मंडियों में सभी तरह के बासमती धान एवं चावल की शॉर्टेज बनी हुई है। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊंचे भाव होने से निर्यातकों की चौतरफा लिवाली चलने से पिछले दिनों के 800/900 रुपए की गिरावट के बाद 600-700 प्रति कुंतल की तेजी आ गई है तथा यहां से थोड़ा करेक्शन के बाद 500/600 रुपए और बढऩे के आसार बन गए हैं। इस बार सीजन के शुरुआत से ही खेतों में धान की दुर्गति देखकर अच्छी तेजी की संभावना व्यक्त की गई थी, जो आप लोगों के सामने है। पिछले महीने मंदडिय़ा टाइप के कारोबारियों ने साठी धान की जबरदस्त हवा बंपर होने की उड़ाकर बाजार को तोडक़र पानी-पानी कर दिया था तथा अत्यधिक मंदा, इसलिए भी आ गया, क्योंकि भारतीय बंदरगाहों पर कंटेनर मिलने में दिक्कत होने से निर्यातकों के काफी माल लोड होने से रह गए थे। यही कारण है कि उन पर पेनल्टी लगने से नए सौदे नहीं कर रहे थे। पिछले महीने के अंतिम सप्ताह कंटेनर मिलने तथा 90 प्रतिशत शिपमेंट हो जाने से निर्यातकों की फिर से लिवाली यूपी हरियाणा पंजाब से चावल में बढ़ गई, यही कारण है कि 10 दिन के अंतराल 600-700 रुपए प्रति कुंतल बढक़र 1401 चावल स्टीम 9500 रुपए प्रति क्विंटल हो गए हैं, जबकि वास्तव में 9300 रुपए तक ही व्यापार सुना गया। हम मानते हैं कि तेजी में तेजी और मंदे में मंदा कारोबारियों को लगने लगता है, उसी क्रम में धान की भारी किल्लत तरावड़ी अमृतसर करनाल कुरुक्षेत्र टोहाना कुरुक्षेत्र चीका सफीदों आदि राइस मिलों में बन गयी है, जिससे उत्तरांचल एवं यूपी के तराई वाले क्षेत्रों से धान की खरीद करने लगे हैं। इस वजह से धान के भाव भी 1401 के 4300/4500 रुपए प्रति कुंतल हो गए हैं तथा इसका चावल सेला व स्टीम दोनों तेज हो गया है। इसके साथ-साथ 1718 चावल के भाव भी सेला माल के 8200/8300 रुपए प्रति कुंतल हो गए हैं, जो 7800 मई माह में रह गए थे तथा इस भाव में भी कोई लिवाली नहीं थी। इसी तरह 1509 सेला भी जो 7550 बिक गया था, उसके भाव 8150 रुपए हो गए हैं, जबकि 8050 रुपए तक इसमें व्यापार हो गया है। वास्तविकता यह है कि जितनी साठी की बिजाई यूपी में बोल रहे हैं, उतनी बिजाई नहीं है, क्योंकि पानी की किल्लत रही है तथा अधिकतर राइस मिलें धान के अभाव में बंद पड़ी हैं, जिससे 70 प्रतिशत साठी यूपी में ही खप जाएगा, इसलिए हरियाणा पंजाब वालों को बढ़ाकर खरीद करना पड़ेगा, क्योंकि वहां माल नहीं है। मुख्य फसल आने में लंबा समय बाकी है। राइस मिलों में एडवांस में निर्यातको ने माल खरीद लिया है, इस वजह से अभी धान एवं चावल की किल्लत रहेगी। हम मानते हैं कि डोमेस्टिक में ग्राहकी का जबरदस्त अभाव चल रहा है, जिससे नया बाजार सहित लोकल मंडियों में कारोबारियों के गले में तेजी नहीं उतर रही है, लेकिन राइस मिलों का चावल ऊंचा बिका हुआ है, इसलिए ट्रक लोड में राइस मिलें ऊंचे भाव बोल रही हैं।