दक्षिण भारत में मौसम प्रतिकूल होने से शकरकंद का उत्पादन 23-24 प्रतिशत कम हुआ दूसरी ओर सिलेंडर महंगा होने एवं कामगारों की कमी से साबूदाने बनाने की यूनिट कम चल रही है, जिससे इसका उत्पादन गत वर्ष की तुलना में 38-39 प्रतिशत कम होने का अनुमान आ रहा है। अभी नीचे वाले भाव में लोकल एवं चालानी मांग निकलने से पिछले महीने सात-आठ रुपए प्रति किलो की उत्पादक मंडियों में तेजी आ गई है तथा इसी लाइन पर 20 रुपए प्रति किलो और बढऩे के आसार दिखाई दे रहे हैं। साबूदाने का उत्पादन मुख्य रूप से तमिलनाडु के कोयंबटूर सेलम लाइन में देश के सकल उत्पादन का 70-72 प्रतिशत होता है तथा शेष 28-30 प्रतिशत मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ सहित अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रोसेसिंग किया जाता है। विगत 3 वर्षों से साबूदाने का उत्पादन निरंतर अधिक रहा है, क्योंकि दक्षिण भारत के उत्पादक क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहा एवं कच्चे माल की उपलब्धि अधिक रही। यही कारण है कि गत वर्ष नीचे में 38/40 रुपए प्रति किलो उत्पादक मंडियों में भाव देख आया है। मध्य प्रदेश की मंडियों में माल कम आने से 41/42 रुपए का साबूदाना 54/55 रुपए बिकने लगा है। कोयंबटूर लाइन में 50/51 रुपए क्वालिटी के अनुसार साबूदाना बिक रहा है। यहां भी माल कम आ रहा है, नया कच्चा माल इस बार कम निकलने से पड़ते नहीं लग रहे हैं। दूसरी ओर पहाड़ी 34 प्रतिशत बढ़ गए हैं। पुराने स्टॉक में कारोबारियों को भारी नुकसान लगने से अपना माल काटते चले गए हैं। यही कारण है कि यहां जो साबूदाना 45/46 रुपए प्रति किलो थोक में देख आया था, उसके भाव वर्तमान में 61/62 रुपए हो गए हैं। हल्के माल 58 रुपए भी बोल रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि पीछे से माल इस बार कम मिल रहा है, इसलिए पुराना स्टॉक ही ज्यादा बिक रहा है। आगे चलकर फलाहारी सीजन की मांग निकलने लगेगी, अभी भी इसकी खपत गर्मियों में भी तासीर ठंडी होने एवं आहार में हल्का होने से उत्तर भारत में बढ़ गई है, इन परिस्थितियों को देखते हुए साबूदाने का व्यापार इस बार भरपूर लाभ देने वाला लग रहा है। अत: वर्तमान भाव में साबूदाने रुक-रुक कर 20 रुपए की और जल्दी तेजी आ जाएगी।