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15-05-2026

निर्यात मांग से सोया डीओसी 61000 हजार रुपए कोटा में बिकी

  •  सोया डीओसी के भाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से पिछले एक महीने से लगातार निर्यात हेतु शिपमेंट हो रहे हैं। दूसरी ओर कच्चे माल की भारी कमी होने से साल्वेंट प्लांटों को माल मिलना मुश्किल हो गया है। यही कारण है कि एक सप्ताह के अंतराल ही 10000 रुपए प्रति टन की तेजी आ गई है तथा सीजन से अब तक इसके दो गुने भाव हो गए हैं तथा आगे अभी कम से कम 10 हजार रुपए और बढऩे के आसार बन गए हैं। पिछले सप्ताह सात मई के  ‘व्यापार केसरी’ के अंक में भी जल्दी 10000 रुपए प्रति टन बढऩे की धारणा व्यक्त की गई थी, जो आप लोगों के सामने है। आगे ब्राजील में सोयाबीन की भारी कमी होने तथा चीन एवं यूएसए सहित यूरोपीय देशों में सोया डीओसी की जबरदस्त किल्लत होने से वहां हाल ही में 120-125 डॉलर प्रति टन की तेजी आ गई है तथा भारतीय सोया डीओसी के अलावा कहीं से माल नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि पिछले एक महीने से लगातार सोया डीओसी के शिपमेंट विभिन्न  बंदरगाहों से हो रहे हैं, जिस कारण प्लांटों में माल की भारी कमी बन गई है तथा एमपी महाराष्ट्र राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में सोयाबीन मिलना मुश्किल हो गया है। गौरतलब है कि सोयाबीन की फसल आए साढ़े सात महीने हो चुके हैं। शिवपुरी दतिया सुजालपुर नीमच दाहोद के साथ-साथ कोटा अकोला जलगांव आदि उत्पादक क्षेत्रों में फसल की बिजाई के बाद से ही लगातार बरसात होने एवं फसल तैयार के समय में भी बेमौसमी बरसात से फसल को भारी नुकसान हुआ है। विगत तीन वर्षों से 130-135 लाख मीट्रिक टन के बीच सोयाबीन का उत्पादन देश में हो रहा था, जो इस बार 85-86 लाख मीट्रिक टन के करीब ही रह जाने की ताजा अनुमान आने लगा है। यही कारण है कि जो मंडियों में लूज बढिय़ा सोयाबीन 3600/3800 रुपए प्रति क्विंटल बिक गई थी, उसके भाव 6800/6900 रुपए प्रति कुंतल हो गए हैं तथा प्लांट पहुंचने 7100/7200 प्रति क्विटल भाव हो गए हैं, जो नीचे में प्लांट पहुंच 3800/4000 रुपए बिका था। गौरतलब है कि सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद भी किया गया था, क्योंकि उस समय मंडियों के भाव से न्यूनतम समर्थन मूल्य 1300/1400 रुपए प्रति कुंतल ऊंचा था, जो अब उतना ही नीचे हो गया है। वर्ष 2024-25 में सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4892 रुपए प्रति क्विंटल था, जो वर्ष 2025-26 में सरकार द्वारा 436 रुपए बढ़ाकर 5328 रुपए प्रति कुंतल कर दिया गया है। मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर काफी खरीद की गई है, जिससे किसानों के माल, गत वर्ष की अपेक्षा काफी बिक चुके हैं। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोया डीओसी के भाव काफी ऊंचे होने से राजस्थान मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र के प्लांटों से निर्यात में गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में खरीफ सीजन में 46-47 प्रतिशत निर्यात अधिक हो गया है। यही कारण है कि नीमच में 27500 रुपए एवं कोटा में 28500 प्रति टन सोया डीओसी नीचे में बिकने के बाद इस समय क्रमश: 60500 एवं 61000 रुपए प्रति टन हो गया है। इधर दतिया नीमच लाइन में 60700 रुपए प्रति टन का व्यापार एक्सप्लांट में होने लगा है। भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच में 65000-65500 रुपए प्रति टन तक निर्यातकों ने खरीद किया है, जिसमें 46-48 प्रतिशत प्रोटीन है। गौरतलब है कि ढाई महीने से ईरान इजरायल अमेरिका के युद्ध से समुद्री मार्ग से शिपमेंट में थोड़ा रिस्क बढ़ गया था, लेकिन नई फसल आने में अभी 4 महीने से अधिक का समय बाकी है तथा उस हिसाब से एमपी राजस्थान महाराष्ट्र की मंडियों में माल नहीं है। नीमच लाइन में भी इस बार गत वर्ष की तुलना में 45 प्रतिशत सोयाबीन कम आई हैं। इधर दतिया सुजालपुर लाइन में भी सोयाबीन का स्टॉक 42 प्रतिशत कम है। दूसरी ओर राजस्थान महाराष्ट्र में 39-40 प्रतिशत अलग-अलग मंडियों में स्टॉक कम है। यही कारण है कि सॉल्वेंट प्लांटों को डीओसी बनाने के लिए सोयाबीन सीड महंगा खरीदना पड़ रहा है। वर्तमान में कोटा लाइन के प्लांटों में जो 61000 रुपए प्रति टन की सोया डीओसी एक्सप्लांट में बिक रही है, उसके भाव भविष्य में 70 हजार रुपए प्रति टन बन सकते हैं। सोयाबीन भी 7100 रुपए जो प्लांट पहुंच में बिक रही है, उसके भाव 7800 रुपए तक पहुंचने की संभावना दिखाई दे रही है। इसके साथ-साथ सोया डीओसी भी 80000 रुपए प्रति टन बन जाने की संभावना है, इससे अधिक की तेजी आगे के मौसम एवं बिजाई पर निर्भर करेगी।

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निर्यात मांग से सोया डीओसी 61000 हजार रुपए कोटा में बिकी

 सोया डीओसी के भाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से पिछले एक महीने से लगातार निर्यात हेतु शिपमेंट हो रहे हैं। दूसरी ओर कच्चे माल की भारी कमी होने से साल्वेंट प्लांटों को माल मिलना मुश्किल हो गया है। यही कारण है कि एक सप्ताह के अंतराल ही 10000 रुपए प्रति टन की तेजी आ गई है तथा सीजन से अब तक इसके दो गुने भाव हो गए हैं तथा आगे अभी कम से कम 10 हजार रुपए और बढऩे के आसार बन गए हैं। पिछले सप्ताह सात मई के  ‘व्यापार केसरी’ के अंक में भी जल्दी 10000 रुपए प्रति टन बढऩे की धारणा व्यक्त की गई थी, जो आप लोगों के सामने है। आगे ब्राजील में सोयाबीन की भारी कमी होने तथा चीन एवं यूएसए सहित यूरोपीय देशों में सोया डीओसी की जबरदस्त किल्लत होने से वहां हाल ही में 120-125 डॉलर प्रति टन की तेजी आ गई है तथा भारतीय सोया डीओसी के अलावा कहीं से माल नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि पिछले एक महीने से लगातार सोया डीओसी के शिपमेंट विभिन्न  बंदरगाहों से हो रहे हैं, जिस कारण प्लांटों में माल की भारी कमी बन गई है तथा एमपी महाराष्ट्र राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में सोयाबीन मिलना मुश्किल हो गया है। गौरतलब है कि सोयाबीन की फसल आए साढ़े सात महीने हो चुके हैं। शिवपुरी दतिया सुजालपुर नीमच दाहोद के साथ-साथ कोटा अकोला जलगांव आदि उत्पादक क्षेत्रों में फसल की बिजाई के बाद से ही लगातार बरसात होने एवं फसल तैयार के समय में भी बेमौसमी बरसात से फसल को भारी नुकसान हुआ है। विगत तीन वर्षों से 130-135 लाख मीट्रिक टन के बीच सोयाबीन का उत्पादन देश में हो रहा था, जो इस बार 85-86 लाख मीट्रिक टन के करीब ही रह जाने की ताजा अनुमान आने लगा है। यही कारण है कि जो मंडियों में लूज बढिय़ा सोयाबीन 3600/3800 रुपए प्रति क्विंटल बिक गई थी, उसके भाव 6800/6900 रुपए प्रति कुंतल हो गए हैं तथा प्लांट पहुंचने 7100/7200 प्रति क्विटल भाव हो गए हैं, जो नीचे में प्लांट पहुंच 3800/4000 रुपए बिका था। गौरतलब है कि सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद भी किया गया था, क्योंकि उस समय मंडियों के भाव से न्यूनतम समर्थन मूल्य 1300/1400 रुपए प्रति कुंतल ऊंचा था, जो अब उतना ही नीचे हो गया है। वर्ष 2024-25 में सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4892 रुपए प्रति क्विंटल था, जो वर्ष 2025-26 में सरकार द्वारा 436 रुपए बढ़ाकर 5328 रुपए प्रति कुंतल कर दिया गया है। मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर काफी खरीद की गई है, जिससे किसानों के माल, गत वर्ष की अपेक्षा काफी बिक चुके हैं। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोया डीओसी के भाव काफी ऊंचे होने से राजस्थान मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र के प्लांटों से निर्यात में गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में खरीफ सीजन में 46-47 प्रतिशत निर्यात अधिक हो गया है। यही कारण है कि नीमच में 27500 रुपए एवं कोटा में 28500 प्रति टन सोया डीओसी नीचे में बिकने के बाद इस समय क्रमश: 60500 एवं 61000 रुपए प्रति टन हो गया है। इधर दतिया नीमच लाइन में 60700 रुपए प्रति टन का व्यापार एक्सप्लांट में होने लगा है। भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच में 65000-65500 रुपए प्रति टन तक निर्यातकों ने खरीद किया है, जिसमें 46-48 प्रतिशत प्रोटीन है। गौरतलब है कि ढाई महीने से ईरान इजरायल अमेरिका के युद्ध से समुद्री मार्ग से शिपमेंट में थोड़ा रिस्क बढ़ गया था, लेकिन नई फसल आने में अभी 4 महीने से अधिक का समय बाकी है तथा उस हिसाब से एमपी राजस्थान महाराष्ट्र की मंडियों में माल नहीं है। नीमच लाइन में भी इस बार गत वर्ष की तुलना में 45 प्रतिशत सोयाबीन कम आई हैं। इधर दतिया सुजालपुर लाइन में भी सोयाबीन का स्टॉक 42 प्रतिशत कम है। दूसरी ओर राजस्थान महाराष्ट्र में 39-40 प्रतिशत अलग-अलग मंडियों में स्टॉक कम है। यही कारण है कि सॉल्वेंट प्लांटों को डीओसी बनाने के लिए सोयाबीन सीड महंगा खरीदना पड़ रहा है। वर्तमान में कोटा लाइन के प्लांटों में जो 61000 रुपए प्रति टन की सोया डीओसी एक्सप्लांट में बिक रही है, उसके भाव भविष्य में 70 हजार रुपए प्रति टन बन सकते हैं। सोयाबीन भी 7100 रुपए जो प्लांट पहुंच में बिक रही है, उसके भाव 7800 रुपए तक पहुंचने की संभावना दिखाई दे रही है। इसके साथ-साथ सोया डीओसी भी 80000 रुपए प्रति टन बन जाने की संभावना है, इससे अधिक की तेजी आगे के मौसम एवं बिजाई पर निर्भर करेगी।


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