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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

23-05-2026

ब्रोकरेज सेक्टर में फिर लौटी रौनक, मार्च क्वार्टर में शानदार ग्रोथ

  •  भारतीय शेयर बाजार में 26 की शुरुआत जितनी सुस्त दिख रही थी, साल का अंत उतना ही धमाकेदार साबित हुआ। मार्च क्वार्टर में देश की बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए यह साबित कर दिया कि बाजार में हलचल, रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और डिजिटल ट्रेडिंग का कॉम्बिनेशन अब इस इंडस्ट्री का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में जहां डिस्काउंट ब्रोकिंग मॉडल ने ट्रेडिंग इंडस्ट्री का चेहरा बदल दिया, वहीं 26 में कंपनियों ने सिर्फ नए यूजर्स जोडऩे पर नहीं बल्कि ऑपरेटिंग एफिशिएंसी और प्रॉफिटेबिलिटी पर भी फोकस किया। इसका नतीजा यह रहा कि कई ब्रोकरेज हाउस ने मार्च क्वार्टर में रिकॉर्ड कमाई दर्ज की।

    ग्रो बना स्टार परफॉर्मर : कंपनी ने मार्च क्वार्टर में शानदार छलांग लगाई। ग्रो का रेवेन्यू और मुनाफा दोनों तेज़ी से बढ़े, जिससे यह 26 का सबसे चर्चित डिजिटल ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म बनकर उभरा। कंपनी का यूजर बेस 2.1 करोड़ के पार पहुंच गया, जबकि क्लाइंट एसेट्स में लगभग 35% की सालाना वृद्धि दर्ज हुई। बढ़ती ट्रेडिंग एक्टिविटी और मजबूत ऑपरेटिंग लीवरेज ने कंपनी की कमाई को नई ऊंचाई दी। विश्लेषकों का मानना है कि ग्रो ऐप जैसे प्लेटफॉर्म अब केवल ट्रेडिंग ऐप नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए डिजिटल फाइनेंशियल इकोसिस्टम बनते जा रहे हैं।

    एंजेल वन की कमाई में जोरदार उछाल : एंजेल वन ने मार्च क्वार्टर में लगभग 1,467.2 करोड़ रुपए का रेवेन्यू दर्ज किया, जबकि कंपनी का नेट प्रॉफिट करीब 320.2 करोड़ रुपए रहा। कंपनी की कमाई में यह उछाल बढ़ती ट्रेडिंग वॉल्यूम, मजबूत रिटेल भागीदारी और डिजिटल-फर्स्ट बिजनेस मॉडल की वजह से आया। बेहतर ऑपरेटिंग मार्जिन और कम लागत वाले ढांचे ने भी कंपनी के मुनाफे को मजबूत बनाए रखा।

    एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने दिखाई स्थिरता : एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने मार्च क्वार्टर में करीब 850 करोड़ रुपए का रेवेन्यू और लगभग 268 करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। हालांकि पूरे साल के आधार पर कंपनी के मुनाफे में कुछ दबाव देखने को मिला। शुरुआती महीनों में बाजार की सुस्ती और बढ़ती कर्मचारी लागत इसका बड़ा कारण रही। इसके बावजूद कंपनी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और ग्राहक विस्तार पर फोकस जारी रखा। छोटे ब्रोकर्स की मिली-जुली तस्वीर : जहां बड़ी कंपनियों ने शानदार ग्रोथ दिखाई, वहीं मिड और स्मॉल ब्रोकर्स के लिए तस्वीर थोड़ी मिश्रित रही।फाइव पैसा कैपिटल ने मार्च क्वार्टर में लगभग 85.5 करोड़ रुपए का रेवेन्यू और करीब 10.8 करोड़ रुपए का प्रॉफिट दर्ज किया। हालांकि कंपनी का मुनाफा पिछले साल की तुलना में कमजोर रहा क्योंकि ट्रेडिंग एक्टिविटी और मार्जिन दोनों पर दबाव बना रहा।इसके उलट आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स ने मजबूत मार्जिन ट्रेडिंग डिमांड की वजह से शानदार प्रदर्शन किया। वहीं एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज ने लो-बेस इफेक्ट के चलते मुनाफे में तेज उछाल दर्ज किया।

    क्यों चमका मार्च क्वार्टर? : मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्च क्वार्टर में बढ़ी बाजार अस्थिरता ने ट्रेडिंग वॉल्यूम को काफी बढ़ाया। जब बाजार में तेज उतार-चढ़ाव होता है, तब रिटेल ट्रेडर्स ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं — और यही ब्रोकरेज कंपनियों की कमाई का सबसे बड़ा स्रोत बनता है। इसके अलावा, डिजिटल ऑनबोर्डिंग, मोबाइल ट्रेडिंग और सोशल मीडिया आधारित निवेश ट्रेंड्स ने भी नए निवेशकों को तेजी से बाजार की ओर आकर्षित किया। 26 ने यह साफ कर दिया है कि भारत की ब्रोकिंग इंडस्ट्री अब सिर्फ ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि टेक-ड्रिवन फाइनेंशियल पावरहाउस बन चुकी है। हालांकि प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और ब्रोकरेज फीस पर दबाव भी बना हुआ है। आने वाले समय में वही कंपनियां टिकेंगी जो टेक्नोलॉजी, कस्टमर एक्सपीरियंस और प्रोडक्ट डायवर्सिफिकेशन पर लगातार निवेश करेंगी। फिलहाल इतना तय है — भारत का रिटेल निवेशक अब बाजार छोडऩे वाला नहीं है, और यही ब्रोकरेज इंडस्ट्री की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।

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ब्रोकरेज सेक्टर में फिर लौटी रौनक, मार्च क्वार्टर में शानदार ग्रोथ

 भारतीय शेयर बाजार में 26 की शुरुआत जितनी सुस्त दिख रही थी, साल का अंत उतना ही धमाकेदार साबित हुआ। मार्च क्वार्टर में देश की बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए यह साबित कर दिया कि बाजार में हलचल, रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और डिजिटल ट्रेडिंग का कॉम्बिनेशन अब इस इंडस्ट्री का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में जहां डिस्काउंट ब्रोकिंग मॉडल ने ट्रेडिंग इंडस्ट्री का चेहरा बदल दिया, वहीं 26 में कंपनियों ने सिर्फ नए यूजर्स जोडऩे पर नहीं बल्कि ऑपरेटिंग एफिशिएंसी और प्रॉफिटेबिलिटी पर भी फोकस किया। इसका नतीजा यह रहा कि कई ब्रोकरेज हाउस ने मार्च क्वार्टर में रिकॉर्ड कमाई दर्ज की।

ग्रो बना स्टार परफॉर्मर : कंपनी ने मार्च क्वार्टर में शानदार छलांग लगाई। ग्रो का रेवेन्यू और मुनाफा दोनों तेज़ी से बढ़े, जिससे यह 26 का सबसे चर्चित डिजिटल ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म बनकर उभरा। कंपनी का यूजर बेस 2.1 करोड़ के पार पहुंच गया, जबकि क्लाइंट एसेट्स में लगभग 35% की सालाना वृद्धि दर्ज हुई। बढ़ती ट्रेडिंग एक्टिविटी और मजबूत ऑपरेटिंग लीवरेज ने कंपनी की कमाई को नई ऊंचाई दी। विश्लेषकों का मानना है कि ग्रो ऐप जैसे प्लेटफॉर्म अब केवल ट्रेडिंग ऐप नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए डिजिटल फाइनेंशियल इकोसिस्टम बनते जा रहे हैं।

एंजेल वन की कमाई में जोरदार उछाल : एंजेल वन ने मार्च क्वार्टर में लगभग 1,467.2 करोड़ रुपए का रेवेन्यू दर्ज किया, जबकि कंपनी का नेट प्रॉफिट करीब 320.2 करोड़ रुपए रहा। कंपनी की कमाई में यह उछाल बढ़ती ट्रेडिंग वॉल्यूम, मजबूत रिटेल भागीदारी और डिजिटल-फर्स्ट बिजनेस मॉडल की वजह से आया। बेहतर ऑपरेटिंग मार्जिन और कम लागत वाले ढांचे ने भी कंपनी के मुनाफे को मजबूत बनाए रखा।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने दिखाई स्थिरता : एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने मार्च क्वार्टर में करीब 850 करोड़ रुपए का रेवेन्यू और लगभग 268 करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। हालांकि पूरे साल के आधार पर कंपनी के मुनाफे में कुछ दबाव देखने को मिला। शुरुआती महीनों में बाजार की सुस्ती और बढ़ती कर्मचारी लागत इसका बड़ा कारण रही। इसके बावजूद कंपनी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और ग्राहक विस्तार पर फोकस जारी रखा। छोटे ब्रोकर्स की मिली-जुली तस्वीर : जहां बड़ी कंपनियों ने शानदार ग्रोथ दिखाई, वहीं मिड और स्मॉल ब्रोकर्स के लिए तस्वीर थोड़ी मिश्रित रही।फाइव पैसा कैपिटल ने मार्च क्वार्टर में लगभग 85.5 करोड़ रुपए का रेवेन्यू और करीब 10.8 करोड़ रुपए का प्रॉफिट दर्ज किया। हालांकि कंपनी का मुनाफा पिछले साल की तुलना में कमजोर रहा क्योंकि ट्रेडिंग एक्टिविटी और मार्जिन दोनों पर दबाव बना रहा।इसके उलट आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स ने मजबूत मार्जिन ट्रेडिंग डिमांड की वजह से शानदार प्रदर्शन किया। वहीं एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज ने लो-बेस इफेक्ट के चलते मुनाफे में तेज उछाल दर्ज किया।

क्यों चमका मार्च क्वार्टर? : मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्च क्वार्टर में बढ़ी बाजार अस्थिरता ने ट्रेडिंग वॉल्यूम को काफी बढ़ाया। जब बाजार में तेज उतार-चढ़ाव होता है, तब रिटेल ट्रेडर्स ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं — और यही ब्रोकरेज कंपनियों की कमाई का सबसे बड़ा स्रोत बनता है। इसके अलावा, डिजिटल ऑनबोर्डिंग, मोबाइल ट्रेडिंग और सोशल मीडिया आधारित निवेश ट्रेंड्स ने भी नए निवेशकों को तेजी से बाजार की ओर आकर्षित किया। 26 ने यह साफ कर दिया है कि भारत की ब्रोकिंग इंडस्ट्री अब सिर्फ ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि टेक-ड्रिवन फाइनेंशियल पावरहाउस बन चुकी है। हालांकि प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और ब्रोकरेज फीस पर दबाव भी बना हुआ है। आने वाले समय में वही कंपनियां टिकेंगी जो टेक्नोलॉजी, कस्टमर एक्सपीरियंस और प्रोडक्ट डायवर्सिफिकेशन पर लगातार निवेश करेंगी। फिलहाल इतना तय है — भारत का रिटेल निवेशक अब बाजार छोडऩे वाला नहीं है, और यही ब्रोकरेज इंडस्ट्री की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।


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