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04-10-2025

केरल में गवाहों के बयान अब AI से होंगे रिकॉर्ड

  •  केरल भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने सभी न्यायालयों में बयान रिकॉर्ड करने के लिए एआई ट्रांसक्रिप्शन टूल्स का उपयोग अनिवार्य कर दिया है। केरल हाईकोर्ट की अधिसूचना के अनुसार, राज्य की निचली अदालतों में अदालत.एआई स्पीच-टू-टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन टूल का उपयोग गवाहों के बयान रिकॉर्ड करने के लिए अनिवार्य होगा। अदालत.एआई एआई और एलएलएम स्टार्टअप है जिसे मैसाचुसेट्स इंस्टीयूट ऑफ टेक्नोलॉजी और ऑक्सफोर्ड से शुरुआती फंड मिला था और यह हार्वर्ड में हुई रिसर्च पर आधारित है। एआई टूल का इस्तेमाल करने का उद्देश्य मामलों में देरी, पेंडिंग मामले और न्यायिक प्रक्रिया में सामाजिक अन्याय को कम करना है। कोर्ट के सहयोग से यह स्टार्टअप विशेष रूप से जजों और स्टेनोग्राफरों की मदद के लिए वॉइस ट्रांसक्रिप्शन सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से सभी न्यायालयों में इस एआई टूल का उपयोग शुरू किया जाएगा ताकि बयान रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया में देरी कम हो और ट्रायल कोर्ट में गवाहों के बयान रिकॉर्ड करने की प्रणाली आधुनिक बन सके। पायलट आधार पर फरवरी 2025 से कुछ विशेष न्यायालयों में पहले ही इसका प्रयोग शुरू हो चुका है।  नई अधिसूचना के अनुसार 1 नवंबर 2025 से गवाहों के बयान प्रमुख रूप से अदालत.एआई के वॉइस टू टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन टूल का उपयोग करके रिकॉर्ड किए जाएंगे। यदि किसी तकनीकी समस्या के कारण यह टूल इस्तेमाल न हो सके, तो अदालत अन्य प्लेटफॉर्म/टूल का उपयोग करने के लिए अनुमति दे सकती है। एक बार बयान रिकॉर्ड, पुष्ट और साइन होने के बाद उसे डीसीएमएस में अपलोड किया जाएगा। इससे पक्षकार और वकील अपने डैशबोर्ड के माध्यम से बयान आसानी से एक्सेस कर सकेंगे।

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केरल में गवाहों के बयान अब AI से होंगे रिकॉर्ड

 केरल भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने सभी न्यायालयों में बयान रिकॉर्ड करने के लिए एआई ट्रांसक्रिप्शन टूल्स का उपयोग अनिवार्य कर दिया है। केरल हाईकोर्ट की अधिसूचना के अनुसार, राज्य की निचली अदालतों में अदालत.एआई स्पीच-टू-टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन टूल का उपयोग गवाहों के बयान रिकॉर्ड करने के लिए अनिवार्य होगा। अदालत.एआई एआई और एलएलएम स्टार्टअप है जिसे मैसाचुसेट्स इंस्टीयूट ऑफ टेक्नोलॉजी और ऑक्सफोर्ड से शुरुआती फंड मिला था और यह हार्वर्ड में हुई रिसर्च पर आधारित है। एआई टूल का इस्तेमाल करने का उद्देश्य मामलों में देरी, पेंडिंग मामले और न्यायिक प्रक्रिया में सामाजिक अन्याय को कम करना है। कोर्ट के सहयोग से यह स्टार्टअप विशेष रूप से जजों और स्टेनोग्राफरों की मदद के लिए वॉइस ट्रांसक्रिप्शन सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से सभी न्यायालयों में इस एआई टूल का उपयोग शुरू किया जाएगा ताकि बयान रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया में देरी कम हो और ट्रायल कोर्ट में गवाहों के बयान रिकॉर्ड करने की प्रणाली आधुनिक बन सके। पायलट आधार पर फरवरी 2025 से कुछ विशेष न्यायालयों में पहले ही इसका प्रयोग शुरू हो चुका है।  नई अधिसूचना के अनुसार 1 नवंबर 2025 से गवाहों के बयान प्रमुख रूप से अदालत.एआई के वॉइस टू टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन टूल का उपयोग करके रिकॉर्ड किए जाएंगे। यदि किसी तकनीकी समस्या के कारण यह टूल इस्तेमाल न हो सके, तो अदालत अन्य प्लेटफॉर्म/टूल का उपयोग करने के लिए अनुमति दे सकती है। एक बार बयान रिकॉर्ड, पुष्ट और साइन होने के बाद उसे डीसीएमएस में अपलोड किया जाएगा। इससे पक्षकार और वकील अपने डैशबोर्ड के माध्यम से बयान आसानी से एक्सेस कर सकेंगे।


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