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08-06-2026

देश के 27% प्रतिशत HouseholdUU अब भी इंटरनेट सुविधा से वंचित

  •  देश में मोबाइल फोन की उपलब्धता लगभग हर परिवार तक होने के बावजूद बड़ी संख्या में परिवार अब भी इंटरनेट से दूर हैं। एक अध्ययन रिपोर्ट में यह निष्कर्ष पेश किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 95.1 प्रतिशत परिवारों के पास मोबाइल फोन है, लेकिन 27.5 प्रतिशत परिवार अब भी डिजिटल दुनिया से नहीं जुड़ पाए हैं। यह स्थिति देश में डिजिटल असमानता को उजागर करती है, जो अब केवल इंटरनेट की पहुंच तक सीमित नहीं है, बल्कि अवसरों और डिजिटल सेवाओं के उपयोग में भी अंतर दिखाती है। यह अध्ययन ‘नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च’ (एनसीएईआर) ने ‘द क्वांटम हब’ के सहयोग से तैयार किया है। इसका शीर्षक ‘भारत में डिजिटल समावेशन का बदलता परिदृश्य’ है। रिपोर्ट 2022 से 2024 के बीच किए गए भारत मानव विकास सर्वेक्षण (आईएचडीएस-3) पर आधारित है, जिसमें 47,000 से अधिक परिवार शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, गत 10 वर्षों में भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2015 में जहां करीब 19.8 करोड़ लोग इंटरनेट का उपयोग करते थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढक़र 1.03 अरब से अधिक हो गई है। यह वृद्धि सस्ते स्मार्टफोन, सस्ते डेटा और डिजिटल ढांचे के विस्तार के कारण हुई है। इसके बावजूद असमानता बनी हुई है। कई परिवारों में इंटरनेट की गुणवत्ता, उपकरणों की उपलब्धता, डिजिटल कौशल और शिक्षा का स्तर अलग-अलग है। साथ ही सरकारी सेवाओं, वित्तीय सुविधाओं और रोजगार के डिजिटल उपयोग में भी अंतर देखने को मिलता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 71.4 प्रतिशत परिवार मोबाइल के जरिए इंटरनेट का उपयोग करते हैं, लेकिन 27.5 प्रतिशत परिवार अब भी पूरी तरह ऑफलाइन हैं। इंटरनेट उपयोग में पुरुष-महिला अंतर भी स्पष्ट है। कामकाजी उम्र की 35.6 प्रतिशत महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 57.6 प्रतिशत है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने वाले कई परिवारों को अब भी बाहरी व्यक्ति की मदद लेनी पड़ती है। ऐसे 20.4 प्रतिशत परिवारों में यह स्थिति देखी गई। इसमें कहा गया कि जिन परिवारों में शिक्षा का स्तर कम है, उनमें यह निर्भरता और बढक़र लगभग एक-तिहाई तक पहुंच जाती है। इससे पता चलता है कि कई लोगों के लिए इंटरनेट अभी भी एक ऐसा साधन है जिसे वे अकेले आसानी से उपयोग नहीं कर पाते।

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देश के 27% प्रतिशत HouseholdUU अब भी इंटरनेट सुविधा से वंचित

 देश में मोबाइल फोन की उपलब्धता लगभग हर परिवार तक होने के बावजूद बड़ी संख्या में परिवार अब भी इंटरनेट से दूर हैं। एक अध्ययन रिपोर्ट में यह निष्कर्ष पेश किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 95.1 प्रतिशत परिवारों के पास मोबाइल फोन है, लेकिन 27.5 प्रतिशत परिवार अब भी डिजिटल दुनिया से नहीं जुड़ पाए हैं। यह स्थिति देश में डिजिटल असमानता को उजागर करती है, जो अब केवल इंटरनेट की पहुंच तक सीमित नहीं है, बल्कि अवसरों और डिजिटल सेवाओं के उपयोग में भी अंतर दिखाती है। यह अध्ययन ‘नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च’ (एनसीएईआर) ने ‘द क्वांटम हब’ के सहयोग से तैयार किया है। इसका शीर्षक ‘भारत में डिजिटल समावेशन का बदलता परिदृश्य’ है। रिपोर्ट 2022 से 2024 के बीच किए गए भारत मानव विकास सर्वेक्षण (आईएचडीएस-3) पर आधारित है, जिसमें 47,000 से अधिक परिवार शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, गत 10 वर्षों में भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2015 में जहां करीब 19.8 करोड़ लोग इंटरनेट का उपयोग करते थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढक़र 1.03 अरब से अधिक हो गई है। यह वृद्धि सस्ते स्मार्टफोन, सस्ते डेटा और डिजिटल ढांचे के विस्तार के कारण हुई है। इसके बावजूद असमानता बनी हुई है। कई परिवारों में इंटरनेट की गुणवत्ता, उपकरणों की उपलब्धता, डिजिटल कौशल और शिक्षा का स्तर अलग-अलग है। साथ ही सरकारी सेवाओं, वित्तीय सुविधाओं और रोजगार के डिजिटल उपयोग में भी अंतर देखने को मिलता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 71.4 प्रतिशत परिवार मोबाइल के जरिए इंटरनेट का उपयोग करते हैं, लेकिन 27.5 प्रतिशत परिवार अब भी पूरी तरह ऑफलाइन हैं। इंटरनेट उपयोग में पुरुष-महिला अंतर भी स्पष्ट है। कामकाजी उम्र की 35.6 प्रतिशत महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 57.6 प्रतिशत है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने वाले कई परिवारों को अब भी बाहरी व्यक्ति की मदद लेनी पड़ती है। ऐसे 20.4 प्रतिशत परिवारों में यह स्थिति देखी गई। इसमें कहा गया कि जिन परिवारों में शिक्षा का स्तर कम है, उनमें यह निर्भरता और बढक़र लगभग एक-तिहाई तक पहुंच जाती है। इससे पता चलता है कि कई लोगों के लिए इंटरनेट अभी भी एक ऐसा साधन है जिसे वे अकेले आसानी से उपयोग नहीं कर पाते।


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