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23-05-2026

NRI घर खर्च के साथ निवेश के लिए भी खाड़ी से भेज रहे पैसे

  •  पश्चिम एशिया संकट के बावजूद खाड़ी देशों से भेजे जाने वाले धन में बढ़ोतरी के बीच प्रवासी भारतीय अब केवल पारिवारिक जरूरतों के लिए ही नहीं, बल्कि निवेश के इरादे से भी पैसे भेज रहे हैं। बुधवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। इक्विरस वेल्थ की यह सर्वेक्षण रिपोर्ट कहती है कि विदेशी धनप्रेषण का स्वरूप अब ‘जरूरत आधारित’ की जगह ‘रणनीति आधारित’ होता जा रहा है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों के लिए भारत प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में उभर रहा है। खाड़ी क्षेत्र के 8,300 से अधिक उत्तरदाताओं पर आधारित इस सर्वेक्षण में पाया गया कि अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) द्वारा भेजी जाने वाली कुल रकम में करीब आधा हिस्सा निवेश और सेवानिवृत्ति योजना से जुड़ा है। इसमें निवेश का हिस्सा 27 प्रतिशत, सेवानिवृत्ति योजना का 22 प्रतिशत और पारिवारिक सहायता का 26 प्रतिशत रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, निवेश को लेकर विदेश में रहने वाले भारतीयों के नजरिये में भी बदलाव दिख रहा है। लगभग 75 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने खुद को दीर्घकालिक या संतुलित निवेशक बताया, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भविष्य पर केंद्रित रुख को दर्शाता है। भारतीय शेयर बाजार निवेश का प्रमुख विकल्प बना हुआ है। सर्वेक्षण के मुताबिक, 73 प्रतिशत प्रतिभागियों ने भारतीय इक्विटी में अपना निवेश बढ़ाया है और आगे भी घरेलू बाजारों में निवेश का रुझान मजबूत रहने की संभावना है। वहीं, करीब 40 प्रतिशत उत्तरदाता भारत में रियल एस्टेट में अपनी हिस्सेदारी घटा रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक भौतिक परिसंपत्तियों से हटकर शेयर और म्यूचुअल फंड जैसे वित्तीय साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक जोखिम अब भी निवेशकों की प्रमुख चिंता बने हुए हैं। करीब 83 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि इनका उनके वित्तीय फैसलों पर असर पड़ता है। जोखिम के प्रमुख कारणों में क्षेत्रीय वैश्विक स्तर पर अस्थिरता (41 प्रतिशत), मुद्रास्फीति (23 प्रतिशत) और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव (13 प्रतिशत) शामिल हैं। वहीं, नौकरी और वीजा सुरक्षा अब 12 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर है।

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NRI घर खर्च के साथ निवेश के लिए भी खाड़ी से भेज रहे पैसे

 पश्चिम एशिया संकट के बावजूद खाड़ी देशों से भेजे जाने वाले धन में बढ़ोतरी के बीच प्रवासी भारतीय अब केवल पारिवारिक जरूरतों के लिए ही नहीं, बल्कि निवेश के इरादे से भी पैसे भेज रहे हैं। बुधवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। इक्विरस वेल्थ की यह सर्वेक्षण रिपोर्ट कहती है कि विदेशी धनप्रेषण का स्वरूप अब ‘जरूरत आधारित’ की जगह ‘रणनीति आधारित’ होता जा रहा है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों के लिए भारत प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में उभर रहा है। खाड़ी क्षेत्र के 8,300 से अधिक उत्तरदाताओं पर आधारित इस सर्वेक्षण में पाया गया कि अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) द्वारा भेजी जाने वाली कुल रकम में करीब आधा हिस्सा निवेश और सेवानिवृत्ति योजना से जुड़ा है। इसमें निवेश का हिस्सा 27 प्रतिशत, सेवानिवृत्ति योजना का 22 प्रतिशत और पारिवारिक सहायता का 26 प्रतिशत रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, निवेश को लेकर विदेश में रहने वाले भारतीयों के नजरिये में भी बदलाव दिख रहा है। लगभग 75 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने खुद को दीर्घकालिक या संतुलित निवेशक बताया, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भविष्य पर केंद्रित रुख को दर्शाता है। भारतीय शेयर बाजार निवेश का प्रमुख विकल्प बना हुआ है। सर्वेक्षण के मुताबिक, 73 प्रतिशत प्रतिभागियों ने भारतीय इक्विटी में अपना निवेश बढ़ाया है और आगे भी घरेलू बाजारों में निवेश का रुझान मजबूत रहने की संभावना है। वहीं, करीब 40 प्रतिशत उत्तरदाता भारत में रियल एस्टेट में अपनी हिस्सेदारी घटा रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक भौतिक परिसंपत्तियों से हटकर शेयर और म्यूचुअल फंड जैसे वित्तीय साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक जोखिम अब भी निवेशकों की प्रमुख चिंता बने हुए हैं। करीब 83 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि इनका उनके वित्तीय फैसलों पर असर पड़ता है। जोखिम के प्रमुख कारणों में क्षेत्रीय वैश्विक स्तर पर अस्थिरता (41 प्रतिशत), मुद्रास्फीति (23 प्रतिशत) और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव (13 प्रतिशत) शामिल हैं। वहीं, नौकरी और वीजा सुरक्षा अब 12 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर है।


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