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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

23-05-2026

आखिर लम्बे समय तक कम्पनी से कैसे जुड़ा रहेगा टैलेंट

  •  भारत में 95 प्रतिशत एम्प्लॉइज अपनी काम करने की क्षमता और स्किल्स पर भरोसा करते हैं, लेकिन इनमें से केवल 64 प्रतिशत लोग ही अपनी नौकरी से संतुष्ट हैं। मैनपावरगु्रप इंडिया की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। देशभर के 1,000 से ज्यादा कर्मचारियों से बातचीत पर आधारित मैनपावरगु्रप इंडिया की इस रिपोर्ट से पता चलता है कि जॉब से जुड़ी दुनिया तेजी से बदल रही है और इस बदलाव के बीच कर्मचारियों का कॉन्फीडेंस, सैटिसफैक्शन और मैंटल स्थिति अलग-अलग स्तर पर नजर आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कर्मचारी अपनी स्किल्स को लेकर सबसे ज्यादा आत्मविश्वास दिखाते हैं। करीब 95 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अपने काम को अच्छी तरह कर सकते हैं। इसके साथ ही, लगभग 90 प्रतिशत कर्मचारियों को कॅरियर में आगे बढऩे के मौके मिल रहे हैं और 84 प्रतिशत को प्रमोशन की संभावना दिखाई देती है। वहीं, 90 प्रतिशत कर्मचारी एआई के इस्तेमाल को लेकर भी आत्मविश्वास महसूस करते हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आज के काम में लोग जितना आत्मविश्वास महसूस कर रहे हैं, उतना ही वे भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। यानी आगे चलकर उनकी भूमिका क्या होगी, इसे लेकर चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आत्मविश्वास का सीधा असर नौकरी से संतुष्टि और कंपनी के प्रति वफादारी पर नहीं दिख रहा है। इसी वजह से सिर्फ 64 प्रतिशत कर्मचारी ही अपनी नौकरी से खुश हैं। इसके अलावा, 53 प्रतिशत कर्मचारी रोजाना मध्यम से ज्यादा तनाव महसूस करते हैं। जब नौकरी से संतुष्टि 64 प्रतिशत है, तब आधे से ज्यादा कर्मचारी रोज स्ट्रेस में रहते हैं। उन्होंने कहा कि 75 प्रतिशत कर्मचारियों में काम का ज्यादा बोझ और लंबे काम के घंटे तनाव की वजह बन रहे हैं। कई कर्मचारी अपनी नौकरी छोडऩा नहीं चाहते और ‘जॉब हग’ कर रहे हैं, लेकिन साथ ही नए मौके भी तलाश रहे हैं। रिपोर्ट में अलग-अलग वर्गों की स्थिति भी बताई गई है। ब्लू-कॉलर कर्मचारियों में सबसे कम मानसिक और शारीरिक संतुलन देखा गया, जो 68 प्रतिशत रहा। वहीं, जेनजी महिलाओं में रोजाना ज्यादा तनाव की स्थिति सबसे ज्यादा, यानी 64 प्रतिशत पाई गई। दूसरी ओर, मिडिल मैनेजर्स (95 प्रतिशत) और व्हाइट-कॉलर व सीनियर मैनेजर्स (94 प्रतिशत) अपने काम में सबसे ज्यादा मतलब और उद्देश्य महसूस करते हैं, लेकिन यही वर्ग सबसे ज्यादा तनाव में भी रहता है। सेक्टर की बात करें तो एनर्जी और यूटिलिटी सेक्टर में कर्मचारियों की स्थिति सबसे कमजोर रही, जहां वेल-बीइंग 72 प्रतिशत दर्ज की गई। हेल्थकेयर (52 प्रतिशत) और फाइनेंस व रियल एस्टेट (50 प्रतिशत) सेक्टर में नौकरी को लेकर सुरक्षा की भावना सबसे कम पाई गई। वहीं, नौकरी खोजने का आत्मविश्वास आईटी सेक्टर (86 प्रतिशत) और इंडस्ट्रियल व मटेरियल सेक्टर (85 प्रतिशत) में सबसे ज्यादा देखा गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि तकनीक को लेकर आत्मविश्वास में गिरावट सबसे ज्यादा बेबी बूमर्स और जेन एक्स उम्र के कर्मचारियों में देखी गई है। इस रिपोर्ट से साफ संदेश मिलता है कि केवल आत्मविश्वास से कर्मचारियों को लंबे समय तक जोड़े नहीं रखा जा सकता। जो कंपनियां कॅरियर के साफ रास्ते, अच्छे मैनेजर, और कर्मचारियों की भलाई पर ध्यान देंगी, वही प्रतिभा को बनाए रख पाएंगी और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगी।

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आखिर लम्बे समय तक कम्पनी से कैसे जुड़ा रहेगा टैलेंट

 भारत में 95 प्रतिशत एम्प्लॉइज अपनी काम करने की क्षमता और स्किल्स पर भरोसा करते हैं, लेकिन इनमें से केवल 64 प्रतिशत लोग ही अपनी नौकरी से संतुष्ट हैं। मैनपावरगु्रप इंडिया की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। देशभर के 1,000 से ज्यादा कर्मचारियों से बातचीत पर आधारित मैनपावरगु्रप इंडिया की इस रिपोर्ट से पता चलता है कि जॉब से जुड़ी दुनिया तेजी से बदल रही है और इस बदलाव के बीच कर्मचारियों का कॉन्फीडेंस, सैटिसफैक्शन और मैंटल स्थिति अलग-अलग स्तर पर नजर आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कर्मचारी अपनी स्किल्स को लेकर सबसे ज्यादा आत्मविश्वास दिखाते हैं। करीब 95 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अपने काम को अच्छी तरह कर सकते हैं। इसके साथ ही, लगभग 90 प्रतिशत कर्मचारियों को कॅरियर में आगे बढऩे के मौके मिल रहे हैं और 84 प्रतिशत को प्रमोशन की संभावना दिखाई देती है। वहीं, 90 प्रतिशत कर्मचारी एआई के इस्तेमाल को लेकर भी आत्मविश्वास महसूस करते हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आज के काम में लोग जितना आत्मविश्वास महसूस कर रहे हैं, उतना ही वे भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। यानी आगे चलकर उनकी भूमिका क्या होगी, इसे लेकर चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आत्मविश्वास का सीधा असर नौकरी से संतुष्टि और कंपनी के प्रति वफादारी पर नहीं दिख रहा है। इसी वजह से सिर्फ 64 प्रतिशत कर्मचारी ही अपनी नौकरी से खुश हैं। इसके अलावा, 53 प्रतिशत कर्मचारी रोजाना मध्यम से ज्यादा तनाव महसूस करते हैं। जब नौकरी से संतुष्टि 64 प्रतिशत है, तब आधे से ज्यादा कर्मचारी रोज स्ट्रेस में रहते हैं। उन्होंने कहा कि 75 प्रतिशत कर्मचारियों में काम का ज्यादा बोझ और लंबे काम के घंटे तनाव की वजह बन रहे हैं। कई कर्मचारी अपनी नौकरी छोडऩा नहीं चाहते और ‘जॉब हग’ कर रहे हैं, लेकिन साथ ही नए मौके भी तलाश रहे हैं। रिपोर्ट में अलग-अलग वर्गों की स्थिति भी बताई गई है। ब्लू-कॉलर कर्मचारियों में सबसे कम मानसिक और शारीरिक संतुलन देखा गया, जो 68 प्रतिशत रहा। वहीं, जेनजी महिलाओं में रोजाना ज्यादा तनाव की स्थिति सबसे ज्यादा, यानी 64 प्रतिशत पाई गई। दूसरी ओर, मिडिल मैनेजर्स (95 प्रतिशत) और व्हाइट-कॉलर व सीनियर मैनेजर्स (94 प्रतिशत) अपने काम में सबसे ज्यादा मतलब और उद्देश्य महसूस करते हैं, लेकिन यही वर्ग सबसे ज्यादा तनाव में भी रहता है। सेक्टर की बात करें तो एनर्जी और यूटिलिटी सेक्टर में कर्मचारियों की स्थिति सबसे कमजोर रही, जहां वेल-बीइंग 72 प्रतिशत दर्ज की गई। हेल्थकेयर (52 प्रतिशत) और फाइनेंस व रियल एस्टेट (50 प्रतिशत) सेक्टर में नौकरी को लेकर सुरक्षा की भावना सबसे कम पाई गई। वहीं, नौकरी खोजने का आत्मविश्वास आईटी सेक्टर (86 प्रतिशत) और इंडस्ट्रियल व मटेरियल सेक्टर (85 प्रतिशत) में सबसे ज्यादा देखा गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि तकनीक को लेकर आत्मविश्वास में गिरावट सबसे ज्यादा बेबी बूमर्स और जेन एक्स उम्र के कर्मचारियों में देखी गई है। इस रिपोर्ट से साफ संदेश मिलता है कि केवल आत्मविश्वास से कर्मचारियों को लंबे समय तक जोड़े नहीं रखा जा सकता। जो कंपनियां कॅरियर के साफ रास्ते, अच्छे मैनेजर, और कर्मचारियों की भलाई पर ध्यान देंगी, वही प्रतिभा को बनाए रख पाएंगी और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगी।


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