इस बार प्रतिकूल मौसम होने से चिरौंजी का उत्पादन सभी उत्पादक क्षेत्रों में 28-30 प्रतिशत कम हुआ है। दूसरी ओर पुराने माल औने-पौने भाव में निपट चुके हैं, इन परिस्थितियों को देखते हुए वर्तमान भाव की चिरौंजी में इस बार भरपूर लाभ मिलने की संभावना है। चिरौंजी का उत्पादन मध्य प्रदेश के अमरवाड़ा लाइन में प्रतिकूल मौसम होने के चलते इस बार 32-33 प्रतिशत तक कम हुआ है। इसके अलावा उड़ीसा बिहार यूपी में भी चिरौंजी की फसल तैयार होने के समय में भारी बरसात एवं आंधी-तूफान के चलते काफी खराब एवं झड़ गई थी तथा उसमें भी कच्चे माल ही झड़ जाने से गुठली का दबाव व स्टॉक इस बार किसी भी मंडी में नहीं बन पा रहा है। चिरौंजी अमरवाड़ा लाइन में नीचे में 1250 रुपए बिककर अब 1300 रुपए तथा रायपुर लाइन में 1300/1325 रुपए प्रति किलो बिक रही है। अब इस भाव में घटने की कहीं गुंजाइश नहीं दिखाई दे रही है, क्योंकि जो चिरौंजी का उत्पादन 12 लाख बोरी के करीब होता था, वह इस बार 7.5-8 लाख बोरी ही रह जाने का अनुमान आ रहा है। हम मानते हैं कि पुराना माल इस बार कुछ ज्यादा बचा था, लेकिन घरेलू खपत 11 लाख बोरी के करीब होती है। पुराना माल 45-46 हजार बोरी के करीब बचा है, इसलिए सकल उपलब्धि आठ लाख बोरी से अधिक नहीं बैठेगी। अत: घरेलू खपत के लिए काफी माल कम पड़ेगा, इन परिस्थितियों में स्टॉकिस्ट चारों तरफ गुठली तथा चिरौंजी दाना की खरीद कर रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में गुठली में दाने की प्रतिशतता भी दो प्रतिशत कम बैठ रही है तथा इसकी खपत आगे जबरदस्त रहने वाली है, इन परिस्थितियों को देखते हुए चिरौंजी में 500 रुपए प्रति किलो की तेजी कम से कम चालू वर्ष में आने की संभावना बन गई है।