स्थानीय बाजार में बड़ी इलायची की खरीदारों की कमी बनी हुई है, थोक विक्रेताओं और स्टॉकिस्टों द्वारा ऊंचे भावों पर खरीद से परहेज करने के कारण मंडियों में सुस्ती छाई हुई है, जिससे कीमतों पर इस समय दबाव बना हुआ है। आगामी दिनों में इसमें तेजी के आसार नहीं दिखाई दे रहे है, बल्कि बाजार आगे 10/20 रुपए घट सकता है। स्थानीय थोक किराना बाजार में बड़ी इलायची की कीमतों में असम से सस्ते माल की आवक और ग्वालियर के व्यापारियों द्वारा मुनाफावसूली बिकवाली बढ़ाने के कारण कीमतों पर दबाव आया है, इस दबाव के चलते कैचीकट के भाव में एक पखवाड़े के अंतराल 70/80 रुपए गिरकर 1550/1560 रुपए प्रति किलो के निम्न स्तर पर आ गए। बड़ी इलायची की कीमतों में गिरावट के पीछे उत्पादन में बढ़ोतरी, मांग में कमी और वैश्विक परिस्थितियां मुख्य कारण हैं। पिछले सीजन की तुलना में इस साल भारत के प्रमुख उत्पादक राज्यों (सिक्किम, पश्चिम बंगाल और अरुणाचल प्रदेश) में बड़ी इलायची का उत्पादन बेहतर रहा है। भारत में बड़ी इलायची का एक बड़ा हिस्सा नेपाल से आयात होता है। इस साल नेपाल में भी बड़ी इलायची का उत्पादन अच्छा हुआ है। वहां खपत कम होने के कारण अधिकांश माल भारतीय बाजारों में आ रहा है। इस साल नेपाल में भी उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जिससे भारतीय मंडियों में स्टॉक काफी बढ़ गया है। पिछले समय में कीमतें बहुत अधिक बढ़ जाने के कारण घरेलू बाजार में स्थानीय व्यापारियों और मसाला कंपनियों ने ऊंची कीमतों पर खरीदारी कम कर दी है। पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध के कारण खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात पर असर पड़ा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में गिरावट आई है, इससे भारत से होने वाला निर्यात अस्थाई रूप से धीमा पड़ गया है। नेपाल में पिछले दिनों आई राजनीतिक अनिश्चितता के कारण बाजार में सट्टेबाजी बढ़ी थी और कीमतें अचानक उछली थीं, अब वह स्थिति सामान्य होते ही मुनाफावसूली शुरू हो गई और सटोरियों ने माल बेचना शुरू कर दिया। पुराना माल बाजार में आने से कीमतों में और तेजी की उम्मीद में किसानों और व्यापारियों ने जो पुराना स्टॉक रोक कर रखा था, वे अब नई फसल आने के डर से उसे बाजार में निकाल रहे हैं। एक अन्य व्यापारी ने बताया की, इस समय बड़ी इलायची की चाल ने व्यापारियों और किसानों दोनों को सोच में डाल दिया है। पिछले कुछ समय में बड़ी इलायची की कीमतों में ऊपरी स्तर पर गिरावट आई है और वर्तमान में बाजारों में सुस्ती देखा जा रहा है। बाज़ार में बड़ी कंपनियों की तरफ से कोई बड़ी लिवाली आ रही है। और न ही निर्यात पर कोई विशेष हलचल है। थोक बाज़ारों में स्टॉकिस्टों ने नई खरीदारी से दूरी बना रखी है। मांग कमजोर होने के कारण फुटकर व्यापारी भी सिर्फ ज़रूरत के मुताबिक ही माल उठा रहे हैं। फिलहाल, कीमतें कुछ समय तक इसी दायरे में छोटे-मोटे करेक्शन के साथ घूमती रहेंगी।