तुवर की घरेलू फसल कम होने के बावजूद पिछले डेढ़ महीने से दाल मिलों की मांग पूरी तरह ठंडी पड़ जाने से मंदे का दलदल बन गया था। पिछले एक माह के अंतराल इसमें 6 रुपए प्रति किलो की गिरावट आ गई थी, जो नाजायज रही और नीचे वाले भाव में दाल मिलों की पकड़ मजबूत होने से बाजार सुधरने लगे हैं तथा 30 जून या उससे पहले पहले 85 रुपए लेमन तुवर बन सकती है। तुवर का उत्पादन यूपी एमपी बिहार महाराष्ट्र कर्नाटक आदि उत्पादक राज्यों में धीरे-धीरे प्रत्येक वर्ष कम होता जा रहा है। वास्तविकता यह है कि सब्जियों का चलन बढऩे एवं किसानों को रोकड़ा फसल मिलने से यूपी बिहार एवं मध्य प्रदेश के किसान धीरे-धीरे तुवर की बजाय सब्जियां बोने लगे हैं। उक्त तीनों ही राज्यों में तुवर की फसल 8-9 महीने में आती है, जबकि सब्जियों उक्त अवधि के अंतराल तीन तरह की आ जा रही हैं तथा उसे मंडियों में जब किसानों की जरूरत पड़ती है, बेचकर घरेलू कार्य कर लेते हैं। यही कारण है कि 57 लाख मीट्रिक टन से घटकर इस बार 42 लाख मीट्रिक टन तुवर का उत्पादन रह जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। यही स्थिति थोड़ी कमोबेश रंगून में भी आ रही है। वहां भी गत वर्ष की अपेक्षा सात प्रतिशत कम होने की आयातक एवं निर्यातक दोनों ही बात बोल रहे हैं। लेमन तुवर की बिक्री पिछले दो महीने से काफी ठंडी पड़ गई है, क्योंकि दाल की बिक्री आधी रह गई थी। इसके दो कारण है कि चने की दाल एवं मटर की दाल काफी सस्ती बिकने से पूर्वी भारत में मिक्सिंग वाली सस्ती दाल बिक रही थी। अभी नीचे वाले भाव में दाल मिलों की पकड़ मजबूत हो गई है, क्योंकि एक महीने के अंतराल 83 से घट कर 77 रुपए प्रति किलो नीचे में पिछले सप्ताह तुवर बिकने के बाद आज 7950 रुपए प्रति किलो हो गई है। महाराष्ट्र के अकोला जलगांव लाइन में भी दाल मिलों को एवं कर्नाटक की तुवर में मीलिंग पड़ता महंगा चलने में लेमन तुवर की मांग बढ़ गई है। चेन्नई वाले भी बढ़ाकर हाजिर कंटेनर के भाव बोल रहे हैं। वहां 75.5 रुपए प्रति किलो का व्यापार हो चुका है तथा 76 से कम में बेचू नहीं आ रहे हैं तथा इन भाव में भी ज्यादा माल नहीं मिल रहा है। बर्मा में 20 डॉलर प्रति टन बढ?र लेमन तुवर 815 डॉलर प्रति टन बोलने लगे हैं इधर घरेलू मध्य प्रदेश यूपी महाराष्ट्र की तुवर जाकर मीलिंग हो चुकी है, किसानों के पास कोई माल नहीं है। इन परिस्थितियों में जो तुवर यहां 79.50 रुपए प्रति किलो बिक रही है, इसमें 50 पैसे के करेक्शन के बाद 50 रुपए प्रति किलो चालू माह में ही बन सकती है।