इलेक्ट्रिक वेहीकल (ईवी) के एंट्री बैरियर को नीचा करने के लिए कंपनियां लगातार बैटरी-एज-ए-सर्विस (बास या बैटरी रेंटल स्कीम) को प्रमोट कर रही है लेकिन यह मॉडल भारत में उम्मीद कमतर साबित हो रहा है। लॉन्च के करीब 18 महीने बाद भी केवल 2-3 परसेंट बायर ही बैटरी रेंटल के इस विकल्प को अपना रहे हैं। बास मॉडल से हालांकि इलेक्ट्रिक वेहीकल की एंट्री प्राइस काफी कम हो जाती है, लेकिन इंडस्ट्री डेटा के अनुसार यह अभी भी एक सीमित विकल्प बना हुआ है। ईवी में बैटरी की कॉस्ट लगभग 35-40 परसेंट तक होती है। बैटरी कॉस्ट को गाड़ी की कीमत से अलग कर दिया जाता है। बैटरी को फाइनेंस किया जाता है और बायर पे-एज-यू-यूज यानी जितना इस्तेमाल उतना पेमेंट के आधार पर प्रति किलोमीटर के हिसाब के सब्सक्रिप्शन चार्ज चुकाते हैं। बास मॉडल से ईवी की कीमत पेट्रोल गाडिय़ों के करीब बराबर आ जाती है इसके बावजूद इसे ज्यादा रेस्पॉन्स नहीं मिल पा रहा है। टाटा मोटर्स पीवी के एमडी एंड सीईओ शैलेश चंद्रा के अनुसार, बास की हिस्सेदारी बाजार में केवल 2-3 परसेंट के आसपास है और कुल मिलाकर यह 5 परसेंट से भी कम है। उन्होंने इसे एक तरह का विजुअलाइजेशन टूल बताया, यानी ग्राहक तुलना के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इस मॉडल पर कार परचेज बहुत कम करते हैं। भारत में बास कॉन्सेप्ट को सबसे पहले जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया ने एमजी विंडसर ईवी के साथ लॉन्च किया था। इस मॉडल की कीमत बैटरी के बिना 9.99 लाख रखी गई थी, जबकि पूरी ओनरशिप के साथ इसकी कीमत 13.5 लाख थी। एग्रेसिव प्राइसिंग के दम पर विंडसर भारत की बेस्ट सेलर ईवी में ईवी में शामिल हो गई और 2025 में कुल ईवी सेल्स में इसका शेयर लगभग 25 परसेंट रहा । मारुति सुजुकी ने फरवरी 2026 में ई-विटारा के साथ एंट्री की, जिसकी कीमत बैटरी के बिना 10.99 लाख और बैटरी के साथ 15.99 लाख रखी गई। वहीं, टाटा मोटर्स ने पंच ईवी की बास स्कीम के तहत कीमत 6.49 लाख रखी गई, जबकि बैटरी के साथ इसकी कीमत 9.69 लाख है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स बास को एक सर्विस की बजाय फाइनेंसिंग टूल के रूप में देख रहे हैं। टाटा मोटर्स के अनुसार, यह मॉडल मुख्य रूप से ग्राहकों को विकल्प देने और तुलना आसान बनाने के लिए है, न कि बिक्री का मुख्य आधार बनने के लिए। शैलेश चंद्रा ने कहा कि यह एक सर्विस नहीं बल्कि फाइनेंसिंग इंस्ट्रूमेंट है। हालांकि, जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया के चीफ कमर्शियल ऑफिसर विनय रैना के अनुसार उनकी कंपनी को इस मॉडल में बेहतर रेस्पॉन्स मिला है। वर्तमान में उनकी कुल ईवी सेल्स में 12-15 परसेंट शेयर बास ऑप्शन का है। कंपनी बास मॉडल कॉमेट ईवी, विंडसर और एमजी जेडएस ईवी में भी दे रही है। हालांकि रिपोर्ट्स के अनुसार एक साल पहले तक टाटा मोटर्स बास मॉडल के खिलाफ थी। उस समय कंपनी के ग्रुप सीएफओ पी.बी. बालाजी ने कहा था कि कंपनी ने कैल्कुलेशन और प्रोसेस का अध्ययन किया है और खासकर पैसेंजर वाहनों में वह आश्वस्त नहीं है। बास का कैल्कुलेशन 2024 में जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर ने विंडसर ईवी को बास स्कीम के तहत 9.99 लाख रुपये की प्राइस पर लॉन्च किया था। इसमें यूजर को 3.5 रुपये प्रति किलोमीटर देना होता था। लेकिन महीने में कम से कम 1,500 किलोमीटर का पेमेंट करना होता है। इस तरह बास सब्सक्रिप्शन का महीने का पेमेंट लगभग 5,250 रुपये बैठता है और चार्जिंग का खर्च अलग। कार यदि फाइनेंस करवाई है तो उसकी ईएमआई अलग से। टाटा पंच ईवी के लिए 2.6 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से यदि कोई ग्राहक रोज 60 किलोमीटर चलता है, तो उसे लगभग 4,680 रुपये प्रति माह देने होंगे। ई विटारा के मामले में यह खर्च लगभग 7,100 रुपये मासिक बैठता है। भारत ने 2030 तक 30 परसेंट ईवी का टार्गेट रखा है। 2016 में जहां ईवी सेल्स केवल 50 हजार थी, वहीं 2025 में यह 23 लाख तक पहुंच गई। नीति आयोग के अनुसार, 2020 में भारत की ईवी पैठ ग्लोबल एवरेज का 20 परसेंट ही थी जो 2024 में बढक़र 40 परसेंट से अधिक हो गई।