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10-06-2026

एयर टिकट महंगा होने से ट्रैवलिंग हो सकती है प्रभावित

  •  अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (आईएटीए) की मुख्य अर्थशास्त्री और वरिष्ठ उपाध्यक्ष मैरी ओवेन्स थॉमसन ने कहा है कि हवाई यात्रा के बढ़ते किराये लोगों को विमान यात्रा करने से वंचित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एयरलाइंस किराये में इस हद तक बढ़ोतरी करने की कोशिश करेंगी कि वे लागत की भरपाई कर सकें। लेकिन इसका कुछ लोगों पर प्रतिकूल असर हो सकता है और वे हवाई यात्रा करने से परहेज करेंगे क्योंकि कीमतों में अंतर से उनके विकल्पों पर असर पड़ेगा। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एयरलाइन कंपनियां पश्चिम एशिया संकट से तेल कीमतों में आई तेजी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए हवाई किराये में बढ़ोतरी कर रही हैं। एक अनुमान के अनुसार, 2026 में विमान ईंधन की कीमतें गत वर्ष की तुलना में 70 प्रतिशत अधिक होंगी। अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ 370 से अधिक एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करता है। यह वैश्विक हवाई यातायात का लगभग 85' हिस्सा है। थॉमसन ने कहा कि एयरलाइंस निश्चित रूप से किराये में इस हद तक बढ़ोतरी करने की पूरी कोशिश करेंगी कि वे लागत की भरपाई कर सकें। अगर वे किराया नहीं बढ़ा पाती हैं, तो उन्हें नुकसान होगा, वे दिवालिया भी हो सकती हैं। यह पूछे जाने पर एयरलाइंस कितना किराया बढ़ा सकती हैं, जिससे यात्रियों की मांग में कमी न आए, इसका कोई सीधा जवाब न देते हुए थॉमसन ने कहा कि आप जिस आबादी की बात कर रहे हैं, उसके आधार पर ऐसे लोग होंगे जिनके लिए हवाई यात्रा करना संभव नहीं होगा। कीमतों में अपेक्षाकृत अंतर लोगों की पसंद को प्रभावित करेगा और उनके विकल्प इस बात पर निर्भर करेंगे कि वे कहां रहते हैं और कहां जाना चाहते हैं। थॉमसन ने कहा कि उपभोक्ता व्यवहार में निश्चित रूप से बदलाव आएगा। लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे कहां रहते हैं और उनकी आय क्या है। आईएटीए ने कहा कि यात्री टिकट रेवेन्यू इस साल 9.2 प्रतिशत बढक़र 839 अरब डॉलर होने का अनुमान है जो 2025 में 768 अरब डॉलर था।

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एयर टिकट महंगा होने से ट्रैवलिंग हो सकती है प्रभावित

 अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (आईएटीए) की मुख्य अर्थशास्त्री और वरिष्ठ उपाध्यक्ष मैरी ओवेन्स थॉमसन ने कहा है कि हवाई यात्रा के बढ़ते किराये लोगों को विमान यात्रा करने से वंचित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एयरलाइंस किराये में इस हद तक बढ़ोतरी करने की कोशिश करेंगी कि वे लागत की भरपाई कर सकें। लेकिन इसका कुछ लोगों पर प्रतिकूल असर हो सकता है और वे हवाई यात्रा करने से परहेज करेंगे क्योंकि कीमतों में अंतर से उनके विकल्पों पर असर पड़ेगा। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एयरलाइन कंपनियां पश्चिम एशिया संकट से तेल कीमतों में आई तेजी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए हवाई किराये में बढ़ोतरी कर रही हैं। एक अनुमान के अनुसार, 2026 में विमान ईंधन की कीमतें गत वर्ष की तुलना में 70 प्रतिशत अधिक होंगी। अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ 370 से अधिक एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करता है। यह वैश्विक हवाई यातायात का लगभग 85' हिस्सा है। थॉमसन ने कहा कि एयरलाइंस निश्चित रूप से किराये में इस हद तक बढ़ोतरी करने की पूरी कोशिश करेंगी कि वे लागत की भरपाई कर सकें। अगर वे किराया नहीं बढ़ा पाती हैं, तो उन्हें नुकसान होगा, वे दिवालिया भी हो सकती हैं। यह पूछे जाने पर एयरलाइंस कितना किराया बढ़ा सकती हैं, जिससे यात्रियों की मांग में कमी न आए, इसका कोई सीधा जवाब न देते हुए थॉमसन ने कहा कि आप जिस आबादी की बात कर रहे हैं, उसके आधार पर ऐसे लोग होंगे जिनके लिए हवाई यात्रा करना संभव नहीं होगा। कीमतों में अपेक्षाकृत अंतर लोगों की पसंद को प्रभावित करेगा और उनके विकल्प इस बात पर निर्भर करेंगे कि वे कहां रहते हैं और कहां जाना चाहते हैं। थॉमसन ने कहा कि उपभोक्ता व्यवहार में निश्चित रूप से बदलाव आएगा। लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे कहां रहते हैं और उनकी आय क्या है। आईएटीए ने कहा कि यात्री टिकट रेवेन्यू इस साल 9.2 प्रतिशत बढक़र 839 अरब डॉलर होने का अनुमान है जो 2025 में 768 अरब डॉलर था।


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