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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

19-05-2026

उत्पादन घटने तथा आयात में दिक्कत से पिस्ते में अच्छी तेजी की उम्मीद

  •  विश्व के प्रमुख उत्पादक तथा निर्यातक देशों में इस बार पिस्ते के उत्पादन में कमी आने तथा ईरान में चल रहे तनाव की वजह से पिस्ते में अच्छी तेजी की उम्मीद व्यक्त की जा रही है। व्यापारिक सूत्रों ने यह उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि ईरान से आयात में गिरावट आने की आशंका से इस प्रमुख सूखे मेवे में इस तेजी की आशा की जा रही है। स्थानीय थोक किराना बाजार में लिवाली सुस्त बनी होने से पिस्ता ईरानी 2250/2400 रुपए, हैराती 2800/3000 रुपए, पेशावरी 3300/3400 रुपए और पिस्ता डोडी रोस्टिड 1150/1250 रुपए प्रति किलोग्राम के पूर्वस्तर पर ही रुके रहे। इससे पूर्व हाल ही में इनमें क्वालिटीनुसार 100-200 रुपए की मंदी आई थी। व्यापारियों का कहना है कि पिस्ते में तेजी का अनुमान तो है लेकिन फिलहाल उठाव और व्यापारिक गतिविधियां सुस्त बनी होने से यह धारणा प्रभावित हो रही है। अमेरिका, तुर्किए और ईरान विश्व में पिस्ते के तीन सबसे बड़े उत्पादक तथा निर्यातक देश है। पिस्ते के कुल अंतर्राष्टï्रीय उत्पादन में इन तीनों देशों की संयुक्त हिस्सेदारी 87 प्रतिशत है। इनके अलावा, सीरिया और चीन भी मुख्य उत्पादक देश हैं। भारत में पिस्ते का उत्पादन घरेलू खपत की तुलना में नाममात्र का ही होता है। इसलिए हमें इस सूखे मेवे के आयात पर निर्भर रहना होता है। इस वर्ष पिस्ते के आयात में दो बड़ी दिक्कतें हैं। सबसे पहली और प्रमुख दिक्कत है ईरान का तनाव है। गौरतलब है कि अमेरिका तथा इजरायल द्वारा बीते 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद से वहां तनाव बना हुआ है। हालांकि बीते अप्रैल महीने के आरंभिक पखवाड़े से ईरान में सीजफायर चल रहा है लेकिन इसके बाद भी वहां फिर से युद्ध शुरू होने की आशंका बनी हुई है। बहरहाल, भारत के कुल पिस्ता आयात में अकेले ईरान की हिस्सेदारी करीब 69 प्रतिशत की है। इसके बाद अफगानिस्तान की करीब 19 प्रतिशत, अमेरिका की 3 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

    विश्व में पिस्ते का कुल करीब 14 लाख टन उत्पादन होता है। इसमें से 87 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका, तुर्किए तथा ईरान जैसे देशों में से इस बार अमेरिका तथा ईरान में इस प्रमुख सूखे मेवे के उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट आने की रिपोर्ट मिल रही है। इन अनुमानों पर यदि विश्वास किया जाए तो चालू सीजन के दौरान अमेरिका में पिस्ते का कुल 3.50 लाख टन उत्पादन होगा। इसके अलावा अमेरिका में इसका 90 हजार टन का आरंभिक स्टॉक भी होने की जानकारी आ रही है। इस प्रकार, इस बार अमेरिका में पिस्ते की कुल उपलब्धता करीब 4.40 लाख टन रहने की संभावना है। बीते सीजन की अपेक्षा अमेरिका का संभावित उत्पादन 50.60 प्रतिशत नीचा है। इस प्रकार, ईरान के उत्पादन में भी इस बार गिरावट आने की आशंका व्यक्त की जा रही है। प्राप्त हो रही सूचनाओं पर यदि भरोसा किया जाए तो इस बार ईरान में 60 हजार टन के आरंभिक स्टॉक तथा 1.30 लाख टन के उत्पादन को मिलाकर पिस्ते की कुल उपलब्धता 1.90 लाख टन रहने की आशा है। पिछले सीजन की तुलना में ईरान का नवीनतम उत्पादन 42.20 प्रतिशत नीचा है।दूसरी ओर, तुर्किए में इस बार पिस्ते के उत्पादन में अच्छी-खासी वृद्धि होने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। इन अनुमानों के अनुसार इस बार तुर्किए में पिस्ते का 1,56,400 टन उत्पादन होने तथा इसका 89,300 टन आरंभिक स्टॉक भी उपलब्ध होने की सूचना मिली है। एक वर्ष पूर्व की तुलना में तुर्किए का नवीनतम उत्पान 36.50 प्रतिशत ऊंचा है। अफगानिस्तान में भी इस बार पिस्ते के उत्पादन में थोड़ी बढ़ोत्तरी होने की आशा जताई जा रही है। इन अनुमानों के मुताबिक इस बार अफगानिस्तान में इस प्रमुख सूखे मेवे का 2700 टन उत्पादन होने की संभावना है। व्यापारियों ने बताया कि उत्पादन में आने वाली इस कमी के साथ-साथ चिंता की एक और बात यह है कि ईरान में बने तनाव की वजह से आयात में गिरावट आने की आशंका भी हर बीतते दिन के साथ प्रबल होती जा रही है। इतना ही नहीं, शिपिंग लाइन्स ने फोर्स मेजर भी लागू कर दिया है। इसका अर्थ यह है कि ईरान और अफगानिस्तान से आने वाला रुट बंद हो चुका है। वहां से पिस्ता आने का कोई साधन नहीं है। उनका मानना है कि अभी तो खैर बाजारों में व्यापारिक गतिविधियों की कमी बनी हुई है लेकिन जैसे ही आने वाले समय में कामकाज बढ़ेगा तो पिस्ते में अच्छी तेजी आ सकती है।

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उत्पादन घटने तथा आयात में दिक्कत से पिस्ते में अच्छी तेजी की उम्मीद

 विश्व के प्रमुख उत्पादक तथा निर्यातक देशों में इस बार पिस्ते के उत्पादन में कमी आने तथा ईरान में चल रहे तनाव की वजह से पिस्ते में अच्छी तेजी की उम्मीद व्यक्त की जा रही है। व्यापारिक सूत्रों ने यह उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि ईरान से आयात में गिरावट आने की आशंका से इस प्रमुख सूखे मेवे में इस तेजी की आशा की जा रही है। स्थानीय थोक किराना बाजार में लिवाली सुस्त बनी होने से पिस्ता ईरानी 2250/2400 रुपए, हैराती 2800/3000 रुपए, पेशावरी 3300/3400 रुपए और पिस्ता डोडी रोस्टिड 1150/1250 रुपए प्रति किलोग्राम के पूर्वस्तर पर ही रुके रहे। इससे पूर्व हाल ही में इनमें क्वालिटीनुसार 100-200 रुपए की मंदी आई थी। व्यापारियों का कहना है कि पिस्ते में तेजी का अनुमान तो है लेकिन फिलहाल उठाव और व्यापारिक गतिविधियां सुस्त बनी होने से यह धारणा प्रभावित हो रही है। अमेरिका, तुर्किए और ईरान विश्व में पिस्ते के तीन सबसे बड़े उत्पादक तथा निर्यातक देश है। पिस्ते के कुल अंतर्राष्टï्रीय उत्पादन में इन तीनों देशों की संयुक्त हिस्सेदारी 87 प्रतिशत है। इनके अलावा, सीरिया और चीन भी मुख्य उत्पादक देश हैं। भारत में पिस्ते का उत्पादन घरेलू खपत की तुलना में नाममात्र का ही होता है। इसलिए हमें इस सूखे मेवे के आयात पर निर्भर रहना होता है। इस वर्ष पिस्ते के आयात में दो बड़ी दिक्कतें हैं। सबसे पहली और प्रमुख दिक्कत है ईरान का तनाव है। गौरतलब है कि अमेरिका तथा इजरायल द्वारा बीते 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद से वहां तनाव बना हुआ है। हालांकि बीते अप्रैल महीने के आरंभिक पखवाड़े से ईरान में सीजफायर चल रहा है लेकिन इसके बाद भी वहां फिर से युद्ध शुरू होने की आशंका बनी हुई है। बहरहाल, भारत के कुल पिस्ता आयात में अकेले ईरान की हिस्सेदारी करीब 69 प्रतिशत की है। इसके बाद अफगानिस्तान की करीब 19 प्रतिशत, अमेरिका की 3 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

विश्व में पिस्ते का कुल करीब 14 लाख टन उत्पादन होता है। इसमें से 87 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका, तुर्किए तथा ईरान जैसे देशों में से इस बार अमेरिका तथा ईरान में इस प्रमुख सूखे मेवे के उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट आने की रिपोर्ट मिल रही है। इन अनुमानों पर यदि विश्वास किया जाए तो चालू सीजन के दौरान अमेरिका में पिस्ते का कुल 3.50 लाख टन उत्पादन होगा। इसके अलावा अमेरिका में इसका 90 हजार टन का आरंभिक स्टॉक भी होने की जानकारी आ रही है। इस प्रकार, इस बार अमेरिका में पिस्ते की कुल उपलब्धता करीब 4.40 लाख टन रहने की संभावना है। बीते सीजन की अपेक्षा अमेरिका का संभावित उत्पादन 50.60 प्रतिशत नीचा है। इस प्रकार, ईरान के उत्पादन में भी इस बार गिरावट आने की आशंका व्यक्त की जा रही है। प्राप्त हो रही सूचनाओं पर यदि भरोसा किया जाए तो इस बार ईरान में 60 हजार टन के आरंभिक स्टॉक तथा 1.30 लाख टन के उत्पादन को मिलाकर पिस्ते की कुल उपलब्धता 1.90 लाख टन रहने की आशा है। पिछले सीजन की तुलना में ईरान का नवीनतम उत्पादन 42.20 प्रतिशत नीचा है।दूसरी ओर, तुर्किए में इस बार पिस्ते के उत्पादन में अच्छी-खासी वृद्धि होने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। इन अनुमानों के अनुसार इस बार तुर्किए में पिस्ते का 1,56,400 टन उत्पादन होने तथा इसका 89,300 टन आरंभिक स्टॉक भी उपलब्ध होने की सूचना मिली है। एक वर्ष पूर्व की तुलना में तुर्किए का नवीनतम उत्पान 36.50 प्रतिशत ऊंचा है। अफगानिस्तान में भी इस बार पिस्ते के उत्पादन में थोड़ी बढ़ोत्तरी होने की आशा जताई जा रही है। इन अनुमानों के मुताबिक इस बार अफगानिस्तान में इस प्रमुख सूखे मेवे का 2700 टन उत्पादन होने की संभावना है। व्यापारियों ने बताया कि उत्पादन में आने वाली इस कमी के साथ-साथ चिंता की एक और बात यह है कि ईरान में बने तनाव की वजह से आयात में गिरावट आने की आशंका भी हर बीतते दिन के साथ प्रबल होती जा रही है। इतना ही नहीं, शिपिंग लाइन्स ने फोर्स मेजर भी लागू कर दिया है। इसका अर्थ यह है कि ईरान और अफगानिस्तान से आने वाला रुट बंद हो चुका है। वहां से पिस्ता आने का कोई साधन नहीं है। उनका मानना है कि अभी तो खैर बाजारों में व्यापारिक गतिविधियों की कमी बनी हुई है लेकिन जैसे ही आने वाले समय में कामकाज बढ़ेगा तो पिस्ते में अच्छी तेजी आ सकती है।


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