पीएसयू (पब्लिक सैक्टर अंडरटेकिंग) राजनीतिक टग-ऑफ-वॉर (रस्सा-कसी)में फंसे हुए हंै। सरकार पर अटैक करने के लिए बार-बार हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (एचएएल) से लेकर एलआईसी तक के कंधे से बार-बार फायर किया जा रहा है।...आरोप वही सब बेच दिया...। लेकिन भारत सरकार का डेटा कहता है कि वर्ष 2015 में देश में 320 सीपीएसई (सेंट्रल पब्लिक सैक्टर एंटरप्राइजेज) थीं जो वर्ष 2025 में 475 हो गईं। ओईसीडी के अनुसार वर्ष 2023 में दुनियाभर में लिस्टेड 2037 कंपनियों में से 25 परसेंट पीएसयू थीं और कुल ग्लोबल मार्केट कैप में इनका शेयर 11.6 परसेंट था। भारत में पीएसयू में केंद्रीय और राज्य दोनों तरह की कंपनियां शामिल होती हैं। सीपीएसई के साथ भी भारत सरकार पीएसयू बैंकों वाली ही प्लेबुक चला रही है। जिस तरह पीएसयू बैंकों की सफाई, मर्जर और फिर प्रोफिटेबिलिटी के रोडमैप को अपनाया गया वही रास्ता सीपीएसई के लिए भी है। स्ट्रेटेजिक सैक्टर डिफेंस, एनर्जी और स्पेस में सरकार एक से चार पीएसयू के जरिए अपनी उपस्थिति बनाए रखेगी। यदि साथ में लगी टेबल को देखें तो प्रोफिटेबल सीपीएसई की संख्या वित्त वर्ष 2015 में 157 से बढक़र वित्त वर्ष 2025 में 227 हो गई, जबकि घाटे में चलने वाले सीपीएसई की संख्या इसी अवधि में 77 से घटकर 63 रह गई। इस तौरान प्रोफिटेबल सीपीएसई का नेट प्रोफिट वित्त वर्ष 2015 में केवल 1.30 लाख करोड़ रुपये था जो वित्त वर्ष 2025 तक 2.4 गुना होकर 3.09 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह सीपीएसई की कुल इक्विटी कैपिटल 31 मार्च 2015 के 2.13 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 31 मार्च 2025 तक 6.87 लाख करोड़ रुपये रही। सीपीएसई के कुल नेट असैट्स वित्त वर्ष 2015 में केवल 9.85 लाख करोड़ रुपये के थे जो 31 मार्च 2025 तक 22.33 लाख करोड़ रुपये हो गए। केंद्रीय कोष में सीपीएसई का योगदान वित्त वर्ष 2025 में 4.94 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2015 के 2.00 लाख करोड़ रुपये ही था। इसी तरह लिस्टेड 66 सीपीएसई का कुल मार्केट कैप 31 मार्च 2025 तक 38.57 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 31 मार्च 2015 की तुलना में तीन गुना है। नॉन-फाइनेंस सीपीएसई द्वारा सकल पूंजी निर्माण (ग्रोस कैपिटल फॉर्मेशन) में 11.9 परसेंट की ग्रोथ हुई। बैंकों का नेट प्रोफिट वित्त वर्ष 2014 के 80,913 करोड़ रुपये से बढक़र वित्त वर्ष 2025 में 4 लाख करोड़ रुपये हो गया। पीएसयू बैंकों का लाभ वित्त वर्ष 2014 के 37,019 करोड़ रुपये से बढक़र वित्त वर्ष 2025 में 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया। सीपीएसई में से लगभग 10 सीपीएसई वर्ष 2025-26 की लेटेस्ट रैंकिंग के अनुसार फॉच्र्यून इंडिया 500 सूची में शामिल हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट रिकॉर्ड 23,622 करोड़ रुपये रहा। पिछले 10 वर्ष में रेल ने ब्रॉड गेज नेटवर्क के लगभग 45 हजार किलोमीटर रूट को इलेक्ट्रिक किया है।
