देसी चने की बिजाई के बाद ही अक्टूबर-नवंबर की हुई बरसात से अधिकतर उत्पादक क्षेत्रों में व्यापक नुकसान हुआ था, जिससे मंडियों में माल का प्रेशर नहीं है। अत: अच्छी तेजी के लिए कुछ दिन प्रतीक्षा करना पड़ेगा, लेकिन उत्पादक मंडियों में माल की कमी को देखते हुए 6000 रुपए को पार दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025 में सभी राज्यों में अच्छी बरसात होने से अधिकतर खाद्यान्नों का उत्पादन अधिक रहा है। दलहनों में देसी चने की बिजाई राजस्थान महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश कर्नाटक एवं मध्य प्रदेश में 10-15 प्रतिशत अधिक ही हुई थी, लेकिन अक्टूबर-नवंबर में बिजाई के बाद ही उत्तर भारत में लगातार बरसात होने से बोई हुई फसल को 26-27 प्रतिशत नुकसान हुआ था। महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश यूपी बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में इसका ज्यादा प्रकोप रहा। इसके साथ-साथ मटर की फसल भी 50-55 प्रतिशत नुकसान हो गई थी, क्योंकि बिजाई के तुरंत बाद ही लगातार बरसात से खेतों में पानी लग गया। यही कारण है कि उत्पादन में जबरदस्त कमी रही है। दूसरी ओर देसी चने का स्टॉक राजस्थान मध्य प्रदेश महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश कर्नाटक में पुराना माल पहले ही 90 प्रतिशत नई फसल आने पर समाप्त हो गया था, केवल ऑस्ट्रेलिया के उतरे हुए माल ही मिलिंग में जा रहे थे। नये माल का प्रेशर किसी भी मंडी में ज्यादा नहीं है। उधर पाइपलाइन में माल की कमी है, ऑस्ट्रेलिया से पहले वाले सौदे आ चुके हैं, इस वजह से राजस्थानी चने के भाव बढ़ाकर बोले जाने से यहां राजस्थानी चने का भाव 50/75 रुपए बढक़र आज 5650/5675 रुपए प्रति क्विंटल लॉरेंस रोड पर हो गया है। दाल के भाव भी एवरेज क्वालिटी के 100 रुपए बढक़र 6300/6500 रुपए हो गए हैं, बढिय़ा सिलेक्टेड माल क्वालिटी एवं नमी के हिसाब से ऊपर बिक रहे हैं। वास्तविकता यह है कि ऑस्ट्रेलिया का काला चना मुंदड़ा व मुंबई पोर्ट पर काफी निपट चुका है, घरेलू चने की खपत की तुलना में उपलब्धि कम है, इन परिस्थितियों में वर्तमान भाव का राजस्थानी चना जून में ही लाभ दे जाएगा। एक बार राजस्थानी चना थोड़ा भी ऑस्ट्रेलिया की बिकवाली कम होते ही छलांग लगा जाएगा तथा यह नये ऑस्ट्रेलिया के माल से पहले 6500 रुपए को पार कर जाएगा। देसी चने का उत्पादन 90 लाख मीट्रिक टन के करीब हुआ है, जबकि हमारी खपत 130 लाख मीट्रिक टन की है। अत: यहां से वर्तमान भाव का चना 15 जून से पहले 6000 को पार कर जाएगा।