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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

08-04-2026

गर्मियों में गुणकारी है खसखस का सेवन

  •  गर्मियों में जब तेज धूप और लू शरीर को थका देती है, तब एक पुराना और असरदार घरेलू उपाय खसखस का शरबत याद आता है। छोटे-छोटे सफेद दानों से बना यह पेय न सिर्फ ठंडक पहुंचाता है, बल्कि ताकत और ताजगी भी देता है। दादी-नानी की रसोई में हमेशा मौजूद खसखस वाकई गर्मी के लिए अमृत समान है। खसखस, जिसे वैज्ञानिक भाषा में पैपावर सोम्नीफेरम कहते हैं, हजारों सालों से हमारे खान-पान और आयुर्वेद में इस्तेमाल होता आ रहा है। आयुर्वेद में इसे पित्त दोष शांत करने वाली जड़ी-बूटी माना गया है। इसकी ठंडी प्रकृति शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करती है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, गर्मी में बढ़े पित्त के कारण होने वाली पेट की जलन, पैरों में जलन और त्वचा की परेशानियों में खसखस का दूध या शरबत तुरंत आराम देता है। यह मन को शांत रखने में भी मदद करता है। खसखस पोषक तत्वों से भरपूर है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और आयरन जैसे पोषक व महत्वपूर्ण तत्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे गर्मियों में अच्छी नींद आती है। यह मौसमी बीमारियों से बचाव करता है, हृदय के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद और फ्री रैडिकल्स के नुकसान से भी बचाता है। गर्मियों में खसखस सबसे ज्यादा उपयोगी इसलिए है क्योंकि इसकी ठंडी तासीर शरीर का तापमान नियंत्रित रखती है और डिहाइड्रेशन से बचाती है। खसखस का पानी पेट के एसिड को संतुलित करता है, जिससे एसिडिटी और जलन जैसी समस्याएं कम होती हैं। फाइबर से भरपूर होने के कारण यह पाचन सुधारता है और कब्ज की शिकायत दूर करता है। यही नहीं, खसखस का तेल जोड़ों के दर्द और सूजन कम करने में भी कारगर है। इसे दूध के साथ पीसकर लगाने से गर्मी की वजह से होने वाले मुंहासे और जलन में राहत मिलती है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा की सूजन को शांत करते हैं। आधुनिक शोध भी खसखस के इन पारंपरिक फायदों की पुष्टि करते हैं। यह शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालने में मदद करता है, रक्त को शुद्ध रखता है और मानसिक तनाव घटाता है। गर्मियों में रोजाना खसखस का सेवन शरीर को ठंडा, स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखता है। हालांकि, खसखस का सेवन सीमित मात्रा में करें। किसी तरह की एलर्जी की शिकायत हो तो पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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गर्मियों में गुणकारी है खसखस का सेवन

 गर्मियों में जब तेज धूप और लू शरीर को थका देती है, तब एक पुराना और असरदार घरेलू उपाय खसखस का शरबत याद आता है। छोटे-छोटे सफेद दानों से बना यह पेय न सिर्फ ठंडक पहुंचाता है, बल्कि ताकत और ताजगी भी देता है। दादी-नानी की रसोई में हमेशा मौजूद खसखस वाकई गर्मी के लिए अमृत समान है। खसखस, जिसे वैज्ञानिक भाषा में पैपावर सोम्नीफेरम कहते हैं, हजारों सालों से हमारे खान-पान और आयुर्वेद में इस्तेमाल होता आ रहा है। आयुर्वेद में इसे पित्त दोष शांत करने वाली जड़ी-बूटी माना गया है। इसकी ठंडी प्रकृति शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करती है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, गर्मी में बढ़े पित्त के कारण होने वाली पेट की जलन, पैरों में जलन और त्वचा की परेशानियों में खसखस का दूध या शरबत तुरंत आराम देता है। यह मन को शांत रखने में भी मदद करता है। खसखस पोषक तत्वों से भरपूर है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और आयरन जैसे पोषक व महत्वपूर्ण तत्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे गर्मियों में अच्छी नींद आती है। यह मौसमी बीमारियों से बचाव करता है, हृदय के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद और फ्री रैडिकल्स के नुकसान से भी बचाता है। गर्मियों में खसखस सबसे ज्यादा उपयोगी इसलिए है क्योंकि इसकी ठंडी तासीर शरीर का तापमान नियंत्रित रखती है और डिहाइड्रेशन से बचाती है। खसखस का पानी पेट के एसिड को संतुलित करता है, जिससे एसिडिटी और जलन जैसी समस्याएं कम होती हैं। फाइबर से भरपूर होने के कारण यह पाचन सुधारता है और कब्ज की शिकायत दूर करता है। यही नहीं, खसखस का तेल जोड़ों के दर्द और सूजन कम करने में भी कारगर है। इसे दूध के साथ पीसकर लगाने से गर्मी की वजह से होने वाले मुंहासे और जलन में राहत मिलती है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा की सूजन को शांत करते हैं। आधुनिक शोध भी खसखस के इन पारंपरिक फायदों की पुष्टि करते हैं। यह शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालने में मदद करता है, रक्त को शुद्ध रखता है और मानसिक तनाव घटाता है। गर्मियों में रोजाना खसखस का सेवन शरीर को ठंडा, स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखता है। हालांकि, खसखस का सेवन सीमित मात्रा में करें। किसी तरह की एलर्जी की शिकायत हो तो पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।


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