खनन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांता लिमिटेड ने अपने गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) के जरिये जुटाई गई 5,000 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग उच्च लागत वाले कर्ज को चुकाने के लिए करने की योजना बनाई है। इससे उसके ब्याज भुगतान में करीब 350 करोड़ रुपये की बचत होगी। कंपनी ने शुक्रवार को एक बयान में यह कहा। कंपनी इस राशि का एक हिस्सा अपने विकास पूंजीगत व्यय के लिए भी इस्तेमाल करेगी। खनन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांता लिमिटेड ने पिछले सप्ताह कहा था कि निदेशकों की समिति ने डिबेंचर जारी कर 5,000 करोड़ रुपये तक जुटाने को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने बयान में कहा कि खनन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ने अपने असुरक्षित गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर के जरिये जुटाए गए 5,000 करोड़ रुपये से 3,400 करोड़ रुपये की उच्च लागत वाली निजी ऋण सुविधा का भुगतान करने की योजना बनाई है, जिससे उसके वार्षिक ब्याज बोझ में कम से कम 350 करोड़ रुपये की कमी आएगी। शेष धनराशि का इस्तेमाल संभवत: चालू पूंजीगत व्यय आवश्यकताओं, सामान्य कामकाज तथा मौजूदा ऋणों के पुनर्भुगतान या पूर्वभुगतान के लिए किया जाएगा। इसे 6,555 करोड़ रुपये की बोलियों मिली। यह इसके मूल निर्गम आकार 4,100 करोड़ रुपये से 60 प्रतिशत अधिक अभिदान है। अधिक बोली आने पर कंपनी ‘ग्रीन शू’ विकल्प यानी अधिक बोली आने पर उसे रखने के विकल्प का उपयोग किया और 900 करोड़ रुपये की राशि जुटाई। इस प्रकार, कुल 5,000 करोड़ रुपये जुटाए गए। इस निर्गम को म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों, बुनियादी ढांचा वित्त कंपनियों, कंपनियों और एनबीएफसी सहित सभी श्रेणियों के निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली।