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19-05-2026

वीडियोकॉन समूह की दो कंपनियों के लिए अलग-अलग चलेगी दिवाला प्रक्रिया : एनसीएलएटी

  •  राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने वीडियोकॉन समूह की दो कंपनियों.... वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लि. और वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स लि. की दिवाला समाधान प्रक्रिया अलग-अलग चलाने के फैसले को बरकरार रखा है। इसके साथ ही एनसीएलएटी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें दोनों मामलों को एक साथ जोडऩे का निर्देश दिया गया था। एनसीएलएटी ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि दोनों कंपनियों के ऋणदाताओं का मानना है कि कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) स्वतंत्र रूप से संचालित की जाए, क्योंकि दोनों कंपनियों के कारोबार की प्रकृति अलग है और उनके पुनरुद्धार के लिए अलग-अलग विशेषज्ञता की आवश्यकता है। न्यायमूर्ति योगेश खन्ना और अजय दास मेहरोत्रा की पीठ ने कहा कि वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में कार्यरत है, जबकि वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स तेल एवं गैस कारोबार से जुड़ी कंपनी है। ऐसे में किसी एक इकाई के लिए दोनों प्रकार के कारोबार को प्रभावी ढंग से खड़ा करना व्यावहारिक नहीं होगा। पीठ ने अपने 14 मई, 2026 को पारित 40 पृष्ठ के आदेश में कहा, एक ही इकाई के पास इतने विविध प्रकार के कारोबार को फिर खड़ा करने की विशेषज्ञता नहीं हो सकती। न्यायाधिकरण ने कहा कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) का उद्देश्य केवल ऋणदाताओं के बकाये का समाधान करना नहीं, बल्कि संबंधित कंपनी को चालू स्थिति में बनाए रखना भी है। इसलिए कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने अपने व्यावसायिक विवेक का उपयोग करते हुए दोनों कंपनियों के लिए अलग-अलग सीआईआरपी चलाने का निर्णय लिया था और इस निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। आदेश में कहा गया कि अलग-अलग प्रक्रिया से ऐसे खरीदारों को मौका मिलेगा जिनके पास संबंधित कारोबार का अनुभव और विशेषज्ञता हो तथा वे परिसंपत्तियों का बेहतर प्रबंधन करते हुए कारोबार को फिर खड़ा कर सकेंगे। इस मामले में भारत पेट्रोलियम की अनुषंगी कंपनी बीपीआरएल ने ‘पहले इनकार के अधिकार’ (आरओएफआर) का उपयोग करते हुए वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स का अधिग्रहण किया था। इस अधिग्रहण को जून, 2024 में एनसीएलटी की मंजूरी मिल चुकी है, जबकि वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज की सीआईआरपी अब भी लंबित है। इससे पहले एनसीएलटी ने 12 फरवरी, 2020 को वीडियोकॉन समूह के प्रवर्तक वेणुगोपाल धूत की याचिका स्वीकार करते हुए वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स, वीडियोकॉन हाइड्रोकार्बन होल्डिंग्स, वीडियोकॉन एनर्जी ब्राजील और वीडियोकॉन इंडोनेशिया नंकन इंक की परिसंपत्तियों को वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज की परिसंपत्ति मानने का निर्देश दिया था। धूत ने अपील की थी कि समूह की विदेशी तेल एवं गैस परिसंपत्तियों को वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज की परिसंपत्तियों के रूप में माना जाए। इस आदेश को बाद में भारतीय स्टेट बैंक, बीपीआरएल वेंचर्स इंडोनेशिया, पर्टामिना हुलु एनर्जी नंकन कंपनी और अन्य पक्षों ने एनसीएलएटी में चुनौती दी थी। अपीलीय न्यायाधिकरण ने 19 फरवरी, 2020 को इस आदेश पर रोक लगा दी थी। मामले की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी, जब वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स और वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज ने भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह से कर्ज लिया था। बाद में 2016-17 में समूह के तत्कालीन चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक वी. एन. धूत ने बैंकों से अनुरोध किया था कि वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज को सह-दायित्वकर्ता के बजाय केवल कॉरपोरेट गारंटर बनाया जाए, ताकि उसके बही खाते में इसे प्राथमिक देनदारी के रूप में न दिखाना पड़े।

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वीडियोकॉन समूह की दो कंपनियों के लिए अलग-अलग चलेगी दिवाला प्रक्रिया : एनसीएलएटी

 राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने वीडियोकॉन समूह की दो कंपनियों.... वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लि. और वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स लि. की दिवाला समाधान प्रक्रिया अलग-अलग चलाने के फैसले को बरकरार रखा है। इसके साथ ही एनसीएलएटी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें दोनों मामलों को एक साथ जोडऩे का निर्देश दिया गया था। एनसीएलएटी ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि दोनों कंपनियों के ऋणदाताओं का मानना है कि कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) स्वतंत्र रूप से संचालित की जाए, क्योंकि दोनों कंपनियों के कारोबार की प्रकृति अलग है और उनके पुनरुद्धार के लिए अलग-अलग विशेषज्ञता की आवश्यकता है। न्यायमूर्ति योगेश खन्ना और अजय दास मेहरोत्रा की पीठ ने कहा कि वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में कार्यरत है, जबकि वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स तेल एवं गैस कारोबार से जुड़ी कंपनी है। ऐसे में किसी एक इकाई के लिए दोनों प्रकार के कारोबार को प्रभावी ढंग से खड़ा करना व्यावहारिक नहीं होगा। पीठ ने अपने 14 मई, 2026 को पारित 40 पृष्ठ के आदेश में कहा, एक ही इकाई के पास इतने विविध प्रकार के कारोबार को फिर खड़ा करने की विशेषज्ञता नहीं हो सकती। न्यायाधिकरण ने कहा कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) का उद्देश्य केवल ऋणदाताओं के बकाये का समाधान करना नहीं, बल्कि संबंधित कंपनी को चालू स्थिति में बनाए रखना भी है। इसलिए कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने अपने व्यावसायिक विवेक का उपयोग करते हुए दोनों कंपनियों के लिए अलग-अलग सीआईआरपी चलाने का निर्णय लिया था और इस निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। आदेश में कहा गया कि अलग-अलग प्रक्रिया से ऐसे खरीदारों को मौका मिलेगा जिनके पास संबंधित कारोबार का अनुभव और विशेषज्ञता हो तथा वे परिसंपत्तियों का बेहतर प्रबंधन करते हुए कारोबार को फिर खड़ा कर सकेंगे। इस मामले में भारत पेट्रोलियम की अनुषंगी कंपनी बीपीआरएल ने ‘पहले इनकार के अधिकार’ (आरओएफआर) का उपयोग करते हुए वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स का अधिग्रहण किया था। इस अधिग्रहण को जून, 2024 में एनसीएलटी की मंजूरी मिल चुकी है, जबकि वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज की सीआईआरपी अब भी लंबित है। इससे पहले एनसीएलटी ने 12 फरवरी, 2020 को वीडियोकॉन समूह के प्रवर्तक वेणुगोपाल धूत की याचिका स्वीकार करते हुए वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स, वीडियोकॉन हाइड्रोकार्बन होल्डिंग्स, वीडियोकॉन एनर्जी ब्राजील और वीडियोकॉन इंडोनेशिया नंकन इंक की परिसंपत्तियों को वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज की परिसंपत्ति मानने का निर्देश दिया था। धूत ने अपील की थी कि समूह की विदेशी तेल एवं गैस परिसंपत्तियों को वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज की परिसंपत्तियों के रूप में माना जाए। इस आदेश को बाद में भारतीय स्टेट बैंक, बीपीआरएल वेंचर्स इंडोनेशिया, पर्टामिना हुलु एनर्जी नंकन कंपनी और अन्य पक्षों ने एनसीएलएटी में चुनौती दी थी। अपीलीय न्यायाधिकरण ने 19 फरवरी, 2020 को इस आदेश पर रोक लगा दी थी। मामले की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी, जब वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स और वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज ने भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह से कर्ज लिया था। बाद में 2016-17 में समूह के तत्कालीन चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक वी. एन. धूत ने बैंकों से अनुरोध किया था कि वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज को सह-दायित्वकर्ता के बजाय केवल कॉरपोरेट गारंटर बनाया जाए, ताकि उसके बही खाते में इसे प्राथमिक देनदारी के रूप में न दिखाना पड़े।


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