बिजनौर के महमूदपुर गांव के एक 80 वर्षीय व्यक्ति और 75 वर्षीय वृद्धा का विवाह करीब एक वर्ष पूर्व हुआ लेकिन इतने कम अंतराल में वे अलग हो गये हैं। अकेलेपन, एक दूजे को सहयोग देने के लिये निकाह किया लेकिन देखभाल, परिवार की उम्मीद और लिविंग अरेंजमेंट को लेकर दोनों में विवाद इतना बढ़ गया कि निकाह अल्पकाल ही टिक पाया। गांववालों के अनुसार दोनों ने आपसी सहमति से ही तलाक लेने का निर्णय लिया। मोहम्मद कमरुद्दीन के छह बच्चे हैं और वे दादा भी बन चुके हैं। उन्होंने करीब एक वर्ष पूर्व नफीसा बेगम से निकाह किया। सोचा यह था कि इससे अकेलापन दूर होगा और जीवन का शेष समय वे शांति से साथ-साथ गुजार देंगे। शुरूआत में सब सही चला लेकिन फिर विवाद उबरने लगे। छोटी बात कब बड़ी बनने लगी, पता नहीं लगा और मामला गांव की पंचायत के पास पहुंच गया। पंचायत ने विवाद को सुलझाने का प्रयास भी किया लेकिन विफल रहे। नफीसा बेगम के अनुसार कमरुद्दीन उन वादों को पूरा करने में विफल रहे हैं, जो उन्होंने निकाह पूर्व किये थे।यह वादा किया था कि उनकी पोतियां उनके लिये खाना पकायेंगी और देखभाल भी करेंगी लेकिन निकाह के कुछ दिन बाद में उन्हें रहने के लिये अलग घर दे दिया गया। पंचायत ने कहा कि दोनों मसले को आपस में सुलझा लें लेकिन बात बनी नहीं, और दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया है। दोनों ने कोर्ट का रास्ता चुनने से इंकार किया। तलाक के बाद नफीसा अपनी पुत्री के साथ रहने चली गई हैं।