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06-06-2026

भारत में जेर्न में रिलीजियस ट्यूर का के्रज बढ़ रहा

  •  भारत में आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन अब केवल बुजुर्गों या परिवारों तक सीमित नहीं रह गया है। ऑनलाइन बस टिकटिंग प्लेटफॉर्म रेडबस की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जेन जी और युवा यात्री अब देश के आध्यात्मिक पर्यटन क्षेत्र की अगुवाई कर रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 में धार्मिक और तीर्थ स्थलों के लिए हुई कुल बुकिंग में 53 परसेंट से अधिक हिस्सेदारी युवा यात्रियों की रही। रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंशियल ईरूर 2025 की तुलना में युवाओं की तीर्थ यात्राओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। युवा भारतीय बड़ी संख्या में ऋषिकेश, वाराणसी, तंजावुर, तिरुपति, नांदेड़ और उज्जैन जैसे प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों की यात्रा कर रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि नई पीढ़ी आधुनिक जीवनशैली के साथ-साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभवों में भी गहरी रुचि दिखा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का आध्यात्मिक पर्यटन क्षेत्र विभिन्न पीढिय़ों की भागीदारी के साथ लगातार मजबूत बना हुआ है, लेकिन हाल के वर्षों में युवा यात्रियों की उपस्थिति प्रमुख रूप से बढ़ी है। जेन जी अब इस श्रेणी का सबसे बड़ा यात्री समूह बन चुका है। आंकड़ों के अनुसार, इन यात्रियों में लगभग 69 परसेंट पुरुष हैं, जबकि महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 31 परसेंट है। यह दर्शाता है कि धार्मिक यात्राओं में युवाओं की भागीदारी व्यापक रूप से बढ़ रही है, हालांकि पुरुष यात्रियों की संख्या अभी भी अधिक है। युवा यात्रियों के बीच कुछ विशेष रूट्स की डिमांड तेजी से बढ़ी है। बेंगलुरु-तिरुपति, हैदराबाद-तिरुपति, ऋषिकेश-दिल्ली, पुणे-नांदेड़, चेन्नई-तंजावुर और इंदौर-उज्जैन मार्गों पर सबसे अधिक बुकिंग दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार केवल बेंगलुरु-तिरुपति मार्ग पर ही लाखों जेन जी यात्रियों ने यात्रा की है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि जैन जी के बीच आध्यात्मिक यात्राओं की योजना बनाने का तरीका तेजी से बदल रहा है। पहले जहां लोग काफी पहले से यात्रा की तैयारी करते थे

    वहीं अब युवा यात्री अंतिम समय में यात्रा बुक करने लगे हैं। यात्रा शुरू होने से चार घंटे के भीतर की गई बुकिंग का हिस्सा 2022 में 16 परसेंट था, जो 2026 में बढक़र लगभग 23 परसेंट हो गया है। इससे पता चलता है कि युवा यात्रियों के लिए आध्यात्मिक पर्यटन अधिक सहज, मोबाइल-आधारित और त्वरित निर्णयों पर आधारित हो गया है। नई पीढ़ी अब धार्मिक स्थलों की जानकारी केवल परिवार या समुदाय की सिफारिशों से नहीं प्राप्त कर रही है। यात्रा ब्लॉग, शॉर्ट वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और डिजिटल सामग्री भी युवाओं को इन स्थलों की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की बढ़ती लोकप्रियता ने तीर्थ पर्यटन को नई गति दी है। उद्योग से जुड़े वर्ष 2024 के अनुमानों के अनुसार, भारत के घरेलू पर्यटन में आध्यात्मिक पर्यटन की हिस्सेदारी लगभग 60 परसेंट है। यह दर्शाता है कि धार्मिक और सांस्कृतिक यात्राएं देश के पर्यटन उद्योग का सबसे बड़ा आधार बनी हुई हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि युवाओं की बढ़ती भागीदारी के बावजूद इन यात्राओं का मूल उद्देश्य नहीं बदला है। जैन जी के लिए भी ये यात्राएं परंपरा, परिवार, संस्कृति और आध्यात्मिक स्थलों से गहरे व्यक्तिगत जुड़ाव पर आधारित हैं। नई पीढ़ी आधुनिक तकनीक के माध्यम से इन यात्राओं तक पहुंच रही है, लेकिन उनकी आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव पहले की तरह ही मजबूत बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया, बेहतर परिवहन संपर्क, ऑनलाइन बुकिंग सुविधाओं और बढ़ती आय के कारण आने वाले वर्षों में युवा भारतीयों के बीच आध्यात्मिक पर्यटन की लोकप्रियता और बढ़ सकती है। इससे भारत का धार्मिक पर्यटन उद्योग और अधिक विस्तार हासिल कर सकता है।

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भारत में जेर्न में रिलीजियस ट्यूर का के्रज बढ़ रहा

 भारत में आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन अब केवल बुजुर्गों या परिवारों तक सीमित नहीं रह गया है। ऑनलाइन बस टिकटिंग प्लेटफॉर्म रेडबस की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जेन जी और युवा यात्री अब देश के आध्यात्मिक पर्यटन क्षेत्र की अगुवाई कर रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 में धार्मिक और तीर्थ स्थलों के लिए हुई कुल बुकिंग में 53 परसेंट से अधिक हिस्सेदारी युवा यात्रियों की रही। रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंशियल ईरूर 2025 की तुलना में युवाओं की तीर्थ यात्राओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। युवा भारतीय बड़ी संख्या में ऋषिकेश, वाराणसी, तंजावुर, तिरुपति, नांदेड़ और उज्जैन जैसे प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों की यात्रा कर रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि नई पीढ़ी आधुनिक जीवनशैली के साथ-साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभवों में भी गहरी रुचि दिखा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का आध्यात्मिक पर्यटन क्षेत्र विभिन्न पीढिय़ों की भागीदारी के साथ लगातार मजबूत बना हुआ है, लेकिन हाल के वर्षों में युवा यात्रियों की उपस्थिति प्रमुख रूप से बढ़ी है। जेन जी अब इस श्रेणी का सबसे बड़ा यात्री समूह बन चुका है। आंकड़ों के अनुसार, इन यात्रियों में लगभग 69 परसेंट पुरुष हैं, जबकि महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 31 परसेंट है। यह दर्शाता है कि धार्मिक यात्राओं में युवाओं की भागीदारी व्यापक रूप से बढ़ रही है, हालांकि पुरुष यात्रियों की संख्या अभी भी अधिक है। युवा यात्रियों के बीच कुछ विशेष रूट्स की डिमांड तेजी से बढ़ी है। बेंगलुरु-तिरुपति, हैदराबाद-तिरुपति, ऋषिकेश-दिल्ली, पुणे-नांदेड़, चेन्नई-तंजावुर और इंदौर-उज्जैन मार्गों पर सबसे अधिक बुकिंग दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार केवल बेंगलुरु-तिरुपति मार्ग पर ही लाखों जेन जी यात्रियों ने यात्रा की है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि जैन जी के बीच आध्यात्मिक यात्राओं की योजना बनाने का तरीका तेजी से बदल रहा है। पहले जहां लोग काफी पहले से यात्रा की तैयारी करते थे

वहीं अब युवा यात्री अंतिम समय में यात्रा बुक करने लगे हैं। यात्रा शुरू होने से चार घंटे के भीतर की गई बुकिंग का हिस्सा 2022 में 16 परसेंट था, जो 2026 में बढक़र लगभग 23 परसेंट हो गया है। इससे पता चलता है कि युवा यात्रियों के लिए आध्यात्मिक पर्यटन अधिक सहज, मोबाइल-आधारित और त्वरित निर्णयों पर आधारित हो गया है। नई पीढ़ी अब धार्मिक स्थलों की जानकारी केवल परिवार या समुदाय की सिफारिशों से नहीं प्राप्त कर रही है। यात्रा ब्लॉग, शॉर्ट वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और डिजिटल सामग्री भी युवाओं को इन स्थलों की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की बढ़ती लोकप्रियता ने तीर्थ पर्यटन को नई गति दी है। उद्योग से जुड़े वर्ष 2024 के अनुमानों के अनुसार, भारत के घरेलू पर्यटन में आध्यात्मिक पर्यटन की हिस्सेदारी लगभग 60 परसेंट है। यह दर्शाता है कि धार्मिक और सांस्कृतिक यात्राएं देश के पर्यटन उद्योग का सबसे बड़ा आधार बनी हुई हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि युवाओं की बढ़ती भागीदारी के बावजूद इन यात्राओं का मूल उद्देश्य नहीं बदला है। जैन जी के लिए भी ये यात्राएं परंपरा, परिवार, संस्कृति और आध्यात्मिक स्थलों से गहरे व्यक्तिगत जुड़ाव पर आधारित हैं। नई पीढ़ी आधुनिक तकनीक के माध्यम से इन यात्राओं तक पहुंच रही है, लेकिन उनकी आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव पहले की तरह ही मजबूत बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया, बेहतर परिवहन संपर्क, ऑनलाइन बुकिंग सुविधाओं और बढ़ती आय के कारण आने वाले वर्षों में युवा भारतीयों के बीच आध्यात्मिक पर्यटन की लोकप्रियता और बढ़ सकती है। इससे भारत का धार्मिक पर्यटन उद्योग और अधिक विस्तार हासिल कर सकता है।


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