अजवाइन की फसल इस बार 37-38 प्रतिशत कम हुई है, क्योंकि तैयार होने के समय में बेमौसमी बरसात लगातार हुई थी। दूसरी ओर पाकिस्तान सीमा पर सख्ती होने से वहां से हेरा फेरी में राजस्थान के रास्ते दिल्ली पहुंचने वाला माल आना लगभग 5-7 प्रतिशत ही रह गया है। इन परिस्थितियों में घरेलू अजवाइन में भारी तेजी की संभावना प्रबल हो गई है। चालू सप्ताह में भी 8/10 रुपए प्रति किलो की तेजी आ गई है, लेकिन पीछे से पड़ता 15-20 रुपए किलो महंगा पड़ रहा है। यद्यपि बाजारों में रुपए की भारी तंगी होने एवं ट्रक भाड़े बढऩे से उत्पादक मंडियों से यहां अजवाइन के अलावा सभी जिंस आकर महंगे पड़ रहे हैं। इस वजह से यहां के स्टॉक वाले माल पड़ते से अभी नीचे बिक रहे हैं। आज की तारीख में नए सौदे करने पर जामनगर नंदुरबार कुरनूल नीमच एवं जावरा लाइन से 15/20 रुपए प्रति किलो महंगे हो रहे है, क्योंकि जो भाड़ा 260 रुपए प्रति क्विंटल का था उसके भाव 320 रुपए हो गए हैं। हम मानते हैं कि ईरान इजरायल अमेरिका में जबरदस्त तनाव बना हुआ है, इन परिस्थितियों में निर्यात अनुकूल नहीं है। इन सब के बावजूद भी उत्पादन चालू सीजन में काफी कम रह जाने से उत्पादक एवं वितरक मंडियों में अजवाइन की आपूर्ति 42 प्रतिशत गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम हो रही है तथा किसी भी उत्पादक मंडी में अजवाइन का स्टॉक ज्यादा नहीं है, जो हल्की क्वालिटी की अजवाइन थी, वह काफी निपट गई है। जो अजवाइन मीडियम क्वालिटी की 150/160 रुपए प्रति किलो बिक रही थी, उसके भाव 160/170 रुपए प्रति किलो बोलने लगे। नीचे वाले हल्के माल भी जो 100 रुपए बोल रहे थे, उसके भाव 120 रुपए हो गए। बढिय़ा सिलेक्टेड माल 220/230 रुपए पर पहुंच गया, इन परिस्थितियों में जैसे ही ग्राहकी निकलेगी, इसमें 50 रुपए प्रति किलो की तेजी आनी कोई बड़ी बात नहीं है। इसकी बिजाई भी इस बार उतर व दक्षिण दोनों उत्पादक क्षेत्रों में कम हुई थी, क्योंकि पिछले दो वर्षों से अजवाइन के उत्पादकों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा है, इस वजह से अजवाइन में अभी भी लिवाली लाभदायक लग रही है। गौरतलब है कि नीमच रतलाम लाइन में स्टॉक काफी कट चुका है, राजस्थान के प्रतापगढ़, निंबाहेड़ा, जयपुर, मेड़ता लाइन में कुछ माल पड़ा है।, लेकिन वहां भी 72 प्रतिशत कट चुके हैं है। इधर गुजरात के जामनगर नंदुरबार लाइन में फसल को 35-40 प्रतिशत तक नुकसान होने स्टॉक ज्यादा नहीं है। वर्तमान वाले भाव केवल बाजारों में रुपए की तंगी होने एवं ग्राहकी के अभाव वाले हैं। विकाराबाद लाइन में भी फसल कम बता रहे हैं। दूसरी ओर अजवाइन की खपत बरसात के मौसम में जबरदस्त रहती है तथा आयुर्वेदिक कंपनियां भी जयपुर दिल्ली एवं कानपुर के साथ-साथ नीमच मंडी से खरीद करने लगी है।