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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

05-06-2026

हल्दी में देर सवेर अच्छी तेजी की संभावना

  •  हम मानते हैं कि पिछले एक माह के अंतराल हल्दी में लगभग 5/6 रुपए प्रति किलो की गिरावट आ गई है, लेकिन महाराष्ट्र तमिलनाडु आंध्र प्रदेश में खोदाई के बाद प्रति हैक्टेयर उत्पादकता घटने की खबरें आ रही हैं, इसे देखते हुए इस करेक्शन के बाद पुन: बाजार बढक़र भविष्य में 175/180 रुपए प्रति किलो बन सकती है। हल्दी आंध्र प्रदेश तेलंगाना तमिलनाडु महाराष्ट्र आदि सभी उत्पादक राज्यों में 3 महीने से आ रही है तथा गत वर्ष की अपेक्षा हल्दी की बिजाई अधिक हुई थी, लेकिन जुलाई से अक्टूबर तक लगातार भारी बरसात होने से फसल का ग्रोथ कम होने के साथ-साथ जमीन के अंदर जड़ों में ऑक्सीजन नहीं मिलने से गांठे काफी खराब हो गई थी। हालांकि गत मार्च से अब तक नीचे में 115/116 रुपए प्रति किलो बनने के बाद वर्तमान में 167/168 रुपए प्रति किलो बिकने के बाद 20 रुपए प्रति किलो की गिरावट आ गई है। गौरतलब है कि सट्टेबाजी के दौर में बाजार तेज होते ही डिब्बे में सटोरिये बिकवाली करके बाजार को पटक देते हैं, क्योंकि डिब्बे की मोनोपोली चल रही है। सूखी हल्दी मार्च से आ रही है, जबकि गीला माल फरवरी में ही निकलने लगा था, जो डिब्बे में डिलीवरी हो चुका है। इसकी बिजाई जुलाई माह में होनी है, बड़े सटोरिए जो जनवरी तक की हल्दी मंदे में काफी खरीद चुके हैं, उनकी खरीद पूरी हो चुकी है, जिससे हल्दी वर्ष 2026 की एक माह में 152/153 रुपए से घटकर 144/145 रुपए प्रति किलो रह गई थी, अब उसके भाव 146/147 रुपए बोल रहे हैं। पुराने माल स्टॉक में ज्यादा नहीं है। इस बार हल्दी के उत्पादक क्षेत्रों में सोयाबीन की बिजाई अधिक की बात बोल रहे थे, जबकि उत्पादन में पोल की खबर सभी लोग बताने लगे हैं। हल्दी का स्टॉक किसी भी मंडी में ज्यादा नहीं है, केवल रुपए की तंगी होने तथा ऊंचे भाव में फंसे हुए कारोबारियों की घटाकर बिकवाली से मई तक दलदल बन गया था, जो अब उत्पादक मंडियों से पड़ते नहीं लग रहे हैं। हल्दी की घरेलू एवं निर्यात को मिलाकर खपत डेढ़ करोड़ बोरी की है, जबकि कुल उत्पादन 85-86 लाख बोरी रह जाने का लगाया जा रहा है तथा नई हल्दी आने पर मुश्किल से 5 लाख बोरी स्टॉक बच पाएगा। अत: नई फसल आने पर और बाजार तेज हो जाएगा। गौरतलब है कि नये सीजन में भी नई पुरानी मिलाकर कुल उपलब्धि अधिक से अधिक 90 लाख बोरी के करीब से अधिक नहीं रहा है, जबकि हमारी खपत डेढ़ करोड़ बोरी से अधिक है, इन परिस्थितियों में हल्दी का किसी भी मंडी में प्रेशर नहीं है। अत: आगे बाजार देर सवेर 170 रुपए बन जाएगा।

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हल्दी में देर सवेर अच्छी तेजी की संभावना

 हम मानते हैं कि पिछले एक माह के अंतराल हल्दी में लगभग 5/6 रुपए प्रति किलो की गिरावट आ गई है, लेकिन महाराष्ट्र तमिलनाडु आंध्र प्रदेश में खोदाई के बाद प्रति हैक्टेयर उत्पादकता घटने की खबरें आ रही हैं, इसे देखते हुए इस करेक्शन के बाद पुन: बाजार बढक़र भविष्य में 175/180 रुपए प्रति किलो बन सकती है। हल्दी आंध्र प्रदेश तेलंगाना तमिलनाडु महाराष्ट्र आदि सभी उत्पादक राज्यों में 3 महीने से आ रही है तथा गत वर्ष की अपेक्षा हल्दी की बिजाई अधिक हुई थी, लेकिन जुलाई से अक्टूबर तक लगातार भारी बरसात होने से फसल का ग्रोथ कम होने के साथ-साथ जमीन के अंदर जड़ों में ऑक्सीजन नहीं मिलने से गांठे काफी खराब हो गई थी। हालांकि गत मार्च से अब तक नीचे में 115/116 रुपए प्रति किलो बनने के बाद वर्तमान में 167/168 रुपए प्रति किलो बिकने के बाद 20 रुपए प्रति किलो की गिरावट आ गई है। गौरतलब है कि सट्टेबाजी के दौर में बाजार तेज होते ही डिब्बे में सटोरिये बिकवाली करके बाजार को पटक देते हैं, क्योंकि डिब्बे की मोनोपोली चल रही है। सूखी हल्दी मार्च से आ रही है, जबकि गीला माल फरवरी में ही निकलने लगा था, जो डिब्बे में डिलीवरी हो चुका है। इसकी बिजाई जुलाई माह में होनी है, बड़े सटोरिए जो जनवरी तक की हल्दी मंदे में काफी खरीद चुके हैं, उनकी खरीद पूरी हो चुकी है, जिससे हल्दी वर्ष 2026 की एक माह में 152/153 रुपए से घटकर 144/145 रुपए प्रति किलो रह गई थी, अब उसके भाव 146/147 रुपए बोल रहे हैं। पुराने माल स्टॉक में ज्यादा नहीं है। इस बार हल्दी के उत्पादक क्षेत्रों में सोयाबीन की बिजाई अधिक की बात बोल रहे थे, जबकि उत्पादन में पोल की खबर सभी लोग बताने लगे हैं। हल्दी का स्टॉक किसी भी मंडी में ज्यादा नहीं है, केवल रुपए की तंगी होने तथा ऊंचे भाव में फंसे हुए कारोबारियों की घटाकर बिकवाली से मई तक दलदल बन गया था, जो अब उत्पादक मंडियों से पड़ते नहीं लग रहे हैं। हल्दी की घरेलू एवं निर्यात को मिलाकर खपत डेढ़ करोड़ बोरी की है, जबकि कुल उत्पादन 85-86 लाख बोरी रह जाने का लगाया जा रहा है तथा नई हल्दी आने पर मुश्किल से 5 लाख बोरी स्टॉक बच पाएगा। अत: नई फसल आने पर और बाजार तेज हो जाएगा। गौरतलब है कि नये सीजन में भी नई पुरानी मिलाकर कुल उपलब्धि अधिक से अधिक 90 लाख बोरी के करीब से अधिक नहीं रहा है, जबकि हमारी खपत डेढ़ करोड़ बोरी से अधिक है, इन परिस्थितियों में हल्दी का किसी भी मंडी में प्रेशर नहीं है। अत: आगे बाजार देर सवेर 170 रुपए बन जाएगा।


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