इनकम टेक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (आईटीएटी) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक आईटी प्रोफेशनल को बड़ी राहत देते हुए उस पर लगाया गया 51.2 लाख रुपये का टैक्स जुर्माना रद्द कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी अपने नियोक्ता द्वारा जारी किए गए फॉर्म 16 पर भरोसा करके टैक्स रिटर्न दाखिल करता है, तो हर गलती को गलत आय रिपोर्टिंग नहीं माना जा सकता।विप्रो के कर्मचारी रेनिल ई के कुमार ने असेसमेंट ईयर 2022-23 के लिए अपना आयकर रिटर्न दाखिल करते समय लगभग 82.05 लाख रुपये की टैक्स छूट का दावा किया था। यह छूट ईएसओपी यानी कर्मचारी स्टॉक ऑप्शन से जुड़े पर्क (जैसे कंपनी कार, ईसॉप (स्टॉक विकल्प), फ्री घर, कंपनी का ड्राइवर, क्लब मेंबरशिप, या कंपनी द्वारा चुकाया गया टैक्स) पर सेक्शन 10(10सीसी ) के तहत ली गई थी। यह जानकारी उन्हें कंपनी द्वारा जारी फॉर्म 16 में दी गई थी। कंपनी ने इस राशि को टैक्स-फ्री दिखाया था और उस पर टीडीएस भी नहीं काटा था। इसी आधार पर कर्मचारी को लगा कि यह दावा पूरी तरह वैध है। रिटर्न दाखिल करते समय उनकी कुल आय 84.27 लाख रुपये दिखाई गई थी और उन्होंने लगभग 28.69 लाख रुपये का टैक्स रिफंड भी मांगा था। आयकर विभाग ने प्रारंभिक प्रोसेसिंग के बाद करीब 29.98 लाख रुपये का रिफंड जारी भी कर दिया, लेकिन बाद में स्क्रूटनी के दौरान असेसिंग ऑफिसर ने 82.05 लाख रुपये की टैक्स छूट को रिजेक्ट कर दिया। इसके बाद कर योग्य आय बढक़र 1.66 करोड़ रुपये हो गई। साथ ही विभाग ने सेक्शन 270 ए के तहत मिसरिपोर्टिंग ऑफ इनकम मानते हुए 51.20 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगा दिया। इस सेक्शन में अंडर-रिपोर्टेड आय पर टैक्स का 200 परसेंट तक जुर्माना लगाया जा सकता है।हालांकि कर्मचारी ने अतिरिक्त टैक्स और रिफंड राशि वापस जमा कर दी, लेकिन उन्होंने जुर्माने को चुनौती दी। आईटीएटी ने अपने फैसले में कहा कि कर्मचारी ने सभी जानकारी पूरी पारदर्शिता के साथ दी थी और उसने नियोक्ता द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज पर भरोसा किया था। इसलिए इसे जानबूझकर आय छिपाने या गलत जानकारी देने का मामला नहीं माना जा सकता।