, इसे देखते हुए इसमें 60/70 रुपए की और तेजी लग रही है। जायफल की फसल इस बार एर्नाकुलम लाइन में कम है, क्योंकि प्रतिकूल मौसम होने से कच्चे माल ज्यादा नुकसान हो गए थे, इस वजह से मंडियों में माल की आपूर्ति घट गई है। हम मानते हैं कि इस बार पुराना जायफल का स्टॉक अधिक बचा था, क्योंकि पिछले वर्ष लगातार मंदे का रुख बना हुआ था तथा विदेशों में माल की अधिकता से भाव नीचे चल रहे थे, जिससे निर्यात कम हुआ था। इस बार दहशत में सीजन के शुरुआत में जायफल 580/585 बन गया था, अब उसके भाव 780 रुपए प्रति किलो हो गए हैं। यानी नीचे के भाव से 200 रुपए की तेजी आ चुकी है। इसका मुख्य कारण यह है कि इंडोनेशिया एवं श्रीलंका में ऊंचे भाव होने से हमारा निर्यात अधिक होने की संभावना है। इस समय निर्यातक भी माल एर्नाकुलम लाइन से पकडऩे लगे हैं। अभी हाल ही में 200 डॉलर बढक़र श्रीलंका में 7700 डॉलर एवं इंडोनेशिया में 8000 डॉलर प्रति टन के आसपास बढिय़ा जायफल हो गया है। वर्तमान में सबसे सस्ता भारत का जायफल पड़ रहा है, जिससे यूएसए यूएई चीन सहित मेडलिस्ट देशों को जा रहा है, इस वजह से आने वाले समय में एर्नाकुलम लाइन में शॉर्टेज बन सकती है। यहां भी इसके भाव तेज हो गए हैं तथा कारोबारी 770/780 रुपए बोलने लगे हैं तथा 31 जनवरी तक 850/860 रुपए बन जाने की धारणा में बैठ गए हैं। गौरतलब है कि जावित्री एवं जायफल एक ही वृक्ष पर होने वाले फूल एवं फल हैं, जावित्री भी सीजन के शुरुआत में 2150 रुपए खुलकर यहां नीचे में 1750 रुपए फ्लावर माल देख आई है, अब उसके भाव 2250 रुपए हो गए हैं। उत्पादक मंडियों से आज की तारीख में जावित्री यहां मंगाने पर 2250/2300 रुपए का पड़ता आ रहा है। दूसरी ओर इस बार चूरा माल कम निकल रहा है तथा सिंगापुरी पहले से ही ऊंची भाव में बिक रही है, इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए इसमें भी 100/120 रुपए बढ़ जाने की संभावना है।