गर्मी वाली मक्की बिहार के बाद यूपी में आने लगी है, बिहार में इस बार अपेक्षाकृत उत्पादन कम रहा है। यूपी में भी फसल पूर्वानुमान से कम बैठने की संभावना दिखाई दे रही है, इन परिस्थितियों में वर्तमान भाव के मक्की के व्यापार में अगले महीने के अंत तक 200 रुपए का लाभ मिल सकता है। बिहार के खगडिय़ा बेगूसराय दरभंगा पूर्णिया गुलाब बाग मानसी आदि उत्पादक क्षेत्रों में नई मक्की अभी चल रही है, लेकिन वहां आवक का दबाव गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में इस बार 10 प्रतिशत के करीब कम है। वहां फसल 20-22 दिन लेट आई थी तथा 2000/2050 रुपए प्रति क्विंटल खुलने के बाद बढिय़ा मक्की 1850/1900 रुपए से नीचे नहीं गई तथा अब गोदाम पहुंच में 1950 रुपए बढिय़ा माल के भाव बोल रहे हैं, नीचे वाले माल 1800 रुपए चल रहा है। उसके बाद यूपी की मक्की आने लगी है, इस समय कन्नौज बहराइच कासगंज छर्रा एटा आदि उत्पादक क्षेत्रों में नई मक्की 1800/1980 रुपए प्रति क्विंटल के बीच नमी व कलर के हिसाब से रैक पॉइंट पर बिक रही है। बिहार में जो उत्पादन अनुमान 90 लाख मीट्रिक टन लगाया गया था, वह इस बार मुश्किल से 80-82 लाख मीट्रिक टन रह गया है। यूपी में भी मक्की की फसल 13-14 प्रतिशत कम है। यहां की मक्की हरियाणा पंजाब पहुंच में 2100/2200 रुपए प्रति कुंतल बिक रही है, जबकि बिहार की मक्की 2200/2300 रुपए का व्यापार हो रहा है। गौरतलब है कि जो ट्रक भाड़े हरियाणा पंजाब के बिहार से 260/265 रुपए प्रति कुंतल चल रहे थे, उसके भाव 320/325 रुपए हो गए हैं। इसी तरह यूपी से भी हरियाणा पंजाब के भाड़े काफी ऊंचे बोल रहे हैं। स्टार्च एवं एथेनॉल कंपनियों की चौतरफा रैक द्वारा लिवाली बनी हुई है तथा बड़ी कंपनियां निरंतर खरीद कर रही हैं, इसे देखते हुए जुलाई के अंत तक इसमें 200 रुपए प्रति कुंतल की तेजी के आसार दिखाई दे रहे हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में इस बार बिजाई कम होने की संभावना है, क्योंकि वहां सोयाबीन के ऊंचे भाव होने से 41-42 प्रतिशत पर रकवा सोयाबीन की बिजाई में चला जाएगा, इसलिए यूपी बिहार की मक्की आगे चलकर खपत हेतु शॉर्टेज में आ सकती है, इसलिए वर्तमान भाव की मकई में खरीद करना लाभदायक रहेगा।