TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

16-06-2026

टाटा बनेगी दूसरी स्टरलाइट, तमिलनाडु पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने दी प्लांट बंद करने की धमकी

  •  याद होगा आपको कैसे स्टरलाइट (वेदांता रिसोर्सेस) के तमिलनाडु स्थित थुथुकुड़ी कॉपर प्लांट से पॉल्यूशन के मामले ने कैसा तूल पकड़ा कि भारत आज सात-आठ साल बीत जाने के बावजूद नेट एक्सपोर्ट से नेट इंपोर्टर बना हुआ है। स्टरलाइट के कॉपर प्लांट के खिलाफ तमिलनाडु के पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने जांच की थी और इस लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हुए। फिर से शुरू करने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट भी सकारात्मक संदेश देने के बावजूद कोर्ट शुरू नहीं कर पाया। कुछ इसी तरह के मामले भारत में आईफोन बनाने वाली टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की एक फैक्ट्री पर प्रदूषण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा है। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आरोप लगाया है कि फैक्ट्री से निकला गंदा पानी आसपास के खेतों और भूजल को प्रभावित कर रहा है और यदि कंपनी ने सही जबाव नहीं दिया तो प्लांट को बंद कर दिया जाएगा। यह मामला तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांट से जुड़ा है। यह फैक्ट्री एप्पल के आईफोन के बैक पैनल और अन्य कंपोनेंट बनाती है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एप्पल की भारत में सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। चीन पर निर्भरता कम करने की एप्पल की रणनीति में टाटा की भूमिका तेजी से बढ़ी है। टाटा भारत में आईफोन निर्माण बढ़ाने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। दक्षिण एशिया में एप्पल का सबसे बड़ा सप्लायर ताइवान की फॉक्सकॉन है, जबकि टाटा दूसरा बड़ा सप्लायर बन चुका है। फैक्ट्री के आसपास रहने वाले किसानों ने कई महीनों तक तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से शिकायत की थी। किसानों का आरोप था कि फैक्ट्री का गंदा पानी खेतों और खुले कुओं तक पहुंच रहा है। इससे जमीन और पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। प्रदूषण बोर्ड ने दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच फैक्ट्री की पांच बार जांच की। जांच में पाया गया कि फैक्ट्री ने अपना अपशिष्ट पानी परिसर के अंदर बने बारिश के पानी के संग्रहण तालाब में छोड़ा था। बोर्ड के अनुसार, यह तालाब ओवरफ्लो हो गया। इसके बाद दूषित पानी पास के कृषि क्षेत्रों में पहुंच गया। इससे आसपास के खुले कुओं का भूजल प्रभावित होने की आशंका जताई गई। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र लैब से जांच कराई है। कंपनी के अनुसार जांच में पाया गया कि वह सभी पर्यावरण नियमों का पालन कर रही है। भारत सरकार के अनुसार पिछले पांच वर्ष में लाखों उद्योगों की जांच में कई इकाइयां पर्यावरण मानकों पर खरी नहीं उतरीं और कई फैक्ट्रियां बंद भी की गईं। टाटा का यह मामला एप्पल की भारत सप्लाई चेन से जुड़ी पिछली समस्याओं के बाद सामने आया है। 2024 में होसुर प्लांट में आग लगने से आईफोन कंपोनेंट उत्पादन कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ था। 2023 में एप्पल के पूर्व सप्लायर पेगाट्रॉन के प्लांट में भी आग की घटना हुई थी। रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट के अनुसार 2026 तक दुनिया के कुल आईफोन उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 26 परसेंट तक पहुंच सकती है, जो चार साल पहले केवल 6 परसेंट थी। आईफोन निर्माण में भारत की बढ़ती भूमिका के बीच यह मामला दिखाता है कि तेज औद्योगिकीकरण के साथ पर्यावरण सुरक्षा और स्थानीय समुदायों का भरोसा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा।

Share
टाटा बनेगी दूसरी स्टरलाइट, तमिलनाडु पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने दी प्लांट बंद करने की धमकी

 याद होगा आपको कैसे स्टरलाइट (वेदांता रिसोर्सेस) के तमिलनाडु स्थित थुथुकुड़ी कॉपर प्लांट से पॉल्यूशन के मामले ने कैसा तूल पकड़ा कि भारत आज सात-आठ साल बीत जाने के बावजूद नेट एक्सपोर्ट से नेट इंपोर्टर बना हुआ है। स्टरलाइट के कॉपर प्लांट के खिलाफ तमिलनाडु के पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने जांच की थी और इस लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हुए। फिर से शुरू करने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट भी सकारात्मक संदेश देने के बावजूद कोर्ट शुरू नहीं कर पाया। कुछ इसी तरह के मामले भारत में आईफोन बनाने वाली टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की एक फैक्ट्री पर प्रदूषण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा है। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आरोप लगाया है कि फैक्ट्री से निकला गंदा पानी आसपास के खेतों और भूजल को प्रभावित कर रहा है और यदि कंपनी ने सही जबाव नहीं दिया तो प्लांट को बंद कर दिया जाएगा। यह मामला तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांट से जुड़ा है। यह फैक्ट्री एप्पल के आईफोन के बैक पैनल और अन्य कंपोनेंट बनाती है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एप्पल की भारत में सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। चीन पर निर्भरता कम करने की एप्पल की रणनीति में टाटा की भूमिका तेजी से बढ़ी है। टाटा भारत में आईफोन निर्माण बढ़ाने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। दक्षिण एशिया में एप्पल का सबसे बड़ा सप्लायर ताइवान की फॉक्सकॉन है, जबकि टाटा दूसरा बड़ा सप्लायर बन चुका है। फैक्ट्री के आसपास रहने वाले किसानों ने कई महीनों तक तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से शिकायत की थी। किसानों का आरोप था कि फैक्ट्री का गंदा पानी खेतों और खुले कुओं तक पहुंच रहा है। इससे जमीन और पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। प्रदूषण बोर्ड ने दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच फैक्ट्री की पांच बार जांच की। जांच में पाया गया कि फैक्ट्री ने अपना अपशिष्ट पानी परिसर के अंदर बने बारिश के पानी के संग्रहण तालाब में छोड़ा था। बोर्ड के अनुसार, यह तालाब ओवरफ्लो हो गया। इसके बाद दूषित पानी पास के कृषि क्षेत्रों में पहुंच गया। इससे आसपास के खुले कुओं का भूजल प्रभावित होने की आशंका जताई गई। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र लैब से जांच कराई है। कंपनी के अनुसार जांच में पाया गया कि वह सभी पर्यावरण नियमों का पालन कर रही है। भारत सरकार के अनुसार पिछले पांच वर्ष में लाखों उद्योगों की जांच में कई इकाइयां पर्यावरण मानकों पर खरी नहीं उतरीं और कई फैक्ट्रियां बंद भी की गईं। टाटा का यह मामला एप्पल की भारत सप्लाई चेन से जुड़ी पिछली समस्याओं के बाद सामने आया है। 2024 में होसुर प्लांट में आग लगने से आईफोन कंपोनेंट उत्पादन कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ था। 2023 में एप्पल के पूर्व सप्लायर पेगाट्रॉन के प्लांट में भी आग की घटना हुई थी। रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट के अनुसार 2026 तक दुनिया के कुल आईफोन उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 26 परसेंट तक पहुंच सकती है, जो चार साल पहले केवल 6 परसेंट थी। आईफोन निर्माण में भारत की बढ़ती भूमिका के बीच यह मामला दिखाता है कि तेज औद्योगिकीकरण के साथ पर्यावरण सुरक्षा और स्थानीय समुदायों का भरोसा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news