भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने डायमंड की पहचान और नामकरण को लेकर नया मानक लागू किया है। इसका मकसद ग्राहकों को भ्रम से बचाना और ज्वेलरी बाजार में साफ नियम लागू करना है। अब हीरा शब्द का इस्तेमाल केवल प्राकृतिक हीरे के लिए किया जा सकेगा। बिना किसी विशेषण के अगर कहीं डायमंड लिखा है, तो उसका मतलब सिर्फ प्राकृतिक हीरा होगा। इसके साथ नेचुरल, रियल, जेन्युइन या प्रेशियस जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर हीरा लैब में बनाया गया है, तो उसे हमेशा पूरे नाम के साथ बताना होगा। अब लेबोरेटरी-ग्रोन्ड डायमंड या लेबोरेटरी-क्रिएटेड डायमंड ही लिखा जा सकेगा। ...रुत्रष्ठ, लैब-ग्रोन या लैब-डायमंड जैसे छोटे शब्द अब मान्य नहीं होंगे। लैब में बने हीरे के लिए नेचर्स, प्योर, अर्थ-फ्रेंडली या कल्चर्ड जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। केवल ब्रांड नाम लिखकर भी हीरे को बेचने की अनुमति नहीं होगी, जब तक यह साफ न लिखा जाए कि वह लैब-ग्रोन हीरा है। नेचुरल डायमंड काउंसिल ने बीआईएस के इस फैसले का स्वागत किया है। काउंसिल का कहना है कि इससे ग्राहकों को साफ जानकारी मिलेगी और भरोसा बढ़ेगा। ज्वेलरी उद्योग से जुड़े कई बड़े कारोबारियों ने भी इस कदम को सही बताया है। उनका कहना है कि पारदर्शिता और ईमानदारी ही ज्वेलरी बिजनेस की असली नींव है। अब जब कोई ग्राहक हीरा खरीदेगा, तो उसे साफ पता होगा कि वह प्राकृतिक हीरा है या लैब में बना हुआ। यह नियम ग्राहकों के हितों की रक्षा करेगा और भारतीय ज्वेलरी बाजार में भरोसे को और मजबूत बनाएगा।