बीसीजी यानी बॉस्टन कन्सल्टिंग ग्रुप की लेटेस्ट वेल्थ रिपोर्ट के अनुसार स्विट्जरलैंड को पीछे छोड़ते हुए हांगकांग दुनिया का सबसे बड़ा ऑफशोर वेल्थ हब बनने में कामयाब रहा है। रिपोर्ट के अनुसार चीन से आने वाली संपत्ति और 2025 में आईपीओ में तेजी ने हांगकांग की स्थिति को मजबूत किया। हांगकांग में अब लगभग 2.95 ट्रिलियन डॉलर की ऑफशोर वेल्थ (विदेशी संपत्ति) मौजूद है, जबकि स्विट्जरलैंड में यह आंकड़ा 2.94 ट्रिलियन डॉलर रह गया है। यह पहली बार है जब किसी एशियाई फाइनेंशियल सेंटर ने दशकों से टॉप पर मौजूद स्विट्जरलैंड को पीछे छोड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया कि हांगकांग अब चीन और ग्लोबल कैपिटल मार्केट्स के बीच सबसे बड़े प्रवेश द्वार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। हालांकि इसका अर्थ यह भी है कि हांगकांग का भविष्य काफी हद तक चीन की इकोनॉमिक और रेगुलेटरी पॉलिसियों पर निर्भर रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार हांगकांग और सिंगापुर दोनों 2030 तक लगभग 9 परसेंट वार्षिक दर से बढ़ सकते हैं। इसके मुकाबले स्विट्जरलैंड की औसत ग्रोथ रेट लगभग 6 परसेंट रहने का अनुमान है। ग्लोबल लेवल पर ऑफशोर वेल्थ 2025 में 8.4 परसेंट बढक़र 15.7 ट्रिलियन डॉलर हो गई। निवेशकों की जियोग्राफिक डाइवर्सिफिकेशन यानी हैजिंग के लिए अलग-अलग देशों में इंवेस्टमेंट करने की स्ट्रेटेजी के कारण यह ग्रोथ हो रही है। स्विट्जरलैंड की सबसे बड़ी ताकत उसका डाइवर्सिफाइड कस्टमर बेस है जबकि जहां हांगकांग और सिंगापुर काफी हद तक चीन और एशिया पर निर्भर हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच स्विट्जरलैंड अब भी सेफ हेवन की भूमिका निभा रहा है। एशिया में जहां हांगकांग और सिंगापुर सबसे बड़े ऑफशोर वेल्थ मैनेजर हैं वहीं पश्चिमी देशों के लिए स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका यह काम कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार वेल्थ मैनेजमेंट इंडस्ट्री में क्लोज टू कस्टमर (जहां कस्टमर वहां हम) की स्ट्रेटीज जोर पकड़ रही है इसलिए स्विस बैंक दुनिया के बड़े वित्तीय केंद्रों में तेजी से विस्तार कर रहे हैं।