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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

19-05-2026

बारीक व मोटे चावल में मंदा- उड़द, तुवर, मसूर, देशी चना, काबुली चना, राजमां चित्रा में तेजी

  •  गत सप्ताह घरेलू एवं निर्यात मांग कमजोर होने से बारीक व मोटे चावल में मंदे का दौर बना रहा, जबकि आयात महंगा होने से उड़द तुवर मसूर देसी चना काबुली चना राजमा चित्रा एवं मटर में तेजी लिए व्यापार बंद हुए। आलोच्य सप्ताह निर्यातकों को कंटेनर मिलने में कठिनाई होने से बंदरगाहों पर पड़े मालों का शिपमेंट कम हुआ। दूसरी ओर घरेलू एवं नए शिपमेंट हेतु निर्यातकों की मांग पूरी तरह ठंडी पड़ जाने से सभी तरह के बासमती चावल में 300/400 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट पर 1509 सेला चावल 7700/7800 रुपए एवं 1718 सेला चावल 8100/8200 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। चावल 1121 सेला व स्टीम तथा 1401 स्टीम में भी इसी अनुपात में गिरावट दर्ज की गई। इधर शरबती चावल सेला जो 6500/6600 रुपए बिका था, उसके भाव 6200/6300 रुपए रह गए। स्टीम में भी इसी अनुपात में गिरावट दर्ज की गयी। मोटे चावलों में भी 50/100 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट पर परमल चावल कच्चा 3900/4000 रुपए एवं वन्ड 4000/4100 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। इधर 25 प्रतिशत ब्रोकन वाले माल 3600 रुपए तक बिकने की खबर थी। इधर मक्की में भी बिहार की मंडियों में नए माल का दबाव बढऩे से वहां 100 रुपए घटकर 1850/1950 रुपए प्रति क्विंटल भाव रह गए। हरियाणा पंजाब पहुंच में भी जो मक्की 2400 रुपए बिकी थी, उसके भाव 2250 रुपए रह गए। एमपी के माल में भी इसी अनुपात में गिरावट दर्ज की गई। यहां भी बिहार की मक्की 2350 से घटकर 2225 रुपए ऊपर में रह गई। गेहूं में खामोशी रही, लेकिन उक्त अवधि के अंतराल सरकारी खरीद 271.50 लाख मीट्रिक टन से छलांग लगाकर 306 मीट्रिक टन को पार कर गई। दलहनों में आयात महंगा हो जाने से उड़द एस क्यू नीचे में 8750 रुपए सप्ताह के मध्य में बिकने के बाद 8875 रुपए प्रति क्विंटल हो गई। एफ ए क्यू के भाव भी 100 रुपए की बढ़त पर 8300 रुपए बोले गए। मसूर भी 100 रुपए बढक़र ढाई किलो कंडीशन वाली 6850 रुपए बिक गई। कनाडा की मसूर भी सुर्ख रही। डॉलर की तुलना में रुपया कमजोर पडऩे से तुवर 7850 से बढक़र 8050 रुपए प्रति क्विंटल लेमन क्वालिटी की सप्ताहांत में हो गई। दाल में भी 3 रुपए की बढ़त पर 110/112 रुपए प्रति किलो की लेमन क्वालिटी हो गई। महाराष्ट्र के माल में भी इसी अनुपात में बढ़त दर्ज की गई। देसी चना भी उत्पादक मंडियों से पड़ते ना लगने एवं दाल मिलों की लिवाली से 5600 से बढक़र 5850 प्रति कुंटल का राजस्थानी माल का व्यापार हो गया। ऑस्ट्रेलिया के भाव भी इसी अनुपात में बढ़ाकर बोले गए। इधर काबुली चना महाराष्ट्र का जो 6000/6500 रुपए बिका था, उसके भाव 6400/6800 रुपये बोलने लगे। लोबिया में भी 100 रुपए की बढ़त दर्ज की गई। इधर मटर सफेद 4200 से बढक़र 4300 रुपए हो गई। मुंदड़ा पोर्ट पर डेढ़ सौ रुपए की बढ़त पर 4025 रुपए का व्यापार सुना गया। मूंग भी नयी फसल की दहशत से 300/400 रुपए टेंडर वाली नीचे आ गई, जबकि मोठ उत्पादक मंडियों के तेज समाचार आने एवं पाइपलाइन में माल की कमी से 400 रुपए बढक़र 5500/5550 रुपए प्रति क्विंटल हो गई। अन्य में मिला-जुला रुख रहा।

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बारीक व मोटे चावल में मंदा- उड़द, तुवर, मसूर, देशी चना, काबुली चना, राजमां चित्रा में तेजी

 गत सप्ताह घरेलू एवं निर्यात मांग कमजोर होने से बारीक व मोटे चावल में मंदे का दौर बना रहा, जबकि आयात महंगा होने से उड़द तुवर मसूर देसी चना काबुली चना राजमा चित्रा एवं मटर में तेजी लिए व्यापार बंद हुए। आलोच्य सप्ताह निर्यातकों को कंटेनर मिलने में कठिनाई होने से बंदरगाहों पर पड़े मालों का शिपमेंट कम हुआ। दूसरी ओर घरेलू एवं नए शिपमेंट हेतु निर्यातकों की मांग पूरी तरह ठंडी पड़ जाने से सभी तरह के बासमती चावल में 300/400 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट पर 1509 सेला चावल 7700/7800 रुपए एवं 1718 सेला चावल 8100/8200 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। चावल 1121 सेला व स्टीम तथा 1401 स्टीम में भी इसी अनुपात में गिरावट दर्ज की गई। इधर शरबती चावल सेला जो 6500/6600 रुपए बिका था, उसके भाव 6200/6300 रुपए रह गए। स्टीम में भी इसी अनुपात में गिरावट दर्ज की गयी। मोटे चावलों में भी 50/100 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट पर परमल चावल कच्चा 3900/4000 रुपए एवं वन्ड 4000/4100 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। इधर 25 प्रतिशत ब्रोकन वाले माल 3600 रुपए तक बिकने की खबर थी। इधर मक्की में भी बिहार की मंडियों में नए माल का दबाव बढऩे से वहां 100 रुपए घटकर 1850/1950 रुपए प्रति क्विंटल भाव रह गए। हरियाणा पंजाब पहुंच में भी जो मक्की 2400 रुपए बिकी थी, उसके भाव 2250 रुपए रह गए। एमपी के माल में भी इसी अनुपात में गिरावट दर्ज की गई। यहां भी बिहार की मक्की 2350 से घटकर 2225 रुपए ऊपर में रह गई। गेहूं में खामोशी रही, लेकिन उक्त अवधि के अंतराल सरकारी खरीद 271.50 लाख मीट्रिक टन से छलांग लगाकर 306 मीट्रिक टन को पार कर गई। दलहनों में आयात महंगा हो जाने से उड़द एस क्यू नीचे में 8750 रुपए सप्ताह के मध्य में बिकने के बाद 8875 रुपए प्रति क्विंटल हो गई। एफ ए क्यू के भाव भी 100 रुपए की बढ़त पर 8300 रुपए बोले गए। मसूर भी 100 रुपए बढक़र ढाई किलो कंडीशन वाली 6850 रुपए बिक गई। कनाडा की मसूर भी सुर्ख रही। डॉलर की तुलना में रुपया कमजोर पडऩे से तुवर 7850 से बढक़र 8050 रुपए प्रति क्विंटल लेमन क्वालिटी की सप्ताहांत में हो गई। दाल में भी 3 रुपए की बढ़त पर 110/112 रुपए प्रति किलो की लेमन क्वालिटी हो गई। महाराष्ट्र के माल में भी इसी अनुपात में बढ़त दर्ज की गई। देसी चना भी उत्पादक मंडियों से पड़ते ना लगने एवं दाल मिलों की लिवाली से 5600 से बढक़र 5850 प्रति कुंटल का राजस्थानी माल का व्यापार हो गया। ऑस्ट्रेलिया के भाव भी इसी अनुपात में बढ़ाकर बोले गए। इधर काबुली चना महाराष्ट्र का जो 6000/6500 रुपए बिका था, उसके भाव 6400/6800 रुपये बोलने लगे। लोबिया में भी 100 रुपए की बढ़त दर्ज की गई। इधर मटर सफेद 4200 से बढक़र 4300 रुपए हो गई। मुंदड़ा पोर्ट पर डेढ़ सौ रुपए की बढ़त पर 4025 रुपए का व्यापार सुना गया। मूंग भी नयी फसल की दहशत से 300/400 रुपए टेंडर वाली नीचे आ गई, जबकि मोठ उत्पादक मंडियों के तेज समाचार आने एवं पाइपलाइन में माल की कमी से 400 रुपए बढक़र 5500/5550 रुपए प्रति क्विंटल हो गई। अन्य में मिला-जुला रुख रहा।


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