मखाने में पिछले महीने आई भारी गिरावट के बाद नीचे वाले भाव में बढिय़ा माल की मांग 2 दिन से सुधर गई है, जिससे उत्पादक मंडियों में 20-25 रुपए लूज मखाने के भाव तेज बोलने लगे हैं। यहां भी कुछ चसकी देखी गई। अत: बाजार 50/75 रुपए चौतरफा बढ़ सकता है। हम मानते हैं कि मखाने की आने वाली फसल जबरदस्त है, इसमें कोई दो राय नहीं है। इन सब के बावजूद भी पिछले महीने की आई जबरदस्त गिरावट के बाद उत्पादक मंडियों में बढिय़ा माल जो 725/750 रुपए प्रति किलो हरदा लाइन में बिक गए थे, उन में लिवाली आ गई है। यही कारण है कि उसके भाव 770/780 रुपए प्रति किलो बोलने लगे हैं। नीचे वाले माल 600/650 रुपए पूर्णिया दरभंगा गुलाब बाग गेरा बाड़ी लाइन में बोल रहे हैं। अभी नया माल आने में पूरा 2 महीने का समय बाकी है, उससे पहले शादियों में बढिय़ा माल की खपत बढ़ेगी। इसलिए चालू महीने में बाजार 50/75 रुपए प्रति किलो बढ़ सकता है। यहां भी जो माल 750/800 रुपए प्रति किलो के बीच में चल रहे हैं, उसमें पूछपरख आने लगी है, बढिय़ा माल जो नीचे में 1150 रुपए प्रति किलो बिक गया था, वह 2 दिनों के अंतराल 1200 रुपए बोलने लगे हैं। इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए एक बार बढिय़ा माल में बढ़त लग रही है। बंगाल की मंडियों में डेढ़ लाख बोरी(प्रति बोरी 6 किलो) के करीब स्टॉक बताया जा रहा है। बिहार के पूर्णिया दरभंगा गुलाब बाग मंडी में भी ज्यादा माल नहीं है। हम मानते हैं कि जयपुर में मखाना नीचे बिक रहा है, जिससे पंजाब तक वहां से पड़ता लग रहा है, लेकिन ग्वालियर एवं कानपुर में नीचे भाव पर अब बिकवाल नहीं आ रहे हैं। दिल्ली में भी ग्राहकी कमजोर है, लेकिन बेचू कम आ रहे हैं, इन परिस्थितियों में बाजार बढिय़ा माल का 50/75 रुपए यहां भी बढ़ सकता है।