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21-05-2026

एम्प्लॉइज के कॉन्फीडेंस, स्किल्स पर हमला कर रहा AI+

  •  आजकल दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा जिसकी है वह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानि एआई। हम सब यह मान बैठे हैं कि एआई का उपयोग प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने का काम कर रहा है लेकिन जैन जी पेशेवर यह मान रहे हैं कि यह टैक्नोलॉजी उनका आत्मविश्वास छीन रही है। बेशक किसी काम को एआई की मदद से करें तो समय की बचत होती है। यह सुनने में ऐसा लगता है कि इससे बेहतर तो कुछ नहीं हो सकता लेकिन जैन जी का मानना है कि मशीन से काम करवाने में उनका आत्मविश्वास हिल रहा है क्योंकि उनका थिंकिंग प्रोसेस बाधित हो रहा है और स्किल पावर को जंग लगा देगा। बल्कि कुछ का मत तो यह है कि बिना एआई के वे काम को अंजाम तक पहुंचा भी पायेंगे कि नहीं। गो टू ने वर्कप्लेस इंटेलीजेंस के सहयोग से एक नई रिसर्च की है। इसमें करीब 2500 ग्लोबल एम्प्लॉइज को शामिल किया गया है, जिनमें आईटी लीडर्स शामिल हैं जो एआई का उपयोग कर रहे हैं। रिसर्च में करीब 50 प्रतिशत एम्प्लॉइज ने कहा कि वे एआई पर काफी ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। 30 प्रतिशत ने कहा कि वे इसके बिना काम करने का विचार नहीं कर पाते। 46 प्रतिशत जैन जी वर्कर्स का मत है कि एआई ने उनकी स्किल्स पर मार दी है और वे कम होशियार बन गये हैं। 

    करीब एक वर्ष पूर्व 54 प्रतिशत एम्प्लॉइज हाई स्टैक रिस्क वाले जॉब को एआई की मदद कर रहे थे लेकिन अब यह संख्या 70 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इनमें लीगल और कॉम्प्लायंस वर्क भी शामिल है। यह वह जॉब हैं जिनमें ह्यूमन जजमेंट ज्यादा महत्व रखता है। 43 प्रतिशत एम्प्लॉइज ने कहा कि उन्होंने एआई जैनरेटेड कंटेंट सबमिट किया है, जबकि वे जानते थे कि इसकी क्वालिटी कम है और इसमें गलतियां हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 77 प्रतिशत का मत था कि एआई जैनरेटेड काम को चैक करना ज्यादा वक्त लेता है, जबकि ह्यूमन के द्वारा किया गया काम जल्दी चैक किया जा सकता है। रिसर्च के नतीजे एम्प्लॉइज और लीडर्स के बीच डिसकनैक्ट को बताते हैं। 84 प्रतिशत ने कहा कि उनकी कम्पनी को एआई के उपयोग को प्रोत्साहित करने का ज्यादा प्रयास करना चाहिये हालांकि 48 प्रतिशत आईटी लीडर्स ही इस बात को सही मानते हैं। जहां तक एआई पॉलिसी पिक्चर की बात है तो 44 प्रतिशत आईटी लीडर्स के अनुसार उनकी कम्पनी में एआई पॉलिसी है जबकि 77 प्रतिशत ने इसमें सुधार की जरूरत बताई। 80 प्रतिशत एम्प्लॉइज और 60 प्रतिशत आईटी लीडर्स ने कहा कि उनके वर्कर्स एआई टूल्स को काम लेने के लिये पूरी तरह से ट्रेंड नहीं हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार यह बात टैक्नोलॉजी का यूज करने की नहीं है, न ही यह जैनरेशनल इशू है और न ही जब एआई परिपक्व हो जायेगा तो पूरी तरह करैक्ट हो जायेगा, ऐसी बात है। एम्प्लॉइज एआई का दुरुपयोग भी नहीं कर रहे हैं लेकिन पावरफुल टूल को बस पकड़ा दिया गया है, ट्रेनिंग पूरी नहीं दी गई है। 

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एम्प्लॉइज के कॉन्फीडेंस, स्किल्स पर हमला कर रहा AI+

 आजकल दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा जिसकी है वह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानि एआई। हम सब यह मान बैठे हैं कि एआई का उपयोग प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने का काम कर रहा है लेकिन जैन जी पेशेवर यह मान रहे हैं कि यह टैक्नोलॉजी उनका आत्मविश्वास छीन रही है। बेशक किसी काम को एआई की मदद से करें तो समय की बचत होती है। यह सुनने में ऐसा लगता है कि इससे बेहतर तो कुछ नहीं हो सकता लेकिन जैन जी का मानना है कि मशीन से काम करवाने में उनका आत्मविश्वास हिल रहा है क्योंकि उनका थिंकिंग प्रोसेस बाधित हो रहा है और स्किल पावर को जंग लगा देगा। बल्कि कुछ का मत तो यह है कि बिना एआई के वे काम को अंजाम तक पहुंचा भी पायेंगे कि नहीं। गो टू ने वर्कप्लेस इंटेलीजेंस के सहयोग से एक नई रिसर्च की है। इसमें करीब 2500 ग्लोबल एम्प्लॉइज को शामिल किया गया है, जिनमें आईटी लीडर्स शामिल हैं जो एआई का उपयोग कर रहे हैं। रिसर्च में करीब 50 प्रतिशत एम्प्लॉइज ने कहा कि वे एआई पर काफी ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। 30 प्रतिशत ने कहा कि वे इसके बिना काम करने का विचार नहीं कर पाते। 46 प्रतिशत जैन जी वर्कर्स का मत है कि एआई ने उनकी स्किल्स पर मार दी है और वे कम होशियार बन गये हैं। 

करीब एक वर्ष पूर्व 54 प्रतिशत एम्प्लॉइज हाई स्टैक रिस्क वाले जॉब को एआई की मदद कर रहे थे लेकिन अब यह संख्या 70 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इनमें लीगल और कॉम्प्लायंस वर्क भी शामिल है। यह वह जॉब हैं जिनमें ह्यूमन जजमेंट ज्यादा महत्व रखता है। 43 प्रतिशत एम्प्लॉइज ने कहा कि उन्होंने एआई जैनरेटेड कंटेंट सबमिट किया है, जबकि वे जानते थे कि इसकी क्वालिटी कम है और इसमें गलतियां हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 77 प्रतिशत का मत था कि एआई जैनरेटेड काम को चैक करना ज्यादा वक्त लेता है, जबकि ह्यूमन के द्वारा किया गया काम जल्दी चैक किया जा सकता है। रिसर्च के नतीजे एम्प्लॉइज और लीडर्स के बीच डिसकनैक्ट को बताते हैं। 84 प्रतिशत ने कहा कि उनकी कम्पनी को एआई के उपयोग को प्रोत्साहित करने का ज्यादा प्रयास करना चाहिये हालांकि 48 प्रतिशत आईटी लीडर्स ही इस बात को सही मानते हैं। जहां तक एआई पॉलिसी पिक्चर की बात है तो 44 प्रतिशत आईटी लीडर्स के अनुसार उनकी कम्पनी में एआई पॉलिसी है जबकि 77 प्रतिशत ने इसमें सुधार की जरूरत बताई। 80 प्रतिशत एम्प्लॉइज और 60 प्रतिशत आईटी लीडर्स ने कहा कि उनके वर्कर्स एआई टूल्स को काम लेने के लिये पूरी तरह से ट्रेंड नहीं हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार यह बात टैक्नोलॉजी का यूज करने की नहीं है, न ही यह जैनरेशनल इशू है और न ही जब एआई परिपक्व हो जायेगा तो पूरी तरह करैक्ट हो जायेगा, ऐसी बात है। एम्प्लॉइज एआई का दुरुपयोग भी नहीं कर रहे हैं लेकिन पावरफुल टूल को बस पकड़ा दिया गया है, ट्रेनिंग पूरी नहीं दी गई है। 


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