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17-06-2026

लगातार तीसरे दिन हरे निशान में बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स में 0.71 प्रतिशत की बढ़त; निफ्टी 24,000 स्तर के करीब

  •  हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे सत्र में तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्कों बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 में 0.50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 544.15 अंक या 0.71 प्रतिशत बढक़र 76,808.48 पर और निफ्टी 135.25 अंक या 0.57 प्रतिशत बढक़र 23,989.15 पर पहुंच गया। सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,264.33 से 262.44 अंक बढक़र 76,526.77 पर खुला और दिन के कारोबार में 76,846.74 का उच्चतम स्तर छुआ। वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,853.90 से 70 अंक की मामूली बढ़त के साथ 23,923.90 पर खुलकर दिन के कारोबार में 24,002.60 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। व्यापक कारोबार में निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टरवार देखें तो निफ्टी ऑटो, निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी मेटल को छोडक़र, अन्य सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। निफ्टी आईटी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी मीडिया, निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी रियल्टी में 1-2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी में सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाली कंपनियों में एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टाटा कंज्यूमर, एनटीपीसी, बजाज फिनसर्व, एचयूएल और ओएनजीसी शामिल रहीं, जबकि हिंडाल्को, जेएसडब्ल्यू स्टील, एचडीएफसी लाइफ, आइशर मोटर्स और मारुति सुजुकी टॉप लूजर्स की लिस्ट में शामिल रहीं। एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हुए औपचारिक शांति समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की योजना से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। इन घटनाओं से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा और भू-राजनीतिक तनाव को लेकर बनी चिंताएं काफी हद तक कम हुई हैं, जिससे दुनिया भर के बाजारों में सकारात्मक माहौल बना है। एक्सपर्ट ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने से सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग घटी है, जिसका फायदा भारतीय रुपए को मिला। रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 95 रुपए के स्तर से नीचे पहुंच गया और करीब 94.6 के आसपास कारोबार करता दिखा। इससे भारत के बाहरी आर्थिक संतुलन को लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। एक्सपर्ट ने आगे बताया कि निफ्टी 50 ने मंगलवार को सकारात्मक बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। दिनभर सूचकांक 23,900 से 23,950 के दायरे में बना रहा, लेकिन दूसरे हिस्से में खरीदारी बढऩे से यह 24,000 के स्तर के करीब पहुंच गया। तकनीकी दृष्टि से 24,000 का स्तर फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस बना हुआ है। निफ्टी ने इस स्तर को छूने की कोशिश की, लेकिन निर्णायक ब्रेकआउट नहीं दे पाया। यदि सूचकांक 24,000 के ऊपर मजबूती से टिकता है तो इसमें 24,200 से 24,400 के स्तर तक तेजी देखने को मिल सकती है। नीचे की ओर 23,900 का स्तर तत्काल सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है। वहीं 23,800 के ऊपर बने रहना तेजी के मौजूदा ढांचे को बनाए रखने के लिए जरूरी होगा। एक्सपर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान समझौते के क्रियान्वयन और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक पर रहेगी। हाल के महीनों में ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण महंगाई के आंकड़े ऊंचे बने हुए हैं, इसलिए ब्याज दरों और महंगाई को लेकर फेड का रुख वैश्विक बाजारों के लिए अहम रहेगा। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव में कमी से बाजार की धारणा बेहतर हुई है, लेकिन स्थायी तेजी तभी संभव होगी जब शांति समझौता सफलतापूर्वक लागू हो और ऊर्जा बाजार सामान्य स्थिति में लौटें। तब तक बाजार किसी भी बड़ी खबर पर तेजी से प्रतिक्रिया दे सकता है और उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

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लगातार तीसरे दिन हरे निशान में बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स में 0.71 प्रतिशत की बढ़त; निफ्टी 24,000 स्तर के करीब

 हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे सत्र में तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्कों बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 में 0.50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 544.15 अंक या 0.71 प्रतिशत बढक़र 76,808.48 पर और निफ्टी 135.25 अंक या 0.57 प्रतिशत बढक़र 23,989.15 पर पहुंच गया। सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,264.33 से 262.44 अंक बढक़र 76,526.77 पर खुला और दिन के कारोबार में 76,846.74 का उच्चतम स्तर छुआ। वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,853.90 से 70 अंक की मामूली बढ़त के साथ 23,923.90 पर खुलकर दिन के कारोबार में 24,002.60 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। व्यापक कारोबार में निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टरवार देखें तो निफ्टी ऑटो, निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी मेटल को छोडक़र, अन्य सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। निफ्टी आईटी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी मीडिया, निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी रियल्टी में 1-2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी में सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाली कंपनियों में एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टाटा कंज्यूमर, एनटीपीसी, बजाज फिनसर्व, एचयूएल और ओएनजीसी शामिल रहीं, जबकि हिंडाल्को, जेएसडब्ल्यू स्टील, एचडीएफसी लाइफ, आइशर मोटर्स और मारुति सुजुकी टॉप लूजर्स की लिस्ट में शामिल रहीं। एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हुए औपचारिक शांति समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की योजना से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। इन घटनाओं से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा और भू-राजनीतिक तनाव को लेकर बनी चिंताएं काफी हद तक कम हुई हैं, जिससे दुनिया भर के बाजारों में सकारात्मक माहौल बना है। एक्सपर्ट ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने से सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग घटी है, जिसका फायदा भारतीय रुपए को मिला। रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 95 रुपए के स्तर से नीचे पहुंच गया और करीब 94.6 के आसपास कारोबार करता दिखा। इससे भारत के बाहरी आर्थिक संतुलन को लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। एक्सपर्ट ने आगे बताया कि निफ्टी 50 ने मंगलवार को सकारात्मक बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। दिनभर सूचकांक 23,900 से 23,950 के दायरे में बना रहा, लेकिन दूसरे हिस्से में खरीदारी बढऩे से यह 24,000 के स्तर के करीब पहुंच गया। तकनीकी दृष्टि से 24,000 का स्तर फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस बना हुआ है। निफ्टी ने इस स्तर को छूने की कोशिश की, लेकिन निर्णायक ब्रेकआउट नहीं दे पाया। यदि सूचकांक 24,000 के ऊपर मजबूती से टिकता है तो इसमें 24,200 से 24,400 के स्तर तक तेजी देखने को मिल सकती है। नीचे की ओर 23,900 का स्तर तत्काल सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है। वहीं 23,800 के ऊपर बने रहना तेजी के मौजूदा ढांचे को बनाए रखने के लिए जरूरी होगा। एक्सपर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान समझौते के क्रियान्वयन और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक पर रहेगी। हाल के महीनों में ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण महंगाई के आंकड़े ऊंचे बने हुए हैं, इसलिए ब्याज दरों और महंगाई को लेकर फेड का रुख वैश्विक बाजारों के लिए अहम रहेगा। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव में कमी से बाजार की धारणा बेहतर हुई है, लेकिन स्थायी तेजी तभी संभव होगी जब शांति समझौता सफलतापूर्वक लागू हो और ऊर्जा बाजार सामान्य स्थिति में लौटें। तब तक बाजार किसी भी बड़ी खबर पर तेजी से प्रतिक्रिया दे सकता है और उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।


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