यदि सब कुछ अनुमानों के अनुरूप रहा तो जल्दी ही देश में मानसून का आगमन हो जाएगा। निर्यातकों के बाद अब मानसून पूर्व की खरीद भी कमजोर पडऩे से जीरे की थोक कीमत में थोड़ी मंदी आई है। आगामी समय में जीरे में सुस्ती जारी रहने के आसार नजर आ रहे हैं। जीरे की तेजी-मंदी के सम्बन्ध में नवीनतम जानकारियां मिलती रहती हैं और उन्हें इससे लाभ भी होता है। केरल में आमतौर पर एक जून को मानसून आ जाता है लेकिन इस बार मौसम विभाग ने इसके करीब एक सप्ताह पहले ही पहुंचने का अनुमान जताया था। हालांकि इन पंक्तियों के लिखे जाने के समय तक मानसून का आगमन नहीं हुआ था लेकिन उम्मीद है कि यह एक-दो दिनों में पहुंच सकता है। दूसरी ओर, कीमत आकर्षक नहीं होने के कारण किसान अपनी जीरे की फसल की सीमित मात्रा में ही बिक्री कर रहे हैं। ऊंझा में जीरे की आवक घटती हुई 11-12 हजार बोरियों के निचले स्तर पर आ गई है। हालांकि इससे पूर्व बीते अप्रैल महीने के आरंभिक सप्ताह में यह आवक बढ़ती हुई 65 हजार बोरियों के रिकॉर्ड स्तर को छू गई थी। निर्यातकों की मांग का अभाव बना होने के साथ-साथ मानसून पूर्व की घरेलू मांग भी कमजोर पडऩे से जीरे की कीमत में भी रुक-रुककर मंदी आती रही है। चीन तो पहले से ही भारतीय बाजारों से दूर बना हुआ लेकिन बंगलादेश की खरीद भी कोई खास नहीं बनी होने की सूचना मिल रही है। पूर्व में फिस ने जीरे के उत्पादन में करीब 15 प्रतिशत की कमी आने की आशंका जताई थी। बहरहाल, ऊंझा में इसकी कीमत हाल ही में 40-50 रुपए मंदी होकर फिलहाल 3925-3960 रुपए प्रति 20 किलोग्राम के स्तर पर बनी होने की जानकारी मिली। इससे पूर्व हाल ही में इसमें 20-30 रुपए की मंदी आई थी। जीरे में आई इस मंदी का प्रमुख कारण यह था कि स्थानीय स्टॉकिस्टों, दिसावरों और निर्यातकों की मांग में कमी की स्थिति बनी हुई थी। इससे भी बड़ी बात यह थी कि ईरान में तनाव जारी होने की वजह से दुबई की मांग गायब है। आमतौर पर चीन की तुलना में तुर्की में जीरे की कीमत ऊंची होती है। इधर, स्थानीय थोक किराना बाजार में हाल ही में आई तेजी के बाद स्टॉकिस्टों की मजबूत लिवाली निकलने से जीरा सामान्य हाल ही में 500 रुपए मंदा होकर फिलहाल यह 21,700/22,000 रुपए पर बना हुआ है। इससे पूर्व हाल ही में इसमें 100 रुपए का सुधार हुआ था। भारत के अलावा विश्व में तुर्की और सीरिया को जीरे के अन्य उत्पादक देशों के रूप में जाना जाता है। अब अफगानिस्तान तथा ईरान भी चुनौती पेश करने लगे हैं। आमतौर पर तुर्की एवं सीरिया में संयुक्त रूप से करीब 35 हजार टन जीरे का उत्पादन होता है और इनकी क्वालिटी भारतीय जीरे की तुलना में हल्की होती है। चीन में जीरे की फसल की आवक खत्म हो गई है लेकिन इस बार वहां इसका उत्पादन बढक़र 16 लाख टन के आसपास होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा था। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के आरंभिक दस महीनों में देश से 3885.33 करोड़ रुपए कीमत के 1,66,878 टन जीरे का निर्यात हुआ है। एक वर्ष पूर्व आलोच्य अवधि में इसकी 1,97,050 टन मात्रा का निर्यात हुआ था और इससे 5386.32 करोड़ रुपए की आय हुई थी।