पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बाजार में आई हालिया गिरावट के बावजूद भारतीय शेयर बाजार के स्मॉलकैप और मिडकैप शेयर अब भी ऊंचे वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहे हैं। हालांकि सितंबर 2024 के शिखर स्तर के मुकाबले बाजार में कुछ सुधार जरूर आया है, लेकिन मार्च 2026 के बाद हुई तेज रिकवरी ने कई शेयरों को फिर से महंगे स्तर पर पहुंचा दिया है। विश्लेषण के मुताबिक सितंबर 2024 में बीएसई की 16.8% सूचीबद्ध कंपनियां 80 गुना या उससे अधिक पी/ई अनुपात पर कारोबार कर रही थीं। मार्च 2026 तक यह आंकड़ा घटकर 9.2% रह गया था, लेकिन जून की शुरुआत तक फिर बढक़र 12.7% हो गया। इसी तरह 40 गुना से अधिक पी/ई पर कारोबार करने वाली कंपनियों का हिस्सा मार्च में 21.7' तक गिरा था, जो जून में बढक़र 27.3% हो गया। स्मॉलकैप शेयरों में वैल्यूएशन का दबाव कुछ कम जरूर हुआ है। सितंबर 2024 में 36.2% स्मॉलकैप कंपनियां 40 गुना से अधिक पी/ई पर कारोबार कर रही थीं, जो मार्च 2026 में घटकर 21.6' रह गईं। हालांकि जून तक यह आंकड़ा फिर बढक़र 27.6% हो गया। इसके बावजूद स्मॉलकैप सेगमेंट में पहले की तुलना में वैल्यूएशन अपेक्षाकृत बेहतर माने जा रहे हैं। वहीं मिडकैप शेयरों में महंगे वैल्यूएशन की स्थिति अभी भी बनी हुई है। सितंबर 2024 में लगभग 62% मिडकैप कंपनियां 40 गुना या उससे अधिक पी/ई पर कारोबार कर रही थीं। मार्च 2026 में यह आंकड़ा घटकर 43.2% हुआ, लेकिन जून तक फिर बढक़र करीब 49% पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि मिडकैप सेगमेंट में वैल्यूएशन सुधार स्मॉलकैप की तुलना में कम रहा है। इंडेक्स प्रदर्शन भी इसी तस्वीर को दर्शाता है। BSE SmallCap Inde& अभी भी सितंबर 2024 के उच्च स्तर से करीब 8.2% नीचे है, जबकि BSE MidCap Index लगभग 7.7' नीचे कारोबार कर रहा है। हालांकि मार्च 2026 के निचले स्तर से स्मॉलकैप इंडेक्स में 23त्न और मिडकैप इंडेक्स में 14% से अधिक की तेजी आ चुकी है, जो निवेशकों की मजबूत खरीदारी को दर्शाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैल्यूएशन के नजरिए से लार्जकैप शेयर फिलहाल अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक दिखाई देते हैं। इनमें जोखिम और रिटर्न का संतुलन बेहतर है और बाजार में अनिश्चितता के बीच ये निवेशकों को अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प प्रदान कर सकते हैं।
