गुजरात और राजस्थान में अनुकूल मौसम के कारण इस साल जीरे का उत्पादन बहुत अच्छा हुआ है, जिससे मंडियों में लगातार आवक बढ़ रही है। चालू सीजन के दौरान जीरे की बंपर पैदावार व कमज़ोर निर्यात मांग से भावो में लगातार गिरावट आ रही है। बाज़ार में जरूरत से ज्यादा स्टॉक होने से कीमतों पर भारी दबाव बना हुआ है। आगामी दिनों में 500 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है। गड़ोदिया मार्केट के दिनेश कुमार सौरव कुमार से बातचीत हुई उन्होंने बताया कि, जीरे की कीमतों को ग्राहकी का समर्थन न मिलने से एवरेज क्वालिटी के भाव 100/200 रुपए घटकर 22300/22800 रुपए प्रति क्विंटल रह गए है। ऊंझा मंडी में जीरे की आवक बढक़र करीब 14000/15000 बोरियों की होने की जानकारी मिल रही है, जिससे इसकी कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है। इस साल गुजरात और राजस्थान के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में बंपर उत्पादन और नई फसल की भारी आवक होने से आपूर्ति बढ़ गई है। चीन और बांग्लादेश जैसे प्रमुख खरीदार देशों द्वारा कम खरीद के कारण भारतीय जीरे की निर्यात मांग धीमी पड़ गई है, जिससे स्टॉक बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और शिपिंग लागत में वृद्धि से निर्यात में अनिश्चितता पैदा हो गई है। किसानों द्वारा बिकवाली का दबाव आने से खरीफ सीजन की तैयारी के लिए किसान अपनी फसल को तुरंत बेच रहे हैं, जिससे हाजिर बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। मसाला कंपनियों ने पिछले साल की ऊंची कीमतों के बाद अब सतर्कता बढ़ा दी है, जिससे घरेलू मांग भी धीमी हो रही है। आगे उन्होंने बताया कि अगले 2/4 हफ्तों तक कीमतें इसी तरह सीमित दायरे में या थोड़ी और कमजोर रह सकती हैं। यदि जून तक चीन की मांग वापस लौटती है और पश्चिम एशिया में स्थिति सुधरती है, तो कीमतों में दोबारा सुधार देखा जा सकता है। भारत से जीरे का सबसे बड़ा खरीदार चीन था। इस साल चीन में अपनी खुद की जीरे की फसल का उत्पादन बहुत अच्छा हुआ है, जिससे उसने भारत से आयात काफी कम कर दिया है। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) संकट के कारण समुद्री माल ढुलाई भाड़ा बहुत बढ़ गया है। गुजरात और राजस्थान में मौसम अनुकूल रहने से किसानों ने फसल की कटाई तेजी से पूरी की है। ऊंझा और अन्य प्रमुख मंडियों में रोजाना हजारों बोरियों की भारी आवक हो रही है। पर्याप्त पुराना स्टॉक के दबाव में घरेलू बाजार और मसाला कंपनियों के पास पहले से ही पर्याप्त मात्रा में पुराना स्टॉक मौजूद है। भारत दुनिया के जीरा निर्यात का लगभग 70/80 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, विशेष रूप से खाड़ी देशों और यूरोप से मांग उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही है। पिछले साल जीरे की कीमतों में आए ऐतिहासिक उछाल के बाद, कई स्टॉकिस्टों ने भारी मात्रा में जीरा जमा किया था। अब जब कीमतें गिरनी शुरू हुई हैं, तो वे और अधिक घाटे से बचने के लिए अपना स्टॉक बाजार में निकाल रहे हैं। मसाला कंपनियों और घरेलू खरीदारों ने ऊंचे भावों पर खरीदारी करने से परहेज किया है। उपभोक्ता अब कीमतों के और नीचे गिरने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे बाजार में मांग की इस कमी ने कीमतों को नीचे लाने में मदद की है। विशेषज्ञों की राय है कि कीमतों में गिरावट के इस दौर में आक्रामक बिकवाली के बजाय से धीरे-धीरे माल निकालना समझदारी भरा फैसला हो सकता है।