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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

20-06-2026

टैलेंटेड प्रोफेशनल्स के विदेश जाने की स्पीड हुई कम

  •  वर्ष 2025 में विदेश में जाकर काम करने की काम करने की स्पीड काफी कम हुई है। टैलेंटेड लोग विदेश से आ रहे जॉब अवसर को थाम लिया करते हैं लेकिन गत वर्ष तो यह स्पीड कम रही। एक रिपोर्ट के अनुसार देश से बाहर जाकर काम करने वालों की संख्या 37 लाख से घटकर 33 लाख रह गई है। यानि कि इसमें 11.6 प्रतिशत की कीमत दर्ज की गई और गत वर्ष की तुलना में लगभग 4,30,000 कम लोग दूसरी जगह गये। बोस्टन कन्सल्टिंग गु्रप (बीसीजी)की रिपोर्ट बीसीसी टॉप टैलेंट ट्रैकर क्यू 2, के अनुसार साइंस, टैक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्य क्षेत्र में ऐसे लोगों की संख्या 13 प्रतिशत, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में 12 प्रतिशत और रिसर्च एनेलिस्ट में 19 प्रतिशत की कमी आई है। ऐसे लोगों की आवाजाही कम जरूर रही है मगर जो प्रोफेशनल्स दूसरी जगह जा रहे हैं, उनके लिये प्रतिस्पद्र्धा काफी बढ़ गई है। बीसीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर के अनुसार दुनियाभर में इमीगे्रशन पॉलिसीज बदल रही है और इसके बीच ग्लोबल टैलेंट में कमी के बावजूद भारत हर बड़ी प्रतिभा श्रेणी में एक अहम रोल निभा रहा है। सुस्ती के बावजूद अमेरिका, यूएई और साऊदी अरब जैसे आकर्षक देश ग्लोबल टैलेंट को अपनी ओर खींचते रहते हैं क्योंकि उनके यहां अधिक मौके और आकर्षक वेतन पैकेज मिलते हैं। उन्होंने कहा कि भारत से स्टेम, एआई और रिसर्च टैलेंट समेत अन्य कुछ क्षेत्रों में सबसे अधिक पेशेवरों का स्रोत बना हुआ है। संगठनों को टैलेंट और उनके विकास को प्राथमिकता देना जारी रखना होगा। इसके साथ ही ग्लोबल टैलेंट को आकर्षित करने और बनाये रखने के लिये अपनी सर्विसेज का सही वैल्यूएशन करना होगा। बीसीजी के खास ट्रैकर के फे्रश एडीशन में 22.1 करोड़ स्किल्ड प्रोफेशनल्स के रियल टाइम में आवाजाही का विश्लेषण किया गया है। इसमें दो सौ से अधिक जगहों पर वर्ष 2025 के आखिर तक के आंकड़े शामिल किये गये हैं। एडीशन में रिसर्च टैलेंट नाम से एक नई श्रेणी भी जोड़ी गई है। इसमें पीएचडी डिग्री वाले लोग शामिल हैं, जो गतिशील प्रतिभाओं में सबसे अधिक पढ़े-लिखे वर्ग का प्रतिनिधित्व करे हैं। इनके अनुसार भविष्य में साइंस और इनोवेशन पर कहां सबसे ध्यान दिया जायेगा। यह बदलाव चौंकाने वाला है कि पुराने टैलेंट सेंटर्स की चमक कम हुई है। कनाडा कभी हाई स्किल वाले लोगों के लिये टॉप तीन देशों में से एक था लेकिन अब यह 7वें स्थान पर खिसक गया है। इसने प्रमुख देशों में एक साल  में हिस्सेदारी में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की है। ब्रिटेन ने काफी हाई टैलेंट, एआई और रिसर्च श्रेणी में शीर्ष तीन में अपनी जगह बनाये रखने के बावजूद सभी प्रतिभा समुहों में अपनी स्थिति गंवाई है। भारत उन कुछ प्रमुख देशों में से एक है, जिसने इन सभी चार प्रतिभा श्रेणियों में अपनी स्थिति मजबूत की है।

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टैलेंटेड प्रोफेशनल्स के विदेश जाने की स्पीड हुई कम

 वर्ष 2025 में विदेश में जाकर काम करने की काम करने की स्पीड काफी कम हुई है। टैलेंटेड लोग विदेश से आ रहे जॉब अवसर को थाम लिया करते हैं लेकिन गत वर्ष तो यह स्पीड कम रही। एक रिपोर्ट के अनुसार देश से बाहर जाकर काम करने वालों की संख्या 37 लाख से घटकर 33 लाख रह गई है। यानि कि इसमें 11.6 प्रतिशत की कीमत दर्ज की गई और गत वर्ष की तुलना में लगभग 4,30,000 कम लोग दूसरी जगह गये। बोस्टन कन्सल्टिंग गु्रप (बीसीजी)की रिपोर्ट बीसीसी टॉप टैलेंट ट्रैकर क्यू 2, के अनुसार साइंस, टैक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्य क्षेत्र में ऐसे लोगों की संख्या 13 प्रतिशत, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में 12 प्रतिशत और रिसर्च एनेलिस्ट में 19 प्रतिशत की कमी आई है। ऐसे लोगों की आवाजाही कम जरूर रही है मगर जो प्रोफेशनल्स दूसरी जगह जा रहे हैं, उनके लिये प्रतिस्पद्र्धा काफी बढ़ गई है। बीसीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर के अनुसार दुनियाभर में इमीगे्रशन पॉलिसीज बदल रही है और इसके बीच ग्लोबल टैलेंट में कमी के बावजूद भारत हर बड़ी प्रतिभा श्रेणी में एक अहम रोल निभा रहा है। सुस्ती के बावजूद अमेरिका, यूएई और साऊदी अरब जैसे आकर्षक देश ग्लोबल टैलेंट को अपनी ओर खींचते रहते हैं क्योंकि उनके यहां अधिक मौके और आकर्षक वेतन पैकेज मिलते हैं। उन्होंने कहा कि भारत से स्टेम, एआई और रिसर्च टैलेंट समेत अन्य कुछ क्षेत्रों में सबसे अधिक पेशेवरों का स्रोत बना हुआ है। संगठनों को टैलेंट और उनके विकास को प्राथमिकता देना जारी रखना होगा। इसके साथ ही ग्लोबल टैलेंट को आकर्षित करने और बनाये रखने के लिये अपनी सर्विसेज का सही वैल्यूएशन करना होगा। बीसीजी के खास ट्रैकर के फे्रश एडीशन में 22.1 करोड़ स्किल्ड प्रोफेशनल्स के रियल टाइम में आवाजाही का विश्लेषण किया गया है। इसमें दो सौ से अधिक जगहों पर वर्ष 2025 के आखिर तक के आंकड़े शामिल किये गये हैं। एडीशन में रिसर्च टैलेंट नाम से एक नई श्रेणी भी जोड़ी गई है। इसमें पीएचडी डिग्री वाले लोग शामिल हैं, जो गतिशील प्रतिभाओं में सबसे अधिक पढ़े-लिखे वर्ग का प्रतिनिधित्व करे हैं। इनके अनुसार भविष्य में साइंस और इनोवेशन पर कहां सबसे ध्यान दिया जायेगा। यह बदलाव चौंकाने वाला है कि पुराने टैलेंट सेंटर्स की चमक कम हुई है। कनाडा कभी हाई स्किल वाले लोगों के लिये टॉप तीन देशों में से एक था लेकिन अब यह 7वें स्थान पर खिसक गया है। इसने प्रमुख देशों में एक साल  में हिस्सेदारी में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की है। ब्रिटेन ने काफी हाई टैलेंट, एआई और रिसर्च श्रेणी में शीर्ष तीन में अपनी जगह बनाये रखने के बावजूद सभी प्रतिभा समुहों में अपनी स्थिति गंवाई है। भारत उन कुछ प्रमुख देशों में से एक है, जिसने इन सभी चार प्रतिभा श्रेणियों में अपनी स्थिति मजबूत की है।


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