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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

21-05-2026

आंवला में और तेजी की संभावना प्रबल

  •  गत वर्ष प्रतिकूल मौसम होने से सभी उत्पादक क्षेत्रों में आंवले की फसल पर जबरदस्त मार पड़ी है, जिस कारण वर्तमान भाव के आंवला में 20/30 रुपए प्रति किलो बढ़ गया है। तथा अगले माह ही सुर्ख लाल माल में 30/40 रुपए की और तेजी लग रही है। इस बार आंवले की फसल यूपी के प्रतापगढ़ लाइन में काफी 32 प्रतिशत कम आया है, क्योंकि वहां पर प्रतिकूल मौसम से फूल कम लगे थे तथा लगा हुआ आंवले का फल भी उस समय आंधी एवं उससे पहले प्रतिकूल मौसम से बहुत खराब हो गया था।  यही कारण है कि मंडियों में इस बार क्वालिटी एवं क्वांटिटी दोनों ही कम आई है। इधर मध्य प्रदेश के श्योपुर कला लाइन में भी आंवला पेड़ों पर लगा है। इसके अलावा बिहार के सासाराम बक्सर आरा  लाइन में भी पेड़ों पर इस बार आंवले के दाने छोटे एवं कम आया था। झारखंड में भी आंवला मंडियों में स्टॉक नहीं है। इधर लखनऊ सिद्धार्थ नगर में 50 प्रतिशत ही आंवला गत वर्ष की अपेक्षा आया था। राजस्थान की मंडियों में भी आवक पूरी तरह समाप्त हो गई है, हल्के माल मध्य प्रदेश की मंडियों में, जो 65/70 रुपए प्रति किलो खुले थे, उसके भाव एक सप्ताह में बढक़र 100/105 बोलने लगे हैं तथा लाल सुर्ख माल 120125 रुपए बिक गया है। इधर राजस्थान के जयपुर प्रतापगढ़ निंबाहेड़ा लाइन में आंवला 115/120 रुपए बोल रहे हैं। यूपी में 125130 रुपए से कम में कोई बेचू नहीं आ रहे हैं। इस तरह चारों तरफ आंवला मंडियों में सुर्ख लाल माल का स्टॉक इस बार 40-42 प्रतिशत कुल मिलाकर कम दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर हर्बल उद्योग की जबरदस्त मांग बन रही है, बड़ी-बड़ी कंपनियां पहले खरीद नहीं पाई थी, उनकी प्रतिस्पर्धात्मक लिवाली चल रही है। यहां भी 110/120 से बढक़र 135/140 रुपए प्रति किलो बढिय़ा वाला बिक गया। आंवला पीछे से कम आ रहा है तथा स्टॉक में भी ज्यादा नहीं है। अत: इसमें 30/40 रुपए प्रति किलो अगले महीने में ही तेजी लग रही है। आंवले का उत्पादन 27/28 लाख बोरी के करीब सामान्य तौर पर होता है, जो इस बार 16-17 लाख बोरी रह जाने का ताजा अनुमान आ रहा है, क्योंकि फसल कम एवं दाने गत वर्ष की अपेक्षा छोटे लगे थे। दूसरी बात सुर्ख माल की कमी मंडियों में कमी बनी हुई है। हम मानते हैं कि पुराना स्टॉक 2 वर्षों का कुछ ना कुछ बचा हुआ है, लेकिन उसमें भी काले पीले माल निबट चुके हैं, बढिय़ा सुर्ख लाल माल की उपलब्धि कम है। इस बार काफी फल झड़ गए थे। आयुर्वेदिक कंपनियां प्रतिस्पर्धात्मक उत्पादक मंडियों में खरीद करने लगी है। उत्पादक मंडियों में ऊंचे भाव से पुराने माल की कदर बढ़ गई है तथा दिल्ली गाजियाबाद आगरा जयपुर मंडी में भी आंवले की मांग बढ़ गई है, इन परिस्थितियों में इस बार आंवला 180/185 रुपए बिक सकता है।

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आंवला में और तेजी की संभावना प्रबल

 गत वर्ष प्रतिकूल मौसम होने से सभी उत्पादक क्षेत्रों में आंवले की फसल पर जबरदस्त मार पड़ी है, जिस कारण वर्तमान भाव के आंवला में 20/30 रुपए प्रति किलो बढ़ गया है। तथा अगले माह ही सुर्ख लाल माल में 30/40 रुपए की और तेजी लग रही है। इस बार आंवले की फसल यूपी के प्रतापगढ़ लाइन में काफी 32 प्रतिशत कम आया है, क्योंकि वहां पर प्रतिकूल मौसम से फूल कम लगे थे तथा लगा हुआ आंवले का फल भी उस समय आंधी एवं उससे पहले प्रतिकूल मौसम से बहुत खराब हो गया था।  यही कारण है कि मंडियों में इस बार क्वालिटी एवं क्वांटिटी दोनों ही कम आई है। इधर मध्य प्रदेश के श्योपुर कला लाइन में भी आंवला पेड़ों पर लगा है। इसके अलावा बिहार के सासाराम बक्सर आरा  लाइन में भी पेड़ों पर इस बार आंवले के दाने छोटे एवं कम आया था। झारखंड में भी आंवला मंडियों में स्टॉक नहीं है। इधर लखनऊ सिद्धार्थ नगर में 50 प्रतिशत ही आंवला गत वर्ष की अपेक्षा आया था। राजस्थान की मंडियों में भी आवक पूरी तरह समाप्त हो गई है, हल्के माल मध्य प्रदेश की मंडियों में, जो 65/70 रुपए प्रति किलो खुले थे, उसके भाव एक सप्ताह में बढक़र 100/105 बोलने लगे हैं तथा लाल सुर्ख माल 120125 रुपए बिक गया है। इधर राजस्थान के जयपुर प्रतापगढ़ निंबाहेड़ा लाइन में आंवला 115/120 रुपए बोल रहे हैं। यूपी में 125130 रुपए से कम में कोई बेचू नहीं आ रहे हैं। इस तरह चारों तरफ आंवला मंडियों में सुर्ख लाल माल का स्टॉक इस बार 40-42 प्रतिशत कुल मिलाकर कम दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर हर्बल उद्योग की जबरदस्त मांग बन रही है, बड़ी-बड़ी कंपनियां पहले खरीद नहीं पाई थी, उनकी प्रतिस्पर्धात्मक लिवाली चल रही है। यहां भी 110/120 से बढक़र 135/140 रुपए प्रति किलो बढिय़ा वाला बिक गया। आंवला पीछे से कम आ रहा है तथा स्टॉक में भी ज्यादा नहीं है। अत: इसमें 30/40 रुपए प्रति किलो अगले महीने में ही तेजी लग रही है। आंवले का उत्पादन 27/28 लाख बोरी के करीब सामान्य तौर पर होता है, जो इस बार 16-17 लाख बोरी रह जाने का ताजा अनुमान आ रहा है, क्योंकि फसल कम एवं दाने गत वर्ष की अपेक्षा छोटे लगे थे। दूसरी बात सुर्ख माल की कमी मंडियों में कमी बनी हुई है। हम मानते हैं कि पुराना स्टॉक 2 वर्षों का कुछ ना कुछ बचा हुआ है, लेकिन उसमें भी काले पीले माल निबट चुके हैं, बढिय़ा सुर्ख लाल माल की उपलब्धि कम है। इस बार काफी फल झड़ गए थे। आयुर्वेदिक कंपनियां प्रतिस्पर्धात्मक उत्पादक मंडियों में खरीद करने लगी है। उत्पादक मंडियों में ऊंचे भाव से पुराने माल की कदर बढ़ गई है तथा दिल्ली गाजियाबाद आगरा जयपुर मंडी में भी आंवले की मांग बढ़ गई है, इन परिस्थितियों में इस बार आंवला 180/185 रुपए बिक सकता है।


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