सरसों का उत्पादन प्रति हैक्टेयर उत्पादकता कम बैठने से पूर्व अनुमान से कम बैठने लगा है। इस वजह से दो माह में अच्छी तेजी आ गई है तथा आगे भी सरसों व इसके तेल में 4/8 रुपए प्रति किलो की तेजी की दिखाई दे रही है। सरसों का उत्पादन रबी तेल सेमिनार में 121 लाख मीट्रिक टन के करीब उत्पादन अनुमान लगाया गया था, जबकि किसानों द्वारा प्रति हैक्टेयर उत्पादकता पूर्व अनुमान से कम को देखते हुए ताजा उत्पादन अनुमान 116 लाख मीट्रिक टन लगाये जा रहे हैं। अब धीरे-धीरे मंडियों में आवक घटकर ढाई लाख बोरी दैनिक रह गई है, जो सीजन 10-11 लाख बोरी दैनिक हो गई थी। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पाम, पामोलिन, सीपीओ, सनफ्लॉवर एवं सोया तेल के भाव काफी ऊंचे हो गए हैं। इस वजह से इसका तेल गत एक पखवाड़े में 7 रुपए प्रति किलो बढ़ाकर 121/122 रुपए प्रति किलो बोलने लगे हैं। इधर निवाई टोंक कोटा सुमेरपुर अलवर भरतपुर, जो सरसो उत्पादन का मुख्य गढ़ माना जाता है, वहां भी आवक घट कर उक्त अवधि के अंतराल 40-45 प्रतिशत कम हो गई है। जिससे जो सरसों 42 प्रतिशत कंडीशन वाली मई के प्रारंभ में 5300/5325 रुपए प्रति क्विंटल बिकी थी, इसके भाव वर्तमान में 6225/6250 रुपए प्रति क्विंटल जयपुर पहुंच जीएसटी अतिरिक्त हो गए हैं। इसका तेल भी उक्त अवधि के अंतराल 98 रुपए किलो से बढक़र थोक में 122 रुपए जयपुर पहुंच में जीएसटी अतिरिक्त पर जा पहुंचा है। हालांकि एक साथ आई सरपट तेजी के बाद दो-तीन रुपए प्रति किलो का करेक्शन बीच-बीच में आता रहा है, लेकिन जड़ में मंदा नहीं है तथा बाजार फिर 5/6 रुपए प्रति किलो तेल का बढ़ सकता है।