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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

09-05-2026

लाल मिर्च : तेजी की उम्मीद

  •  लाल मिर्च की बोई हुई फसल भी प्रतिकूल मौसम से काफी क्षेत्रों में गल गई थी। दूसरी ओर किसानों द्वारा इस बार बिजाई भी 20 प्रतिशत कम किया गया था। गुंटूर एवं खम्मम लाइन में लाल मिर्च की आवक हो रही है। दक्षिण भारत की उत्पादक मंडियों में स्टॉक की कमी होने से तेजा माल 2 दिनों में 5/7 रुपए प्रति किलो और बढ़ गया है। आपूर्ति में कमी से बाजार जल्दी 30/35 रुपए प्रति किलो और बढ़ सकता है। इस बार मौसम प्रतिकूल होने से लाल मिर्च की फसल बिजाई के बाद ही काफी खराब हो गई थी तथा कुछ नीचे वाले क्षेत्रों में पानी से फसल गल गई थी, उसके बाद भी अक्टूबर के अंतिम सप्ताह वाली बरसात से फसल को भारी नुकसान हुआ है। जिस कारण दक्षिण भारत के सभी उत्पादक क्षेत्रों में लाल मिर्च के उत्पादन में कमी आ गई है। फलत: फरवरी के प्रथम सप्ताह में भी आवक नहीं बढ़ पा रही है। लाल मिर्च की गुंटूर वारंगल दुग्गीराला खम्मम सहित तेलंगाना राज्यों में बिजाई के बाद अगस्त से 31 अक्टूबर तक भारी बरसात होने से 45-46 प्रतिशत भूमि में पौधे नष्ट हो गए थे, तत्पश्चात् लगे हुए फूल एवं फली अक्टूबर के अंत में काफी खराब हो गई, जिस कारण प्रति हेक्टेयर हरी व लाल मिर्च का उत्पादन 23-24 प्रतिशत कम हो गया है। अभी खम्मम एवं गुंटुर लाइन का नया माल आ रहा है, जो 2-3 दिन में 5/7 रुपए बढ़ गया है, पुराने फुल कट मालों में 10 रुपए तक तेजी आई है। गौरतलब है कि जनवरी के दूसरे पखवाड़े में 50/60 रुपए की उल्लेखनीय तेजी आने के बाद पिछले सप्ताह थोड़ा करेक्शन आ गया था लेकिन भी के पहले सप्ताह में भी आवक का दबाव नहीं बन पा रहा है, जिस कारण दोबारा तेजी आ गई है। इधर उत्तर भारत के किसानों को मिर्च में इस बार सीजन पर काफी नुकसान लगा है तथा उत्पादन व मिर्च की तुड़ाई की लागत महंगी हो जाने से 22-23 प्रतिशत बिजाई कम हुई थी। इसके अलावा दक्षिण भारत में गुंटूर वारंगल ब्यादगी, कडप्पा लाइन में भी विगत दो वर्षों से लाल मिर्च के भाव नहीं मिलने से किसानों ने बिजाई कम किया है तथा उसकी बजाय मक्की पर ज्यादा रुझान बना हुआ था। इसकी पुरानी फसल फरवरी में आई थी तथा इस बार गुंटूर लाइन के सभी कोल्ड स्टोर में गत वर्ष की तुलना में स्टॉक कम बचेगा, डंडीदार तेजा हल्का एवं मीडियम माल का स्टॉक ज्यादा था, वह माल पंजाब हिमाचल एवं बिहार बंगाल में ज्यादा गया है, क्योंकि इंदौर लाइन की फसल इस बार पहले की अपेक्षा कम आई थी। इस समय इंदौर लाइन का दंडीदार 200/215 रुपए प्रति किलो बिक रहा है तथा खम्मम का तेजा 265/270 रुपए हो सकता है। फुल कट 255/270 रुपए के बीच बिक रहा है। वह 300 रुपए बन सकता है। फसल में पोल आने से इसमें 35/40 रुपए प्रति किलो क्वालिटी अनुसार माल में और तेजी लग रही है। इस वजह से अब कोल्ड स्टोरों का माल 85 प्रतिशत निपट गया है तथा कोई भी कारोबारी स्टॉक के प्रेशर में नहीं है। दूसरी और सर्दी बढऩे ग्राहकी चौतरफा पहले की अपेक्षा अच्छी है। वर्तमान भाव में बाजार तेज लग रहा है। उधर हिमाचल में अधिक बरसात से पिछले दिनों तबाही हुई थी, अब वहां के कारोबारी माल खरीदने लगे हैं। चालू महीने शादियों के चलते चालानी मांग फिर अच्छी हो गई है। गुंटूर लाइन के कोल्ड स्टोर में गत वर्ष की तुलना में स्टाक कम है तथा वारंगल दुग्गीराला ब्यादगी लाइन में भी माल ज्यादा नहीं है तथा वहां जो स्टाक में माल पड़ा है, उसके ऊंचे भाव बोल रहे हैं। 

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लाल मिर्च : तेजी की उम्मीद

 लाल मिर्च की बोई हुई फसल भी प्रतिकूल मौसम से काफी क्षेत्रों में गल गई थी। दूसरी ओर किसानों द्वारा इस बार बिजाई भी 20 प्रतिशत कम किया गया था। गुंटूर एवं खम्मम लाइन में लाल मिर्च की आवक हो रही है। दक्षिण भारत की उत्पादक मंडियों में स्टॉक की कमी होने से तेजा माल 2 दिनों में 5/7 रुपए प्रति किलो और बढ़ गया है। आपूर्ति में कमी से बाजार जल्दी 30/35 रुपए प्रति किलो और बढ़ सकता है। इस बार मौसम प्रतिकूल होने से लाल मिर्च की फसल बिजाई के बाद ही काफी खराब हो गई थी तथा कुछ नीचे वाले क्षेत्रों में पानी से फसल गल गई थी, उसके बाद भी अक्टूबर के अंतिम सप्ताह वाली बरसात से फसल को भारी नुकसान हुआ है। जिस कारण दक्षिण भारत के सभी उत्पादक क्षेत्रों में लाल मिर्च के उत्पादन में कमी आ गई है। फलत: फरवरी के प्रथम सप्ताह में भी आवक नहीं बढ़ पा रही है। लाल मिर्च की गुंटूर वारंगल दुग्गीराला खम्मम सहित तेलंगाना राज्यों में बिजाई के बाद अगस्त से 31 अक्टूबर तक भारी बरसात होने से 45-46 प्रतिशत भूमि में पौधे नष्ट हो गए थे, तत्पश्चात् लगे हुए फूल एवं फली अक्टूबर के अंत में काफी खराब हो गई, जिस कारण प्रति हेक्टेयर हरी व लाल मिर्च का उत्पादन 23-24 प्रतिशत कम हो गया है। अभी खम्मम एवं गुंटुर लाइन का नया माल आ रहा है, जो 2-3 दिन में 5/7 रुपए बढ़ गया है, पुराने फुल कट मालों में 10 रुपए तक तेजी आई है। गौरतलब है कि जनवरी के दूसरे पखवाड़े में 50/60 रुपए की उल्लेखनीय तेजी आने के बाद पिछले सप्ताह थोड़ा करेक्शन आ गया था लेकिन भी के पहले सप्ताह में भी आवक का दबाव नहीं बन पा रहा है, जिस कारण दोबारा तेजी आ गई है। इधर उत्तर भारत के किसानों को मिर्च में इस बार सीजन पर काफी नुकसान लगा है तथा उत्पादन व मिर्च की तुड़ाई की लागत महंगी हो जाने से 22-23 प्रतिशत बिजाई कम हुई थी। इसके अलावा दक्षिण भारत में गुंटूर वारंगल ब्यादगी, कडप्पा लाइन में भी विगत दो वर्षों से लाल मिर्च के भाव नहीं मिलने से किसानों ने बिजाई कम किया है तथा उसकी बजाय मक्की पर ज्यादा रुझान बना हुआ था। इसकी पुरानी फसल फरवरी में आई थी तथा इस बार गुंटूर लाइन के सभी कोल्ड स्टोर में गत वर्ष की तुलना में स्टॉक कम बचेगा, डंडीदार तेजा हल्का एवं मीडियम माल का स्टॉक ज्यादा था, वह माल पंजाब हिमाचल एवं बिहार बंगाल में ज्यादा गया है, क्योंकि इंदौर लाइन की फसल इस बार पहले की अपेक्षा कम आई थी। इस समय इंदौर लाइन का दंडीदार 200/215 रुपए प्रति किलो बिक रहा है तथा खम्मम का तेजा 265/270 रुपए हो सकता है। फुल कट 255/270 रुपए के बीच बिक रहा है। वह 300 रुपए बन सकता है। फसल में पोल आने से इसमें 35/40 रुपए प्रति किलो क्वालिटी अनुसार माल में और तेजी लग रही है। इस वजह से अब कोल्ड स्टोरों का माल 85 प्रतिशत निपट गया है तथा कोई भी कारोबारी स्टॉक के प्रेशर में नहीं है। दूसरी और सर्दी बढऩे ग्राहकी चौतरफा पहले की अपेक्षा अच्छी है। वर्तमान भाव में बाजार तेज लग रहा है। उधर हिमाचल में अधिक बरसात से पिछले दिनों तबाही हुई थी, अब वहां के कारोबारी माल खरीदने लगे हैं। चालू महीने शादियों के चलते चालानी मांग फिर अच्छी हो गई है। गुंटूर लाइन के कोल्ड स्टोर में गत वर्ष की तुलना में स्टाक कम है तथा वारंगल दुग्गीराला ब्यादगी लाइन में भी माल ज्यादा नहीं है तथा वहां जो स्टाक में माल पड़ा है, उसके ऊंचे भाव बोल रहे हैं। 


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