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20-05-2026

नमो भारत नेटवर्क से जुड़ा राजस्थान

  •  राजस्थान को नई दिल्ली से तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन नेटवर्क के जरिए जोडऩे वाली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना को नई गति मिली है। राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच सहमति बनने के बाद अब राजस्थान भी ‘नमो भारत’ नेटवर्क का हिस्सा बनने जा रहा है। इसके तहत दिल्ली से अलवर के बीच ‘नमो भारत’ ट्रेनें संचालित होंगी। दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर कॉरिडोर की शुरुआत नई दिल्ली के सराय काले खां स्टेशन से होगी। यह कॉरिडोर मुनिरका, एरोसिटी, गुरुग्राम और बावल होते हुए एसएनबी के जरिए खैरथल और अलवर तक पहुंचेगा। इसके साथ ही एसएनबी से नीमराना और बहरोड़ होते हुए सोतनाला तक एक अन्य सेक्शन भी विकसित किया जाएगा। राजस्थान के मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इस परियोजना से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों, खासकर राजस्थान के भिवाड़ी और नीमराना को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की एकीकृत परिवहन योजना के तहत प्रमुख शहरों को आधुनिक हाई-स्पीड परिवहन नेटवर्क से जोडऩे की दिशा में काम किया जा रहा है। पहले चरण में दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ, दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर और दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। राजस्थान में इस परियोजना के तहत 91 किलोमीटर लंबा ट्रैक और छह प्रस्तावित स्टेशन बनाए जाएंगे। कॉरिडोर में अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली हाई-स्पीड ट्रेनें होंगी। तीनों ‘नमो भारत’ कॉरिडोर को इंटरऑपरेबल नेटवर्क के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि यात्री बिना किसी परेशानी के विभिन्न रूटों पर सफर कर सकें। दिल्ली का सराय काले खां स्टेशन मुख्य इंटरचेंज हब के रूप में विकसित होगा, जहां सभी कॉरिडोर आपस में जुड़ेंगे। आरआरटीएस ट्रेनें समर्पित एलिवेटेड कॉरिडोर पर चलेंगी, जिससे सडक़ यातायात से मुक्त और निर्बाध सफर संभव होगा। इस नेटवर्क को रेलवे स्टेशन, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल, एयरपोर्ट और दिल्ली मेट्रो से भी जोड़ा जाएगा, ताकि यात्रियों को मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी मिल सके। रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को एनसीआर के लिए विकसित अगली पीढ़ी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था माना जा रहा है। इसकी ट्रेनें पारंपरिक मेट्रो सेवाओं की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक गति से चल सकती हैं। जहां मेट्रो मुख्य रूप से शहर के भीतर यात्रा के लिए होती है, वहीं आरआरटीएस का उद्देश्य पड़ोसी शहरों को तेज, सुरक्षित और कुशल तरीके से जोडऩा है। हरियाणा और राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों से गुजरने वाला दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर कॉरिडोर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ राजस्थान में औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार को भी नई दिशा देगा।

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नमो भारत नेटवर्क से जुड़ा राजस्थान

 राजस्थान को नई दिल्ली से तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन नेटवर्क के जरिए जोडऩे वाली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना को नई गति मिली है। राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच सहमति बनने के बाद अब राजस्थान भी ‘नमो भारत’ नेटवर्क का हिस्सा बनने जा रहा है। इसके तहत दिल्ली से अलवर के बीच ‘नमो भारत’ ट्रेनें संचालित होंगी। दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर कॉरिडोर की शुरुआत नई दिल्ली के सराय काले खां स्टेशन से होगी। यह कॉरिडोर मुनिरका, एरोसिटी, गुरुग्राम और बावल होते हुए एसएनबी के जरिए खैरथल और अलवर तक पहुंचेगा। इसके साथ ही एसएनबी से नीमराना और बहरोड़ होते हुए सोतनाला तक एक अन्य सेक्शन भी विकसित किया जाएगा। राजस्थान के मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इस परियोजना से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों, खासकर राजस्थान के भिवाड़ी और नीमराना को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की एकीकृत परिवहन योजना के तहत प्रमुख शहरों को आधुनिक हाई-स्पीड परिवहन नेटवर्क से जोडऩे की दिशा में काम किया जा रहा है। पहले चरण में दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ, दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर और दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। राजस्थान में इस परियोजना के तहत 91 किलोमीटर लंबा ट्रैक और छह प्रस्तावित स्टेशन बनाए जाएंगे। कॉरिडोर में अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली हाई-स्पीड ट्रेनें होंगी। तीनों ‘नमो भारत’ कॉरिडोर को इंटरऑपरेबल नेटवर्क के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि यात्री बिना किसी परेशानी के विभिन्न रूटों पर सफर कर सकें। दिल्ली का सराय काले खां स्टेशन मुख्य इंटरचेंज हब के रूप में विकसित होगा, जहां सभी कॉरिडोर आपस में जुड़ेंगे। आरआरटीएस ट्रेनें समर्पित एलिवेटेड कॉरिडोर पर चलेंगी, जिससे सडक़ यातायात से मुक्त और निर्बाध सफर संभव होगा। इस नेटवर्क को रेलवे स्टेशन, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल, एयरपोर्ट और दिल्ली मेट्रो से भी जोड़ा जाएगा, ताकि यात्रियों को मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी मिल सके। रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को एनसीआर के लिए विकसित अगली पीढ़ी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था माना जा रहा है। इसकी ट्रेनें पारंपरिक मेट्रो सेवाओं की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक गति से चल सकती हैं। जहां मेट्रो मुख्य रूप से शहर के भीतर यात्रा के लिए होती है, वहीं आरआरटीएस का उद्देश्य पड़ोसी शहरों को तेज, सुरक्षित और कुशल तरीके से जोडऩा है। हरियाणा और राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों से गुजरने वाला दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर कॉरिडोर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ राजस्थान में औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार को भी नई दिशा देगा।


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