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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi
बाजारों के महंगे वेल्यूएशन, जीडीपी ग्रोथ में कमी की संभावना के साथ कंपनियों की प्रोफिटेबिलिटी पर दबाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, एआई के कारण आईटी कंपनियों......
संसार में मृत्यु से बढक़र कोई भय नहीं तथा भूख से बढक़र कोई वेदना नहीं है। विचारकों का कहना है कि यदि जीव के पास पेट न होता, यदि उसे भूख-प्यास न लगती तो किसी को...
विकास के नये दौर को हम जिस तरह Labour v/s Leisure (परिश्रम के स्थान पर आराम) इकोनॉमी और उससे पैदा होने वाली बेरोजगारी बढ़ाने वाली समाज व्यवस्था के नाम से...
जब कोई देश Global Capitalist System की व्यवस्था को अपना लेता है तो वहां पूंजी प्रधान ऐसे अनेक घटनाक्रम घटित होते चले जाते हैं जो दिखने में व्यक्ति की सफलता......
जब कोई देश Creative के स्थान पर Distributive Capitalism या जो रुपैया जमा है उसे ही नहीं वरन अप्रत्याशित उधार लेकर विकास करने की प्रक्रिया को अपनाते हुए गति......