अमेजॉन के कंट्री हेड समीर कुमार ने कहा कि क्विक कॉमर्स मार्केट के अग्रणी के रूप में उभरना अमेजन के लिए महज समय की बात है क्योंकि वह प्राइम प्रोग्राम और व्यापक प्रोडक्ट लाइन के दम पर प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोडऩे की रणनीति पर काम कर रही है। अमेजन क्विक कॉमर्स को व्यापक ऑनलाइन खुदरा बाजार के भीतर एक गति समीकरण के रूप में देखती है। उन्होंने साथ इस धारणा को खारिज किया कि भारत में क्विक कॉमर्स को अपनाने में वृद्धि पारंपरिक ई-कॉमर्स के विकास को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी प्रतिस्पर्धी-केंद्रित नहीं बल्कि ‘‘ग्राहक-केंद्रित’’ है और भारत में 13 वर्षों में विकसित की गई व्यापक उत्पाद उपलब्धता एवं बड़े पैमाने की ई-कॉमर्स क्षमता उसकी बड़ी ताकत है। हमें यहां तक पहुंचने में 13 साल से अधिक समय लगा है और हम मानते हैं कि इस व्यापक चयन के साथ गति जोडऩा ऐसी चीज है, जिसकी बराबरी करना दूसरों के लिए आसान नहीं होगा। कंपनी का क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन नाउ 12 से अधिक शहरों में शुरू हो चुका है। इसका 100 से अधिक शहरों तथा 1,000 ‘माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर’ तक विस्तार करने की योजना है। भारत का क्विक कॉमर्स बाजार देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक बन गया है, जहां फास्र्ट सप्लाई की बढ़ती मांग और उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव प्रमुख कारण हैं। यह सेवा शुरुआत में मुख्य रूप से किराना और जरूरी वस्तुओं तक सीमित थी। हालांकि अब यह इलेक्ट्रॉनिक्स, सौंदर्य प्रसाधन, घरेलू सामान और ‘फैशन एक्सेसरीज’ तक फैल चुकी है, जहां युवा उपभोक्ता सुविधा और गति को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस क्षेत्र में ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट, फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसे बड़े खिलाड़ी आक्रामक निवेश कर रहे हैं और अपनी आपूर्ति श्रृंखला व उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और मासिक आधार पर 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा रही है। साथ ही, ‘प्राइम’ सदस्य अन्य ग्राहकों की तुलना में तीन गुना अधिक खरीदारी कर रहे हैं। अमेजन ने 2030 तक भारत में 35 अरब डॉलर निवेश की योजना की घोषणा की है, जो व्यापार विस्तार, एआई आधारित डिजिटलीकरण, निर्यात वृद्धि और रोजगार सृजन पर केंद्रित है। यह निवेश पहले से किए गए 40 अरब डॉलर के निवेश के अतिरिक्त है। वैश्विक अनिश्चितताओं के प्रभाव पर कहा कि कंपनी स्थिति पर नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि ईंधन लागत बढऩे से कुछ विके्रताओं को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि उन्होंने इसे अल्पकालिक प्रभाव बताया।